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    JP Associates की खरीदारी में आया नया मोड़, अदाणी के हाथ से निकल सकती है डील; वेदांता ने उठाया बड़ा कदम

    Updated: Tue, 17 Feb 2026 12:21 PM (IST)

    गौतम अदाणी के अदाणी ग्रुप द्वारा दिवालिया जेपी एसोसिएट्स को खरीदने की प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। अनिल अग्रवाल की वेदांता लिमिटेड ने अदाणी के ₹15,0 ...और पढ़ें

    JP Associates की खरीदारी में आया नया मोड़, अदाणी के हाथ से निकल सकती है डील; वेदांता ने उठाया बड़ा कदम

    JP Associates की खरीदारी में आया नया मोड़, अदाणी के हाथ से निकल सकती है डील; वेदांता ने उठाया बड़ा कदम

    HighLights

    1. वेदांता ने अदाणी की जेपी एसोसिएट्स बोली को NCLT में चुनौती दी।

    2. वेदांता ने लेंडर्स के फैसले को 'कमर्शियल साजिश' बताया।

    3. अदाणी का जेपी एसोसिएट्स अधिग्रहण अब कानूनी पचड़े में।

    नई दिल्ली। दिवालिया हो चुकी जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड (JP Associates) को खरीदने की बोली जीतने वाली गौतम अदाणी के अदाणी ग्रुप की मुश्किलें बढ़ सकती है। दरअसल, इसे लेकर अनिल अग्रवाल की वेदांता ने एक ऐसा कदम उठाया जिससे अदाणी ग्रुप की जेपीएसोसिएट्स को खरीदने की प्रक्रिया में और समय लग सकता है।

    दरअसल, वेदांता लिमिटेड ने दिवालिया हो चुकी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्लान को लेंडर्स की मंजूरी को चुनौती देते हुए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाया है।

    क्या बोले वेदांता के वकील

    वेदांता की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील यू.के. चौधरी ने कोर्ट को बताया कि लेंडर्स ने कंपनी को साइडलाइन कर दिया था, जबकि वह पहले के राउंड की बिडिंग में सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई थी।

    वेदांता ने दावा किया कि वह ऑक्शन के दौरान नेट प्रेजेंट वैल्यू के आधार पर ₹12,505 करोड़ की सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी के तौर पर सामने आई थी।

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    चौधरी ने ट्रिब्यूनल के सामने कहा, "यह कोई कमर्शियल समझदारी नहीं है। यह एक कमर्शियल साज़िश है ताकि मुझे बाहर रखा जा सके, इसके लिए एक ऐसा तरीका अपनाया जा रहा है जो गलत और साफ नहीं है।"

    वेदांता ने क्या मांग की?

    वेदांता ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की इलाहाबाद बेंच से संपर्क किया है और मंजूर प्लान को नए सिरे से विचार के लिए लेंडर्स को वापस भेजने को कहा है। कंपनी ने क्रेडिटर्स की कमेटी (CoC) के फैसले को 'कमर्शियल साजिश' बताया और कहा कि बिडिंग प्रोसेस गलत था।

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    वेदांता ने कहा कि उसका ऑफर नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के आधार पर 12,505 करोड़ रुपये का था। नवंबर 2025 में लेंडर्स के वोटिंग शुरू करने से दो दिन पहले, उसने पेमेंट की शर्तों को बेहतर बनाने के लिए एक एडिशनल जमा किया।

    उसने अपफ्रंट कैश को लगभग 3,770 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 6,563 करोड़ रुपये कर दिया और इक्विटी इन्फ्यूजन को 400 करोड़ रुपये से दोगुना करके 800 करोड़ रुपये कर दिया। कुल बिड वैल्यू वही रही।

    लेकिन, लेंडर्स ने वेदांता के बदले हुए पेमेंट स्ट्रक्चर पर कुछ भी एक्शन लेने से मना कर दिया था। इसे लेकर अनिल अग्रवाल की वेदांता ने कहा कि स्ट्रक्चर को नजरअंदाज करने से उसका इवैल्यूएशन स्कोर कम हो गया और वह रेस से बाहर हो गई।

    अदाणी का प्लान था ज्यादा आकर्षक

    अदाणी ने पहले ही  6,000 करोड़ रुपये देने की पेशकश पहले की थी और बाकी का पैसा दो साल में चुकाने का प्रस्ताव दिया था, जबकि वेदांता 5 साल में बाकी के पैसों को चुकाती। यही कारण था कि लेंडर्स ने अदाणी के पेमेंट प्लान को आकर्षक मानते हुए अदाणी ग्रुप को चुना था।

    वेदांता ने लगाई थी सबसे बड़ी बोली

    अदाणी ग्रुप ने जयप्रकाश गौड़ की दिवालिया हो चुकी JAL को खरीदने की बोली जीती थी। हालांकि, उससे पहले यह बोली अनिल अग्रवाल की वेदांता ने जीती थी। लेकिन अनिल अग्रवाल की वेदांता से बेहतर अदाणी ग्रुप का पेमेंट प्रोसेस करने का प्लान बेहतर था। इसलिए अदाणी ग्रुप को प्राथमिकता दी गई थी।

    अदाणी ग्रुप ने जेपी को खरीदने के लिए 14500 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जबकि वेदांता ने ₹17,000 करोड़ की बोली लगाई थी। इसके बावजूद JAL के लेंडर्स ने अदाणी ग्रुप को चुना था।

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