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    पिछले El Nino सालों से सबक लेकर सरकार ने कसी कमर, खेती को लेकर बनाया नया रोडमैप

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 01:28 PM (IST)

    सरकार ने अल नीनो के संभावित प्रभाव से खरीफ फसलों को बचाने के लिए तैयारी की है, जिसमें ICAR ने कमजोर जिलों की पहचान की है। पिछले अल नीनो वर्षों के अनुभ ...और पढ़ें

    El Nino संकट से उबरने के लिए सरकार ने की तैयारी

    El Nino संकट से उबरने के लिए सरकार ने की तैयारी


    HighLights

    1. ICAR ने अल नीनो प्रभावित कमजोर जिलों की पहचान की।

    2. सरकार ने आपातकालीन फसल योजना और उपाय शुरू किए।

    3. कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को विशेष सलाह देंगे।

    नई दिल्ली| इस साल अल नीनो के चलते देश में आने वाले खरीफ सीजन की फसल और उसकी पैदावार को लेकर अनुमान और विश्वेषण शुरू हो गए हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) की ओर से पिछले अल नीनो वर्षों में फसल के नुकसान के ऐतिहासिक विश्लेषण (Analysis) पर आधारित है। ICAR ने ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां 2002, 2004 और 2009 के सूखे वाले 'अल नीनो' (El Nino) सालों के दौरान पैदावार में कम से कम 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसके साथ ही बारिश पर निर्भर मुख्य फसलों के लिए जिला-स्तर का 'वल्नरेबिलिटी मैप' तैयार किया गया है।

    धान-मक्के की फसल को भारी नुकसान

    अलनीनो का असर इस साल देशभर में देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग स्तर पर तैयारी कर रही है। बता दें कि अलनीनो और कमजोर मानसून के चलते धान के लिए 77, मक्का के लिए 65 और ज्वार-बाजरा में प्रत्येक के लिए 36 जिलों की पहचान की गई, जिन पर अलनीनो का विशेष रूप से असर देखने को मिलेगा।

    पिछले अलनीनो सालों से लिया सबक

    केंद्र सरकार की ओर से उन जिलों की पहचान की गई है जिनपर कमजोर मानसून का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इसके साथ ही राज्यों को सलाह दी गई है कि अगर बारिश में काफी कमी होती है, तो फसल के हिसाब से आपातकालीन उपाय और खेती से जुड़े जरूरी कदम उठाए जाएं ताकि पैदावार का नुकसान कम से कम हो। इस कदम से पता चलता है कि सरकार का फैसला न सिर्फ मौसम के मौजूदा अनुमानों पर, बल्कि पिछली अल-नीनो घटनाओं के दौरान खेती पर पड़े असर को ध्यान में रखकर जरूरी कदम उठाए गए हैं, खासकर अनाज पैदा करने वाले प्रमुख इलाकों में।

    पिछले अलनीनो में फसलों पर कितना असर?

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी सूत्रों का कहना है कि मॉनसून के असर को समझने के लिए ये तीन साल बहुत अहम हैं, क्योंकि 2002 में बारिश की कमी 19 प्रतिशत, 2004 में 13 प्रतिशत और 2009 में 23 प्रतिशत थी। 2002 के बाद अल नीनो वाले दूसरे सालों में, अन्य वजहों से मॉनसून पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था।

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    2002 में खरीफ सीजन के अनाज (चावल, मोटे अनाज और दालों) के उत्पादन में 22 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। वहीं 2004 और 2009 में 12 प्रतिशत की कमी देखी गई थी।

    कृषि विभाग के पूर्व सचिव ने कहा कि इस साल के हालात की तुलना पिछले तीन सालों से नहीं की जा सकती, क्योंकि मुख्य रूप से भूजल के जरिए पक्की सिंचाई वाली जमीन के दायरे में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि बारिश के फैलाव पर नजर रखने की जरूरत है कि इस साल यह कैसे होती है, क्योंकि यह पहले के मौकों जैसा नहीं हो सकता। उन्होंने ओडिशा का उदाहरण दिया, जहां इस साल ज्यादातर जिलों में मॉनसून के सामान्य रहने का अनुमान है।

    किसान विज्ञान केंद्र की सलाह पर करें काम

    ICAR की 2026 की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार, "आखिरी दौर का सूखा आम तौर पर पौधों के प्रजनन के चरणों के दौरान अधिक गंभीरता से पड़ता है"
    इससे पैदावार कम हो सकती है। ऐसी स्थितियों में कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) सलाह देंगे कि जहां भी संभव हो, सामान्य सिंचाई की जाए और साथ ही पत्तियों के जरिए पोषक तत्व दिए जाएं। फसल खराब होने की स्थिति में नकदी फसलों को प्राथमिकता दी जाएगी। बुरी तरह प्रभावित फसलों को चारे के तौर पर काटा जा सकता है।

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    सरकार ने शुरू की तैयारी

    सूत्रों ने बताया कि ICAR के हैदराबाद स्थित 'सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर' (CRIDA) ने राज्यों के कृषि विभागों के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं। इन बैठकों का मकसद स्टेकहोल्डर्स को अल-नीनो (El Nino) के संभावित असर और उससे निपटने के सही तरीकों के बारे में जागरूक करना है। इसमें फसल के मौसम के बीच में या आखिर में पड़ने वाले सूखे से निपटने के लिए 'आपातकालीन फसल योजना' (contingency crop planning) जैसी रणनीतियां भी शामिल हैं।
    अब तक, इसने चावल उगाने वाले प्रमुख राज्यों बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, असम, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल - के साथ बैठकों का पहला दौर पूरा कर लिया है।