Passport Debate: पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड और वोटर आईडी नहीं तो फिर क्या है आपके भारतीय होने का सबूत? नियम चौंका देगा!
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है, जिससे सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी नागरिकता प ...और पढ़ें

पासपोर्ट, आधार, पैन कार्ड और वोटर आईडी नहीं तो फिर क्या है आपके भारतीय होने का सबूत, नियम चौंका देगा! (AI Generated Image)
HighLights
पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा।
नागरिकता अधिनियम 1955 असली नागरिकता प्रमाण पत्र देता है।
आधार, पैन कार्ड केवल पहचान के दस्तावेज हैं।
नई दिल्ली। पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। सरकार का साफ कहना है कि पासपोर्ट आपकी नागरिकता का सबूत नहीं है। ऐसे में सोशल मीडिया पर अब तगड़ी बहस छिड़ गई है और लोगों के मन में सवाल है कि भारत के नागरिक होने का असली सबूत क्या है?
पासपोर्ट का नागरिकता का सबूत न होना कोई नई बात नहीं है, कानून की किताबों में इसे कई साल पहले ही साफ कर दिया गया था। अकसर लोगों को लगता है कि अगर उनके भारत का पासपोर्ट है तो वे उसे पाकर भारत के नागरिक हो जाते हैं, लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत का पासपोर्ट किसी को भी अलॉट किया जा सकता है, इसलिए ये नागरिकता का सबूत नहीं है।
क्या है पासपोर्ट एक्ट 1976?
पासपोर्ट एक्ट 1976 की धारा 20 साफ-साफ कहती है कि भारत सरकार, भारत के बाहर के नागरिकों को भी भारत का पासपोर्ट दे सकती है, बशर्ते वो जनहित के लिए जरूरी हो। इसका मतलब है कि कानून खुद मानता है कि पासपोर्ट और नागरिकता एक चीज नहीं, दो अलग-अलग चीजें हैं। वैसे तो सरकार ज्यादातर भारतीयों को ही पासपोर्ट देती है पर एक्ट की धारा 20 ये विशेष छूट देती है।
भारत में कैसे मिलती है नागरिकता?
भारत में नागरिकता मिलने के अलग-अलग प्रावधान हैं। 26 जनवरी 1950 से 1 जुलाई 1987 के बीच भारत में जन्मे हर व्यक्ति को नागरिकता मिली है। 1987-2003 के बीच माता-पिता में से एक के भारतीय नागरिक होने पर भी बच्चों को नागरिकता मिलती थी। 2003 के बाद जन्मे बच्चों के लिए दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों या एक नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो तो नागरिकता मिल सकती है। साथ ही विदेश में जन्मे बच्चे को भारतीय माता-पिता के आधार पर वंश से नागरिकता मिल सकती है, बशर्ते उसका जन्म एक साल के अंदर भारतीय दूतावास में रजिस्टर कराया गया हो।
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वहीं भारतीय मूल के लोगों के लिए कुछ खास स्थितियों में आवेदन करके रजिस्ट्रेशन के जरिए नागरिकता मिल सकती है। वहीं जो लोग विदेशी हैं और अवैध प्रवासी नहीं हैं और वे लगातार 12 सालों से भारत में रह रहे हैं, तो सरकार उन्हें अपने आप ही शपथ दिलवा कर नागरिकता दे देती है।
आधार, पैन नहीं तो क्या है नागरिकता की पहचान?
इस सवाल का जवाब आपको नागरिकता अधिनियम, 1955 में मिल सकता है। ये तय करता है कि कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं। सारी चीजें वेरिफाई करने के बाद आपको सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिलता है जो आपकी नागरिकता का असली प्रमाण है। आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और तमाम तरह के दस्तावेज सिर्फ पहचान प्रमाण पत्र हैं, लेकिन आप उन्हें बतौर सिटिजनशिप सर्टिफिकेट इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।