मूंग, सोयाबीन, मूंगफली और कपास की बुवाई में गिरावट, धान में भी दिखी सुस्ती! क्या कहते हैं खरीफ सीजन के नए आंकड़े?
4 सितंबर 2026 तक खरीफ बुवाई पिछले साल से 1.60% कम होकर 1,086.31 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है, जिसमें ...और पढ़ें

खरीफ फसलों की बुवाई का नया आंकड़ा
HighLights
कुल खरीफ बुवाई पिछले साल से 1.60% कम।
धान, मूंगफली, सोयाबीन और कपास का रकबा घटा।
अरहर, उड़द, तिल की बुवाई में वृद्धि दर्ज।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| इस साल अलनीनो के असर के चलते खरीफ सीजन में फसलों की कम बुवाई का अनुमान लगाया गया था। अब 4 सितंबर 2026 तक भारत में खरीफ की बुआई का आंकड़ा सामने आया है, जिससे पता चलता है कि, 4 सितंबर 2026 तक 1,086.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,104.00 लाख हेक्टेयर की तुलना में 17.69 लाख हेक्टेयर या 1.60% कम है।
धान के बुवाई के क्षेत्रफल में 3.74% की कमी आई है, जबकि मोटे अनाजों का कुल क्षेत्रफल भी मुख्य रूप से मक्का और रागी की कम बुवाई के कारण दबाव में बना हुआ है। दूसरी ओर, अरहर (तूर) और उड़द की अधिक बुवाई के चलते दलहनों का कुल रकबा 1.60% बढ़ा है। इसके साथ ही तिलहनों का कुल क्षेत्रफल 0.56% घटा है, हालांकि तिल और सूरजमुखी की बुवाई में बढ़ोतरी देखी गई है। नकदी फसलों में कपास का रकबा भी मामूली रूप से घटा है। कुल मिलाकर, विभिन्न फसलों में मिश्रित रुझान उत्पादन संभावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं और कृषि जिंसों की कीमतों को चुनिंदा समर्थन मिल रहा है।
कुछ फसलों के मिलेंगे बेहतर दाम
भारत में खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर से नीचे बने रहने के कारण कृषि जिंसों की कीमतों को चुनिंदा समर्थन मिलने की संभावना है। आसान भाषा में समझें तो कुछ फसलों की अच्छी कीमत मिल सकती है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों की तुलना में कुल बुवाई का अंतर कम हुआ है, लेकिन धान, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का और कपास जैसी फसलों में कम रकबा उत्पादन संबंधी चिंताओं को बनाए रख सकता है। वहीं, दलहनों की बेहतर बुवाई और कुछ तिलहनी फसलों के मजबूत प्रदर्शन से आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम हो सकती हैं, जिससे कुछ जिंसों में कीमतों की तेजी सीमित रह सकती है।
धान की बुवाई में गिरावट, दालों में बढ़ोतरी
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 4 सितंबर 2026 तक कुल खरीफ बुवाई 1,086.31 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 1,104.00 लाख हेक्टेयर थी। यह 17.69 लाख हेक्टेयर या 1.60% की गिरावट को दर्शाता है। धान का रकबा 421.82 लाख हेक्टेयर रहा, जो सालाना आधार पर 3.74% कम है। इसके उलट, कुल दलहन क्षेत्रफल 115.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 117.13 लाख हेक्टेयर हो गया, जो 1.60% की वृद्धि दर्शाता है।
प्रमुख फसलों की बुवाई में दिखा दम
दलहनों की बुवाई में मिश्रित रुझान देखने को मिले। तूर (अरहर) का रकबा 1.61% बढ़ा, जबकि उड़द की बुवाई में 11.95% की वृद्धि दर्ज की गई। तिल की बुवाई में 15.15%, सूरजमुखी का क्षेत्रफल 95.69% और रामतिल (नाइजरसीड) का रकबा 13.29% बढ़ा।
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इन फसलों की बुवाई सुस्त
दूसरी ओर मूंग का रकबा 3.05% घटा साथ ही अन्य दलहनों का क्षेत्रफल 13.14% कम रहा। कुल तिलहन क्षेत्रफल 0.56% घटकर 191.99 लाख हेक्टेयर रह गया। मूंगफली और सोयाबीन का रकबा क्रमशः 1.65% और 0.94% घटा। इन सब के अलावा अरंडी (कैस्टरसीड) की बुवाई 13.61% घटकर कमजोर बनी रही।
