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    ये बच्चा बड़ा होकर बना भारत की स्टील इंडस्ट्री का 'फादर', 125 साल से एशिया में दबदबा बरकरार; रतन टाटा से खास रिश्ता

    Updated: Mon, 08 Jun 2026 08:08 AM (IST)

    भारतीय स्टील उद्योग का मार्केट साइज 2032 तक 227.38 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। जमशेदजी टाटा को भारतीय स्टील उद्योग का जनक माना जाता है, जिन्होंन ...और पढ़ें

    जमशेदजी टाटा कहलाते हैं फादर ऑफ स्टील इंडस्ट्री (AI जनरेटेड फोटो)

    जमशेदजी टाटा कहलाते हैं फादर ऑफ स्टील इंडस्ट्री (AI जनरेटेड फोटो)

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    नई दिल्ली। आज साल 2026 में भारतीय स्टील इंडस्ट्री का मार्केट साइज लगभग 150.50 अरब डॉलर (14.29 लाख करोड़ रुपये) है। अनुमान है कि 2032 तक यह लगभग 7.12% की CAGR से बढ़कर 227.38 अरब डॉलर (21.58 लाख करोड़ रुपये) तक पहुँच जाएगा। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड स्टील प्रोड्यूसर होने के नाते, भारत की घरेलू क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है और 2030 तक इसे 300 MTPA तक ले जाने का लक्ष्य है। भारत में कई बड़ी स्टील कंपनियां और बड़े स्टील कारोबारी हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि भारत के पहले बड़े स्टील कारोबारी हैं, जिन्हें फादर ऑफ इंडियन स्टील इंडस्ट्री भी कहा जाता है? आइए बताते हैं।

    जमशेदजी टाटा

    जमशेदजी टाटा, जो कि रतन टाटा के परदादा लगते हैं, को भारतीय स्टील उद्योग का जनक (Father of the Indian Steel Industry) माना जाता है। 1900 के दशक की शुरुआत में, उन्होंने एक औद्योगिक भारत का सपना देखा और 'टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी' (TISCO), जिसे अब 'टाटा स्टील' के नाम से जाना जाता है, की स्थापना की। यह एशिया की पहली इंटीग्रेटेड प्राइवेट स्टील कंपनी बनी।

    जमशेदजी टाटा को भारत में आधुनिक उद्योगों का भी जनक माना जाता है, और स्टील इंडस्ट्री की नींव रखना उनकी सबसे दूरदर्शी सोच थी। 19वीं सदी के अंत में जब भारत पूरी तरह आयातित स्टील पर निर्भर था, तब जमशेदजी ने देश में ही लौह-अयस्क के भंडार, कोयला और पानी की उपलब्धता को देखते हुए स्वदेशी स्टील प्लांट का सपना देखा।

    अमेरिका और यूरोप से बुलाए एक्सपर्ट्स

    जमशेदजी ने अमेरिका और यूरोप के एक्सपर्ट्स को बुलाकर जगहों का सर्वे कराया और झारखंड के साकची गाँव को चुना, जो बाद में जमशेदपुर बना।
    उन्होंने सिर्फ फैक्ट्री नहीं, बल्कि कर्मचारियों के लिए शहर, स्कूल, अस्पताल और बेहतर श्रम नीतियों की कल्पना भी की थी। इस तरह जमशेदजी ने दूरदर्शिता, वैज्ञानिक सोच और राष्ट्र-निर्माण की भावना से भारत में स्टील इंडस्ट्री की मजबूत बुनियाद रखी।

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    कैसा था शुरुआती सफर?

    ब्रिटिश प्रशासन की तरफ से चुनौतियों के बावजूद, जमशेदजी टाटा ने लौह अयस्क (Iron Ore) की खोज की अगुवाई की और भारत में बड़े पैमाने पर स्टील उत्पादन की नींव रखी। जमशेदजी के निधन के बाद, उनके बेटे सर दोराबजी टाटा और उनके चचेरे भाई आर.डी. टाटा ने औपचारिक रूप से कंपनी की स्थापना की।

    भारत का पहला नियोजित औद्योगिक शहर

    साकची में जमशेदजी के प्लांट से स्टील का पहला इनगॉट (धातु का टुकड़ा) निकला, जिससे भारत में घरेलू कमर्शियल स्टील की शुरुआत हुई। इस प्लांट की स्थापना से जमशेदपुर बसा, जो भारत का पहला नियोजित औद्योगिक शहर है।
    हालांकि 1904 में अपने स्टील प्लांट के चालू होने से पहले ही जमशेदजी का निधन हो गया, लेकिन उनके उत्तराधिकारियों ने उनके विजन को सफलतापूर्वक पूरा किया और टाटा स्टील के एशिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी बनने का रास्ता तैयार किया। टाटा स्टील इस समय 27.16 अरब डॉलर की मार्केट कैप के साथ एशिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी है।

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