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    नवरत्न- महारत्न में क्या है अंतर, सरकार क्यों देती है ये तमगा? दर्जा मिलते ही बनती हैं सबसे पावरफुल

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 07:17 PM (GMT+05:30)

    हम यहां आपको सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (what is Maharatna status) को मिनीरत्न, नवरत्न और महारत्न श्रेणियों में किस आधार पर, कैसे वर्गीकृत किया जात ...और पढ़ें

    'महारत्न', 'नवरत्न' और 'मिनिरत्न' जैसी खास श्रेणियां क्या हैं?

    'महारत्न', 'नवरत्न' और 'मिनिरत्न' जैसी खास श्रेणियां क्या हैं?

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। भारत के आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने में पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (PSUs) अहम भूमिका निभाती हैं। सरकार इन सरकारी कंपनियों को उनके मुनाफ़े, नेट वर्थ और कुल वित्तीय प्रदर्शन जैसे आधारों पर 'महारत्न', 'नवरत्न' और 'मिनिरत्न' जैसी खास श्रेणियों में बांटती है। आइए जानें कि इन स्टेटस का क्या मतलब है (what is Maharatna status), इनके लिए क्या शर्तें हैं और इनसे कंपनियों को क्या फायदे मिलते हैं।

    महारत्न और नवरत्न कंपनियां क्या हैं?

    ये सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSEs) हैं जिनमें सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है। ये कंपनियाँ मुख्य रूप से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अहम क्षेत्रों जैसे तेल, गैस, बिजली, माइनिंग, ट्रांसपोर्ट, इंजीनियरिंग और डिफेंस में काम करती हैं। इनके आकार और आर्थिक मज़बूती के आधार पर इन्हें तीन स्तरों में बांटा गया है।


    1. मिनीरत्न: छोटी लेकिन मुनाफ़ा कमाने वाली PSU, जिन्हें काम-काज में सीमित आज़ादी मिलती है।

    2. नवरत्न: बहुत अच्छा प्रदर्शन करने वाली कंपनियाँ, जिन्हें मिनीरत्न के मुकाबले ज़्यादा फ़ाइनेंशियल और बिज़नेस आज़ादी मिलती है।

    3. महारत्न: बहुत बड़ी और आर्थिक रूप से मज़बूत PSU, जिन्हें सरकार की तरफ़ से काम-काज और निवेश के मामले में सबसे ज़्यादा आज़ादी मिलती है।

    कैसे मिलता है महारत्न और नवरत्न का दर्जा?

    'महारत्न' का दर्जा पाने के लिए शर्तें

    criteria for Navratna company

     

    'नवरत्न' का दर्जा पाने के लिए शर्तें

    कंपनी के पास पहले से ही 'मिनीरत्न (कैटेगरी-I)' का दर्जा होना चाहिए।

    कंपनी का सरकारी पैमानों जैसे मुनाफ़ा, नेट वर्थ, मैनपावर की लागत और प्रति शेयर कमाई (EPS) के आधार पर शानदार ट्रैक रिकॉर्ड होना चाहिए।

    सरकार क्यों देती है ये दर्जा और क्या हैं इसके फायदे?

    सरकार का मुख्य मकसद इन कंपनियों को नौकरशाही की औपचारिकताओं (रेड टेप) से मुक्त करके ज़्यादा स्वायत्तता देना है।

    'महारत्न' और 'नवरत्न' का दर्जा मिलने के बाद, ये कंपनियाँ सरकार की मंज़ूरी के बिना ही हज़ारों करोड़ रुपये के निवेश से जुड़े फ़ैसले स्वतंत्र रूप से ले सकती हैं।

    इन दर्जों की वजह से कंपनियाँ आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में अपना विस्तार कर सकती हैं, नए जॉइंट वेंचर बना सकती हैं या सब्सिडियरी कंपनियाँ स्थापित कर सकती हैं।
    तेज़ी से व्यावसायिक निर्णय लेने से उनकी परिचालन दक्षता और बाज़ार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

    देश की प्रमुख महारत्न और नवरत्न कंपनियां

    Maharatna companies in India

    महारत्न और नवरत्न कंपनियां भारत के इंडस्ट्रियल और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की रीढ़ हैं, जिन्हें सरकार वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने के लिए विशेष ताकत और आजादी देती है।

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