धीरूभाई अंबानी और रतन टाटा से दो-दो हाथ करने वाला देश का इकलौता उद्योगपति, 290 साल पुराने इंडस्ट्री हाउस का मालिक
भारत का 'कॉरपोरेट समुराई' जिसने टाटा और अंबानी से भी पंगा लिया... यहां जानें जिन्ना के पोते और 47,837 करोड़ के साम्राज्य के मालिक नुस्ली वाडिया की सफल ...और पढ़ें

नुस्ली वाडिया भारत के जाने-माने अरबपति व्यवसायी और वाडिया ग्रुप के चेयरमैन हैं।

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
'मैं लकड़ी की तलवारें नहीं निकालता' (I don't draw wooden swords)- यह मशहूर बयान भारत के उस दिग्गज उद्योगपति का है, जिन्हें भारतीय मीडिया 'कॉरपोरेट समुराई' के नाम से बुलाती है। हम बात कर रहे हैं वाडिया ग्रुप के चेयरमैन नुस्ली वाडिया की। धीरूभाई अंबानी से लेकर रतन टाटा तक से कानूनी और कारोबारी लड़ाई लड़ने वाले नुस्ली वाडिया का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। आइए जानते हैं 290 साल पुराने उद्योग घराने के इस वारिस की सफलता (Nusli Wadia Success Story) की रोचक कहानी और उनके जीवन अहम पड़ाव के बारे में।
कौन हैं नुस्ली वाडिया और क्या है उनका 290 साल पुराना कारोबारी साम्राज्य?
नुस्ली वाडिया भारत के जाने-माने अरबपति व्यवसायी और वाडिया ग्रुप के चेयरमैन हैं। इस ग्रुप की जड़ें साल 1736 में जहाज निर्माण (shipbuilding) से जुड़ी हैं। आज यह बिस्कुट (ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज) से लेकर टेक्सटाइल (बॉम्बे डाइंग), एविएशन, रसायन और रियल एस्टेट तक फैला हुआ है। हाल ही में (सितंबर 2024), नुस्ली वाडिया ने मुंबई में 10 एकड़ का एक भूखंड 130 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक) में बेचा है।
फोर्ब्स के अनुसार वह दुनिया के 694वें और 2025 में भारत के 44वें सबसे अमीर व्यक्ति हैं। नुस्ली वाडिया की नेटवर्थ 5.3 बिलियन डॉलर (करीब 49,152 करोड़ रुपये) है। हालांकि, उनकी एविएशन कंपनी 'गो फर्स्ट' (Go First) ने साल 2023 में दिवालियापन (bankruptcy) घोषित कर दिया था।
पाकिस्तान के मोहम्मद अली जिन्ना से इनका क्या पारिवारिक नाता है?
पारसी समुदाय में वाडिया परिवार का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और प्रभावशाली स्थान है। नुस्ली वाडिया का जन्म 15 फरवरी 1944 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था। उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि राजनीति और बिजनेस के बड़े दिग्गजों से जुड़ी है।
खबरें और भी
- नाना: पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना।
- मां: दीना वाडिया (जिन्ना की बेटी)।
- पिता: नेविल वाडिया, जो एक जाने-माने बिजनेसमैन थे।
- दादा: सर नेस वाडिया, जो 19वीं सदी के अंत में एक प्रसिद्ध कपड़ा उद्योगपति थे, जिन्होंने बॉम्बे को दुनिया के सबसे बड़े कॉटन ट्रेडिंग सेंटर में बदलने में अहम भूमिका निभाई थी।
अपने ही पिता को कंपनी बेचने से कैसे रोका और कैसे तय किया सफलता का सफर?
नुस्ली वाडिया की सफलता की सबसे बड़ी कहानी अपनी ही पुश्तैनी कंपनी को बिकने से बचाना है। एक समय ऐसा आया जब उनके पिता नेविल वाडिया कंपनी बेचकर विदेश में बसना चाहते थे। लेकिन नुस्ली को यह मंजूर नहीं था।
कंपनी को बिकने से रोकने के लिए नुस्ली ने एक मास्टरप्लान बनाया जिसमें उन्होंने अपनी मां, बहन, दोस्तों और दिग्गज उद्योगपति जे.आर.डी. टाटा जैसे शुभचिंतकों की मदद से कंपनी में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी बचत का निवेश करने और शेयर खरीदने के लिए राजी किया ताकि बाहरी हाथों में कंपनी न जाए।
इसके बाद नुस्ली खुद लंदन गए, जहां उनके पिता डील पक्की कर रहे थे। उन्होंने पिता को समझाया और कंपनी न बेचने के लिए मना लिया। इस ऐतिहासिक कदम के बाद, साल 1977 में नुस्ली वाडिया अपने पिता के बाद कंपनी के चेयरमैन बने और वाडिया ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर ले गए।
नुस्ली वाडिया को 'कॉरपोरेट समुराई' क्यों कहा जाता है और दिग्गजों से कैसी रही दुश्मनी?
नुस्ली वाडिया हमेशा अपने बेबाक अंदाज और कई कानूनी लड़ाइयों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने उसूलों के लिए देश के सबसे ताकतवर कॉर्पोरेट घरानों से टक्कर ली थी। रिलायंस के फाउंडर धीरूभाई अंबानी के साथ उनकी कॉर्पोरेट प्रतिद्वंद्विता भारतीय बिजनेस इतिहास की सबसे चर्चित कहानियों में से एक है।
अपने पुराने दोस्त रतन टाटा के साथ भी उनका बड़ा विवाद हुआ। साल 2016 में टाटा-मिस्त्री विवाद के दौरान नुस्ली वाडिया को तीन टाटा कंपनियों के बोर्ड से बाहर कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
नुस्ली वाडिया परिवार में कौन-कौन हैं?
नुस्ली वाडिया ने पूर्व एयर होस्टेस मॉरीन वाडिया से शादी की है। मॉरीन फैशन और ग्लैमर की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं; वह 'ग्लैडरैग्स' (Gladrags) मैगजीन की प्रमुख हैं और मिसेज इंडिया ब्यूटी पेजेंट की आयोजकों में से एक हैं। इस दंपती के दो बेटे नेस वाडिया और जहांगीर (जेह) वाडिया हैं। उनके बेटे नेस वाडिया खेल और व्यापार दोनों जगत में काफी मशहूर हैं और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की क्रिकेट टीम 'पंजाब किंग्स' (पूर्व में किंग्स इलेवन पंजाब) के सह-मालिक हैं।