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    167 करोड़ रुपये में बिकी इस भारतीय की पेंटिंग, अब 'वैक्सीन किंग' के घर की बढ़ाएगी शान

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 05:09 PM (IST)

    राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' पेंटिंग 167.20 करोड़ रुपये में बिकी, जो भारत की अब तक की सबसे महंगी कलाकृति (India Most Expensive Painting) बन गई ह ...और पढ़ें

    167 करोड़ में बिकी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग।

    167 करोड़ में बिकी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग।

    HighLights

    1. राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 167 करोड़ में बिकी।

    2. साइरस पूनावाला ने खरीदी भारत की सबसे महंगी कलाकृति।

    3. 'यशोदा और कृष्ण' ने तोड़ा भारतीय कला का रिकॉर्ड।

    नई दिल्ली। भारत के महान आर्टिस्टों में शुमार रहे राजा रवि वर्मा की एक पेंटिंग 167 करोड़ में बिकी है। इसे खरीदने वाला भी एक भारतीय ही है। राजा रवि की पेंटिग कोविशील्ड वैक्सीन बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट के मालिक साइरस पूनावाला ने खरीदा। इस भारतीय कलाकृति के बिकते ही यह किसी भी नीलामी में बिकने वाली भारत की सबसे महंगी कलाकृति (India Most Expensive Painting) बन गई।  इसने बिक्री के मामले में भारत की सबसे महंगी पेंटिंग का विश्व रिकॉर्ड भी बना दिया है।

    1890 के दशक में, जब राजा रवि वर्मा अपनी प्रसिद्ध के शिखर पर थे, तब उन्होंने 'यशोदा और कृष्ण' की एक शानदार पेंटिंग बनाई थी। उनकी Yashoda and Krishna पेंटिंग को सैफ्रॉन आर्ट की स्प्रिंग लाइव नीलामी में 167.20 करोड़ रुपये में साइरस पूनावाला ने खरीदा।

    कहां हुई भारत की सबसे मंहगी पेंटिंग की नीलामी?

    इसकी नीलामी 1 अप्रैल को मुंबई में हुई। दिल्ली के एक निजी संग्रहालय से आई राजा रवि की कलाकृति को खरीदने के लिए सात मिनट तक अरबपतियों के बीच जोरदार बोली लगी। अंत में बाजी साइरस पूनावाला ने मारी।

    राजा रवि की इस पेटिंग से पहले भारतीय कला की सबसे महंगी कृति का रिकॉर्ड एम.एफ. हुसैन की 1954 की 'Untitled (Gram Yatra)' के नाम था, जो मार्च 2025 में क्रिस्टीज की नीलामी में 118 करोड़ रुपये में बिकी थी।

    दोगुनी कीमत पर बिकी पेंटिंग

    राजा रवि वर्मा की पेंटिंग की कीमत 80 करोड़ से 120 करोड़ रुपये के बीच होने का अनुमान था, लेकिन आखिर में यह उससे दोगुनी कीमत पर बिकी। पूनावाला ने कहा कि यह खरीदारी उनके लिए सम्मान और कर्तव्य, दोनों ही थी।

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    उन्होंने कहा, "इस राष्ट्रीय धरोहर को समय-समय पर आम लोगों के देखने के लिए उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इसे संभव बनाना मेरा प्रयास रहेगा।"

    राजा रवि वर्मा की पेंटिंग में क्या था खास?

    राजा रवि वर्मा Yashoda and Krishna की पेंटिंग में यशोदा मां को गाय का दूध निकालते हुए दिखाया गया है, जबकि बाल रूप में भगवान कृष्ण पीछे से दूध के एक पात्र की ओर हाथ बढ़ाते हैं। यह कला दर्शक को अपने भीतर खींच लेता है और एक घरेलू पल को ऐसे अनुभव में बदल देता है जो किसी व्यापक और पवित्र कथा में सहभागिता का संकेत देता है।

    राजा रवि की यह पेंटिंग भारत की सांस्कृतिक विरासत के का हिस्सा है। इसलिए इस पेंटिंग को अरबपतियों ने खरीदने के लिए बड़ी-बड़ी बोली लगाई।

    कौन थे इस पेंटिंग को बनाने वाले राजा रवि वर्मा?

    'यशोदा और कृष्ण' की शानदार पेंटिंग बनाने वाले राजा रवि वर्मा भारत के महान कलाकारों में से एक थे। आज भी उनका नाम बड़ें पेंटरों में गिना जाता है। उनका जन्म 1848 में त्रावणकोर के कुलीन किलिमानूर परिवार में हुआ था। राजा रवि वर्मा को व्यापक रूप से शुरुआती आधुनिक भारतीय कला का अग्रदूत माना जाता है।

    राजा रवि वर्मा ने भारत में ऑयल पेंटिंग यानी जिसे तैल चित्रकला के नाम से भी जाना जाता है को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। या यूं कहें कि उन्हीं की वजह से ऑयल पेंटिंग मशहूर हुई। वह उन पहले भारतीय कलाकारों में से थे जिन्होंने यूरोपीय अकादमिक यथार्थवाद को भारतीय पौराणिक विषयों के साथ जोड़ा, जिससे उन्हें व्यापक पहचान मिली।

    1894 में, उन्होंने अपने चित्रों के किफायती प्रिंट बड़े पैमाने पर बनाने के लिए एक लिथोग्राफिक प्रेस भी स्थापित किया, जिससे हिंदू देवी-देवताओं के चित्र देश भर के घरों तक पहुंच सके। यही कारण है कि आज भी उनका नाम देश के महान कलाकारों में गिना जाता है।

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