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    Adani के हाथों बिकी JP Associates की एक और कंपनी का निकला दिवाला, न अनिल अग्रवाल, न अदाणी, इस दिग्गज ने मारी बाजी

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 11:57 AM (IST)

    जेपी ग्रुप की भिलाई जेपी सीमेंट दिवालिया प्रक्रिया के तहत डालमिया ग्रुप को बेची जा रही है। डालमिया भारत लिमिटेड की सहायक कंपनी ने बोली जीती है, जिससे ...और पढ़ें

    डालमिया भारत ने दिवालिया प्रक्रिया में भिलाई जेपी सीमेंट की बोली जीती।

    डालमिया भारत ने दिवालिया प्रक्रिया में भिलाई जेपी सीमेंट की बोली जीती।

    HighLights

    1. दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही भिलाई जेपी सीमेंट

    2. डालमिया भारत ने दिवालिया प्रक्रिया में बोली जीती।

    3. मध्य भारत में डालमिया की क्षमता बढ़ेगी।

    नई दिल्ली। जेपी ग्रुप की पैरेंट कंपनी जेपी एसोसिएट्स (JP Associates) तो पिछले ही साल दिवालिया प्रक्रिया के तहत अदाणी के हाथों बिकी थी। जेपी ग्रुप को खरीदने के बाद अदाणी ग्रुप को कई कंपनियों मेंं हिस्सेदारी मिली थी। इन सबके बीच अब जेपी ग्रुप की एक और कंपनी दिवालिया होकर बिकने जा रही है। इस बार खरीदार अदाणी नहीं, और न ही इस रहेस में अनिल अग्रवाल की वेदांता है। जेपी की दिवालिया कंपनी को खरीदने की रेस में 87 साल एक पुरानी कंपनी है। जेपी की जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड भी दिवालिया होकर बिकी थी। अब नंबर लगा है जेपी की भिलाई जेपी सीमेंट (Bhilai Jaypee Cement) का।

    यह वही कंपनी है, जिसने अदाणी ग्रुप से जेपी एसोसिएट्स के मध्य प्रदेश का रीवा (Rewa) और उत्तर प्रदेश के चुर्क (Churk), चुनार (Chunar) के सीमेंट प्लांट को खरीदा था। लेकिन अब यह कंपनी जेपी ग्रुप को भिलाई सीमेंट प्लांट को खरीदने की बोली जीत चुकी है। क्रेडिटर्स ने कंपनी के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी है।

    किसने जीती Bhilai Jaypee Cement को खरीदने की बोली

    जेपी ग्रुप के भिलाई जेपी सीमेंट प्लांट को खरीदने की बोली 87 साल पुरानी डालमिया ग्रुप ने जीती है। भारतीय सीमेंट क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए, डालमिया भारत लिमिटेड (Dalmia Bharat Limited) की सहायक कंपनी ने भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड (BJCL) के अधिग्रहण की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। डालमिया सीमेंट (भारत) लिमिटेड (DCBL) को इस अधिग्रहण के लिए 'सफल समाधान आवेदक' (Successful Resolution Applicant) के रूप में चुना गया है।

    डालमिया भारत का मालिकाना हक और प्रबंधन डालमिया परिवार के पास है और इसके मुख्य लीडर पुनीत डालमिया और गौतम डालमिया हैं। इस कंपनी की स्थापना मूल रूप से 1939 में स्वर्गीय श्री जयदयाल डालमिया ने की थी।

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    डालमिया भारत लिमिटेड ने बताया कि उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी DCBL द्वारा पेश की गई समाधान योजना (Resolution Plan) को भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड के कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने मंजूरी दे दी है। इस प्रक्रिया के तहत, 28 जुलाई 2026 को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल की ओर से कंपनी को 'लेटर ऑफ इंटेंट' (LOI) भी जारी कर दिया गया है।

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    यह पूरी प्रक्रिया इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC), 2016 के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) के माध्यम से संचालित की जा रही है।

    छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में बढ़ेगी ताकत

    इस अधिग्रहण के जरिए डालमिया भारत की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। भिलाई जेपी सीमेंट लिमिटेड के पास वर्तमान में दो प्रमुख इकाइयां हैं:

    भिलाई (छत्तीसगढ़): यहां कंपनी के पास 2.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) की क्षमता वाला ग्राइंडिंग यूनिट है।

    बाबूपुर (मध्य प्रदेश): यहां 1.1 मिलियन टन प्रति वर्ष (MnTPA) की क्षमता वाला क्लिंकर यूनिट स्थित है।

    इन इकाइयों के जुड़ने से डालमिया भारत की मौजूदगी मध्य और पूर्वी भारत के बाजारों में और अधिक मजबूत हो जाएगी।

    NCLT की मंजूरी का इंतजार

    हालांकि कर्जदाताओं ने इस योजना को हरी झंडी दे दी है, लेकिन इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), कटक और अन्य नियामक संस्थाओं की मंजूरी मिलना बाकी है। अक्टूबर 2025 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने भिलाई जेपी सीमेंट के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया था।

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