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क्या आपकी कार की वजह से बढ़ रहे चीनी के दाम? सरकार ने क्लियर कर दिया एथेनॉल वाला 'फंडा'; ये हैं असली कारण

Updated: Sun, 23 Aug 2026 09:12 AM (IST)

देश में चीनी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, एक महीने में 15% से अधिक और दिल्ली में 60 ...और पढ़ें

क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम? (AI फोटो)

क्यों बढ़ रहे हैं चीनी के दाम? (AI फोटो)

HighLights

  1. चीनी की कीमतें एक महीने में 15% से अधिक बढ़ीं

  2. सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त चीनी आयात की अनुमति दी

  3. फसल खराब होने और जमाखोरी को मुख्य कारण बताया गया

नई दिल्ली। इस समय पूरे देश में चीनी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि चीनी के दाम एथेनॉल की वजह से बढ़ रहे हैं। मगर क्या ऐसा वाकई है? सरकार का इस पर क्या जवाब है और किन कारणों से चीनी के बढ़ रहे हैं, आइए जानते हैं।

चीनी की औसत कीमत कितनी बढ़ी?

भारत में चीनी की औसत कीमत एक महीने में 15 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 20 अगस्त को 55.7 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। दिल्ली में चीनी की खुदरा कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम के पार चली गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में कीमतें 20 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ी हैं। मगर इनमें अधिकतर इजाफा बीते कुछ दिनों में ही हुआ है।
नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) के अनुसार, भारत के प्रमुख चीनी व्यापार केंद्रों में से एक कोल्हापुर में 20 अगस्त को चीनी का थोक भाव 5,750 रुपये प्रति क्विंटल रहा। आइए जानते हैं कि चीनी के दाम इतनी तेजी से क्यों बढ़े और आपके शहर में इसका रेट कितना है।

देनी पड़ी आयात की इजाजत

चीनी की कीमतों में इस बढ़ोतरी के कारण सरकार को एक दशक में पहली बार 10 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की इजाजत देनी पड़ी है। साथ ही, जमाखोरी रोकने के लिए थोक खरीदारों और डीलरों द्वारा चीनी के स्टॉक करने पर सीमा लगाई गई है और चीनी मिलों में स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन का आदेश दिया गया है।

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क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

भारत में दुनिया में चीनी का सबसे बड़ा है। इसीलिए भारत को घरेलू बाजार के लिए ही 270-297 LMT चीनी की जरूरत होती है। चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह जमाखोरी और सप्लाई में कमी की चिंता को माना जा रहा है।
ऐसा कुछ राज्यों में बाढ़ और कुछ अन्य राज्यों में कम बारिश के कारण गन्ने की फसल खराब होने के चलते हुआ है। ऐसी घटनाएं उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में हुई हैं।

क्या हैं गन्ना उत्पादन को लेकर अनुमान?

इस मामले पर सरकार ने एक प्रेस रिलीज में कहा कि मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन लगभग 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) होने का अनुमान है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 343 LMT था। सरकार ने उत्पादन में इस कमी की वजह गन्ने में लगने वाली 'रेड रॉट' और 'टॉप बोरर' बीमारियों के साथ-साथ अधिक बारिश से खेतों में पानी भरने को बताया है।

मौसम विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश के कम से कम 35 जिलों में बारिश की कमी रही, जिनमें गन्ना उत्पादन करने वाले कई प्रमुख जिले भी शामिल हैं। उत्तर प्रदेश गन्ने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

कम बारिश बनी मुसीबत

महाराष्ट्र के कई प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों, जैसे सोलापुर, लातूर, नंदुरबार, बीड, परभणी और अहमदनगर में 21 अगस्त तक बारिश की कमी रही है। यह राज्य भारत में गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। गन्ने का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य, कर्नाटक में इस साल सामान्य से 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

हालांकि सरकार ने बयान में कहा है, "अनुमान से कम उत्पादन के बावजूद, अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।" मगर स्टॉक की मात्रा नहीं बताई गई।

एथेनॉल पर क्या है रुख?

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए चीनी को एथेनॉल बनाने की तरफ मोड़ने को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, आंकड़ों से पता चलता है कि कुल चीनी उत्पादन में उतार-चढ़ाव के बावजूद, एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी का आवंटन काफी हद तक स्थिर रहा है।
सरकार ने 21 अगस्त को कहा कि 2025-26 में देश में उत्पादित कुल चीनी का लगभग 9 प्रतिशत एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया गया है। साथ ही, सरकार ने यह भी बताया कि देश में उत्पादित एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्के से आता है।

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