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    '100 साल के बाद भी मजबूत रहेगी', LIC ने कसी कमर! 57 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ रहेगी सबसे ताकतवर

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 01:44 PM (IST)

    LIC के CEO आर. दुरईस्वामी ने कहा कि कंपनी बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति मजबूत करेगी और देश के विकास में योगदान जारी रखेगी। ...और पढ़ें

    बढ़ती प्रतिस्पर्घा के बावजूद एलआईसी अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करे्गी : सीईओ

    बढ़ती प्रतिस्पर्घा के बावजूद एलआईसी अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करे्गी : सीईओ

    HighLights

    1. एलआईसी बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति मजबूत करेगी।

    2. कंपनी 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का प्रबंधन करती है।

    3. एलआईसी प्रौद्योगिकी विस्तार के लिए फिनटेक इकाई पर विचार कर रही है।

    नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक आर. दुरईस्वामी ने कहा है कि जीवन बीमा क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद एलआईसी बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।

    LIC 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों का कर रही प्रबंधन

    अभी जीवन बीमा क्षेत्र में एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी (LIC Market Share) करीब 60 प्रतिशत है और यह 57 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करती है। कंपनी की रियल एस्टेट संपत्तियों का मूल्य लगभग 60,000 करोड़ रुपये है। दुरईस्वामी ने पीटीआई-भाषा के साथ साक्षात्कार में कहा कि एलआईसी की विकास यात्रा भारत की प्रगति से गहराई से जुड़ी रही है और भविष्य में भी यह संबंध कायम रहेगा।

    उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे देश की अर्थव्यवस्था बढ़ती है, एलआईसी भी बढ़ती है। एलआईसी की वृद्धि देश की आर्थिक प्रगति को भी गति देती है।’’

    उन्होंने कहा कि 1956 में स्थापना के बाद से एलआईसी ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अब ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में भी अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    दुरईस्वामी ने कहा, “1956 से 2026 तक की हमारी यात्रा देश के विकास के साथ जुड़ी रही है। हम भविष्य में भी देश की जरूरतों को पूरा करने और उसके विकास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

    उन्होंने कहा कि एलआईसी न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया की सबसे बड़ी वित्तीय संस्थाओं में से एक है और इतने बड़े आकार के साथ समाज तथा देश के प्रति विशेष जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। भविष्य की रणनीति पर उन्होंने कहा कि बाजार में नए खिलाड़ियों के प्रवेश के बावजूद एलआईसी का लक्ष्य केवल नेतृत्व वाली स्थिति बनाए रखना नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धियों से पर्याप्त बढ़त बनाए रखना है।

    एलआईसी की स्थापना 1956 को हुई

    उन्होंने कहा, “हमारी आकांक्षा है कि 75वें वर्ष, 100वें वर्ष और उसके बाद भी एलआईसी समृद्ध और मजबूत संस्था बनी रहे तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देती रहे।” एलआईसी की स्थापना एक सितंबर, 1956 को जीवन बीमा कारोबार के विस्तार, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों तक इसकी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। उस समय 245 भारतीय और विदेशी बीमा कंपनियों तथा भविष्य निधि संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण कर एलआईसी का गठन किया गया था।

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    केंद्र सरकार ने इसके लिए पांच करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई थी। डिजिटल क्षेत्र में विस्तार की योजना पर दुरईस्वामी ने कहा कि एलआईसी अपनी बढ़ती प्रौद्योगिकी और नवोन्मेषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) इकाई स्थापित (LIC Fintech Expansion) करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। यह निवेश के माध्यम से या आंतरिक रूप से विकसित मॉडल के जरिये किया जा सकता है।

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