PM Kisan Yojana: 7 साल में कहां और कितना खर्च हुआ पैसा? RTI से सामने आई योजना की फंडिंग की पूरी तस्वीर
PM Kisan Yojana: सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी से पता चला है कि पीएम किसान योजना के लिए पिछले सात वर्षों में आवंटित बजट का पूरा उपयोग ...और पढ़ें

पीएम किसान योजना
HighLights
आरटीआई ने पीएम किसान योजना के 7 साल के खर्च का खुलासा किया।
कई वर्षों में योजना का पूरा आवंटित बजट खर्च नहीं हो पाया।
पीएम किसान योजना अगले पांच साल के लिए जारी रखने को मंजूरी मिली।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Yojana) योजना को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत सामने आई जानकारी में पिछले सात वर्षों के दौरान योजना के बजट आवंटन और वास्तविक खर्च की तस्वीर सामने आई है। आंकड़ों से पता चलता है कि सरकार ने हर साल इस योजना के लिए बड़ा बजट रखा, लेकिन कई वर्षों में पूरा आवंटित पैसा खर्च नहीं हो सका।
योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी। इसके तहत पात्र किसानों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता तीन बराबर किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
RTI में क्या सामने आया?
RTI से मिली जानकारी के अनुसार, PM-KISAN योजना के लिए हर वित्त वर्ष में बजट आवंटित किया गया, लेकिन वास्तविक खर्च कई बार आवंटन से कम रहा। इसका कारण पात्र लाभार्थियों की संख्या में बदलाव, ई-केवाईसी, आधार सत्यापन, भूमि रिकॉर्ड की जांच और अपात्र लाभार्थियों को हटाने जैसी प्रक्रियाएं बताई जाती हैं।
करोड़ों किसानों को मिला लाभ
PM-KISAN देश की सबसे बड़ी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं में शामिल है। इसके माध्यम से करोड़ों किसानों के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि भेजी जाती है। सरकार समय-समय पर लाभार्थियों का सत्यापन भी करती है ताकि केवल पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिले।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मकसद किसानों को खेती से जुड़े खर्चों में मदद देना और उनकी आय को सहारा प्रदान करना है। इसके तहत सालाना 6,000 रुपये की सहायता तीन किस्तों में सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाती है।
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हाल ही में क्या हुआ?
इस बीच, केंद्र सरकार ने PM-KISAN योजना को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए लगभग 3.15 लाख करोड़ रुपये के कुल वित्तीय प्रावधान को भी स्वीकृति मिली है, जिससे आने वाले वर्षों में भी पात्र किसानों को योजना का लाभ मिलता रहेगा।