PM मोदी की सोने-WFH पर अपील के बाद 4 बड़े एक्शन की तैयारी में सरकार! रुपया, कच्चे तेल की आग से बचाने का मास्टरप्लान
पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव है, जिससे रुपये की कीमत और विदेशी मुद्रा भंडार प्रभावित हो रहा है। स ...और पढ़ें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने जैसी गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी से बचने की अपील की है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव और ईरान संकट के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था, रुपये की गिरती कीमत और विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर पड़ रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोने जैसी गैर-जरूरी चीजों की खरीदारी से बचने की अपील की है।
नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह बयान इस बात का संकेत हो सकता है कि सरकार जल्द ही कोई बड़ा नीतिगत बदलाव कर सकती है। आइए समझते हैं कि आने वाले दिनों में सरकार और रिज़र्व बैंक (RBI) क्या कदम उठा सकते हैं और विश्लेषकों का इस पर क्या कहना है?
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होने वाला है भारी इजाफा?
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90% और प्राकृतिक गैस का 50% आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध की शुरुआत से ही भारत उन चुनिंदा देशों में रहा है, जिसने ईंधन की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी तो कम कर दी थी, लेकिन तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को भारी घाटा सहना पड़ रहा है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार को अंततः पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं। अनुमान के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि होती है और यह पूरे साल बनी रहती है, तो भारत का आयात बिल लगभग 13-14 बिलियन डॉलर (देश की GDP का लगभग 0.4%) तक बढ़ सकता है।
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क्या फिर से लौट सकता है 'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर?
ईंधन की खपत और लागत को कम करने के लिए सरकार उन सेक्टर्स और कंपनियों में 'वर्क फ्रॉम होम' (Work From Home) को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है, जहां कर्मचारियों की ऑफिस में शारीरिक मौजूदगी अनिवार्य नहीं है। कई कंपनियों ने इस बात का मूल्यांकन शुरू कर दिया है कि क्या कर्मचारियों को हफ्ते में कम दिन ऑफिस बुलाया जा सकता है। टाटा ग्रुप (Tata Group) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) जैसी बड़ी कंपनियां आपूर्ति में आ रही बाधाओं और ईंधन की लागत को देखते हुए अपनी वर्कप्लेस पॉलिसी की समीक्षा कर रही हैं।
क्या सरकार उठाने जा रही है कोई अचानक या कड़ा आर्थिक कदम?
वित्त मंत्रालय ने पश्चिम एशिया संकट के लंबे समय तक खिंचने की आशंका को देखते हुए आंतरिक चर्चाएं शुरू कर दी हैं। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी 'अचानक' या झटके वाले कदम पर विचार नहीं किया जा रहा है, क्योंकि इससे बाजार में अफरा-तफरी मच सकती है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, इसलिए सरकार का मुख्य जोर ऊर्जा और विदेशी मुद्रा बचाने पर है।
क्या सोने के आयात शुल्क पर लगेगा कोई नया प्रतिबंध?
डॉलर की मांग को कम करने के लिए अधिकारियों ने पूर्व में (जैसे 2022 में) सोने और कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में 5 प्रतिशत की वृद्धि की थी। पीएम मोदी की अपील के बाद ऐसी अटकलें थीं कि सोने पर फिर से सख्ती हो सकती है। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में आयात शुल्क बढ़ाने या ऐसा कोई कदम उठाने का विचार नहीं किया जा रहा है।
क्या विदेश पैसे भेजने की लिमिट पर लगेगी रोक?
वर्तमान में लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत कोई भी व्यक्ति सालाना 250,000 डॉलर तक विदेश भेज सकता है। 2013 के मुद्रा संकट के दौरान भारत ने इस सीमा को घटा दिया था। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अभी इस तरह की किसी पाबंदी पर विचार नहीं किया जा रहा है। उनका मानना है कि ऐसा करने से निवेशकों के बीच गलत संदेश जाएगा और वे देश में पैसा लाने से कतराएंगे। इसके विपरीत, LRS भारतीयों को सस्ते वैल्यूएशन पर विदेशी एसेट्स में निवेश करने का मौका दे सकता है।
गिरते रुपये के लिए RBI के पास 4 अन्य अहम विकल्प?
भारतीय रुपया 2026 में अब तक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा बन गया है। रुपये को संभालने के लिए RBI पहले ही बाजार में डॉलर बेच रहा है।
1. एनआरआई (NRI) डिपॉजिऔर ट बॉन्ड्स
2013 (जिससे 26 बिलियन डॉलर आए थे) और 1998 के रिसर्जेंट इंडिया बॉन्ड (RIB) की तरह, केंद्रीय बैंक प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए विशेष योजनाएं ला सकता है।
2. पूंजी खाता उदारीकरण
भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी कर्ज लेने के नियमों को आसान बनाना और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की सीमाएं बढ़ाना, ताकि ज्यादा डॉलर देश में आ सकें।
3. तेल कंपनियों को सीधा डॉलर
बाजार पर दबाव कम करने के लिए RBI सीधे अपने भंडार से तेल कंपनियों को डॉलर मुहैया करा सकता है या उन्हें विशेष क्रेडिट सुविधा का उपयोग करने के लिए कह सकता है।
4. ब्याज दरों में बढ़ोतरी
मौद्रिक नीति का इस्तेमाल करते हुए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। बाजार अगले साल तक 70 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहा है, हालांकि इससे आर्थिक विकास दर प्रभावित होने का भी जोखिम रहता है।