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मक्के की इंडस्ट्रियल मांग बढ़ने से मुश्किल में पोल्ट्री सेक्टर, ₹110 प्रति किलो चिकन का बेस प्राइस तय करने की मांग की

Published: Fri, 06 Nov 2026 01:03 PM (IST)

पोल्ट्री उद्योग बढ़ती फीड लागत और चिकन की गिरती कीमतों से जूझ रहा है, जिसके कारण उन्होंने सरकार से गैर-GMO ...और पढ़ें

पोल्ट्री सेक्टर नई तैयारी में

पोल्ट्री सेक्टर नई तैयारी में

HighLights

  1. पोल्ट्री उद्योग फीड लागत और चिकन कीमतों से परेशान।

  2. सरकार से गैर-GMO मक्का के शुल्क-मुक्त आयात की मांग।

  3. लाइव चिकन का बेस प्राइस ₹110 प्रति किलो तय।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| पोल्ट्री सेक्टर बढ़ती फीड लागत और चिकन की कमजोर कीमतों से परेशान है। El Niño के असर और बाजार में मांग कम होने के कारण चिकन के दामों में भारी गिरावट आई है। इससे निपटने के लिए पोल्ट्री उद्योग ने सरकार से गैर-GMO मक्का का ड्यूटी फ्री आयात करने और FCI के ऐसे खाद्यान्न, जो इंसानों के खाने योग्य नहीं हैं, उन्हें पोल्ट्री फीड में इस्तेमाल करने की अनुमति देने की मांग की है।

इसके अलावा, सभी जोन के ब्रीडर्स ने बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए लाइव चिकन का बेस प्राइस ₹110 प्रति किलो तय करने पर सहमति जताई है।

सोमवार को हुई बैठक में All India Poultry Breeders Association (AIPBA), Pan India Breeders Association (PIBCC), TPBA सहित कई पोल्ट्री एसोसिएशन के पदाधिकारी और पोल्ट्री कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए। बैठक में El Niño, बढ़ती फीड लागत और चिकन की गिरती कीमतों पर चर्चा हुई।

कीमतों में गिरावट को बताया मौसमी

पोल्ट्री इंडस्ट्री के नेताओं ने कहा कि चिकन की कीमतों में हालिया गिरावट मुख्य रूप से मौसमी है। त्योहारों के दौरान चिकन की खपत कम होने से कीमतों पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है और आने वाले हफ्तों में कीमतों में सुधार हो सकता है। Venkateshwara Hatcheries Private Limited के जनरल मैनेजर केजी आनंद ने BusinessLine को बताया कि चिकन की कीमतों में गिरावट मौसमी कारणों से हुई है और अगले कुछ हफ्तों में इसमें सुधार होने की उम्मीद है।

सरकार से राहत की मांग

उद्योग ने फीड की बढ़ती लागत कम करने के लिए गैर-GMO मक्का का ड्यूटी फ्री आयात करने की मांग की है। साथ ही, बाजार में सोयाबीन की पर्याप्त उपलब्धता की बात भी कही गई। पोल्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधि अगले सप्ताह के अंत में नई दिल्ली में सरकारी अधिकारियों और नीति निर्माताओं से मुलाकात करेंगे। इस दौरान वे फीड लागत कम करने और चिकन बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के लिए जरूरी नीतिगत कदम उठाने की मांग करेंगे।

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मक्का पोल्ट्री का सबसे जरूरी फीड

मक्का और सोयाबीन पोल्ट्री फीड बनाने के लिए सबसे जरूरी एग्री प्रोडक्ट माने जाते हैं। प्री स्टार्टर से लेकर प्रॉपर फीड बनाने में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। मक्के की इंडस्ट्रियल मांग बढ़ने के कारण पोल्ट्री सेक्टर में इसका असर देखने को मिला है। इससे न सिर्फ सप्लाई में कमी आई है बल्कि कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है जिससे पोल्ट्री उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ प्रोडक्शन पर भी असर देखने को मिला है।

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