सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    आजादी के बाद भी 55 साल तक नहीं थी आम भारतीय को तिरंगा फहराने की अनुमति, इस उद्योगपति ने लंबी लड़ाई लड़ दिलाया अधिकार; क्या है कहानी?

    Updated: Mon, 26 Jan 2026 01:15 PM (IST)

    यह लेख 'हर घर तिरंगा' (Har Ghar Tiranga) अभियान के संदर्भ में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के नागरिकों के अधिकार के इतिहास पर प्रकाश डालता है। इसमें बताया गय ...और पढ़ें

    नवीन जिंदल ने तिरंगे के लिए लड़ी थी कानूनी लड़ाई

    नवीन जिंदल ने तिरंगे के लिए लड़ी थी कानूनी लड़ाई

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नई दिल्ली। साल 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर घर तिरंगा (Har Ghar Tiranga) अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान का मकसद नागरिकों को अपने घरों पर तिरंगा फहराकर राष्ट्रीय ध्वज के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने के लिए प्रेरित करना है। मगर क्या आप जानते हैं कि भारत की आजादी के बाद लंबे समय तक आम लोगों को किसी भी वक्त तिरंगा फहराने की अनुमति नहीं थी। इसके लिए एक अरबपति कारोबारी ने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने तिरंगा फहराने की अनुमति दी। कौन हैं वो अरबपति और क्या था पूरा मामला, आइए जानते हैं।

    कौन हैं ये कारोबारी?

    हम जिस अरबपति कारोबारी की बात कर रहे हैं वो हैं नवीन जिंदल (Naveen Jindal Flag Hoisting Case), जो कि जिंदल स्टील एंड पावर के चेयरमैन हैं। जिंदल परिवार की कुल नेटवर्थ 70278 करोड़ रुपये है, जो JSW Group को ऑपरेट करता है।

    क्या है तिरंगा फहराने की कहानी?

    इस कहानी की शुरुआत 1993 में हुई। दरअसल नवीन जिंदल 1993 में अपने प्लांट परिसर में तिरंगा फहराने जा रहे थे, मगर उन्हें एक अधिकारी ने रोक दिया। तब उन्हें पता चला कि भारतीय नागरिकों को अपने देश का झंडा फहराने की अनुमति नहीं है। तब केवल सरकारी कार्यालयों में तिरंगा फहराने और बड़े सरकारी अधिकारियों की गाड़ी पर ही राष्ट्रीय ध्वज लगाने की अनुमति थी।

    1995 में पहुंचे कोर्ट

    नवीन जिंदल को ये बात बुरी लगी। उन्होंने तब ही फैसला कर लिया कि वे इस मामले में आवाज उठाएंगे। लिहाजा साल 1995 में जिंदल ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया और याचिका दायर की। उन्होंने ध्वज कोड में बदलाव करने की मांग की।

    खबरें और भी

    आखिरकार जिंदल की हुई जीत

    याचिका में जिंदल ने तर्क दिया कि तिरंगा फहराना देश के हर नागरिक का मूल अधिकार होना चाहिए। ये मामला हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और लगभग एक दशक तक चलता रहा। फिर सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी, 2004 को एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिसमें हर भारतीय को भारत का राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' पूरे साल फहराने की अनुमति दी गयी।
    इसके बाद से ही भारत के हर नागरिक को तिरंगा फहराने की अनुमति मिली।

    ये भी पढ़ें - क्यों नहीं हो पा रही भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील? ये हैं टैरिफ और कानूनी अड़चनें