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    रुपया को डूबने से बचाने के लिए RBI ने निकाला 'ब्रह्मास्त्र', फिर लौटेंगे 2013 और 1997 जैसे हालात? जानें पूरा प्लान

    Updated: Thu, 02 Apr 2026 08:51 PM (IST)

    RBI Crisis Measures 2026: ईरान युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल और रुपये की गिरावट के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक ने 'क्राइसिस प्लेबुक' खोल ...और पढ़ें

    रुपया को डूबने से बचाने के लिए RBI ने निकाला 'ब्रह्मास्त्र', फिर लौटेंगे 2013 और 1997 जैसे हालात? जानें पूरा प्लान

    रुपया को डूबने से बचाने के लिए RBI ने निकाला 'ब्रह्मास्त्र', फिर लौटेंगे 2013 और 1997 जैसे हालात? जानें पूरा प्लान

    HighLights

    1. RBI ने रुपये की गिरावट रोकने को सट्टेबाजी पर लगाई रोक

    2. 2013 में रघुराम राजन ने FCNR(B) स्वैप से रुपये को बचाया

    3. 1997 में बिमल जालान ने 'रेशर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स' से संकट टाला

    नई दिल्ली| दुनियाभर में जारी ईरान युद्ध ने केवल सीमाओं को ही नहीं, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमी को भी हिलाकर रख दिया है। महंगाई आसमान छू रही है, शेयर बाजार गोते लगा रहे हैं और भारतीय रुपया एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों की लिस्ट में आ गया है।

    इस इमरजेंसी जैसे हालात से निपटने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Crisis Measures 2026) ने अपना 'क्राइसिस प्लेबुक' खोल दिया है। बुधवार देर रात RBI ने अचानक कुछ ऐसे बड़े फैसलों का ऐलान किया, जिसने 2013 के 'टेपर टेंट्रम' और 1997 के एशियाई वित्तीय संकट की यादें ताजा कर दी हैं।

    RBI का बड़ा कदम: सट्टेबाजी पर लगाम

    रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI ने सबसे पहले बैंकों पर नकेल कसी है। पिछले शुक्रवार को RBI ने बैंकों की नेट ओपन रुपया पोजीशन को घटाकर महज 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया।

    इससे पहले बैंकों को अपनी पूंजी का 25% तक पोजीशन रखने की छूट थी। इसके तुरंत बाद, RBI ने बैंकों को 'नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स' (NDF) ऑफर करने से रोक दिया है।

    सीधे शब्दों में कहें तो RBI ने उन रास्तों को बंद कर दिया, जहां से रुपये की वैल्यू के साथ सट्टेबाजी (Arbitrage trades) की जा रही थी। इस एक फैसले से बैंकों को करीब 30 अरब डॉलर के ट्रेड खत्म करने पड़े हैं। RBI का संदेश साफ है- रुपये की स्थिरता सर्वोपरि है।

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    2013 में जब 'फ्रेजाइल फाइव' में था भारत

    आज के हालात ने 2013 के उस दौर की याद दिला दी, जब भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के पांच सबसे कमजोर देशों (Fragile Five) में गिना जाता था। उस समय अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी आसान मौद्रिक नीति को वापस लेने (Taper Tantrum) का संकेत दिया था, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा बाहर भागने लगा था।

    तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रघुराम राजन को RBI की कमान सौंपी थी। राजन ने रुपये को बचाने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी रणनीति अपनाई थी:

    • FCNR(B) स्वैप विंडो: बैंकों को विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के लिए सब्सिडी वाली सुविधा दी गई, जिससे महज 3 महीने में 26 अरब डॉलर भारत आए।
    • सोने पर पाबंदी: करंट अकाउंट डेफिसिट कम करने के लिए सोने के आयात पर ड्यूटी 10% कर दी गई और '80:20' का सख्त नियम लागू किया गया।
    • ब्याज दरों में बढ़ोतरी: महंगाई से लड़ने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 8% तक ले जाया गया।

    1997 का संकट और बिमल जालान की सूझबूझ

    इतिहास के पन्ने पलटें तो 1997 का एशियाई वित्तीय संकट भी एक बड़ी सीख देता है। तब थाईलैंड से शुरू हुई आग ने पूरे दक्षिण-पूर्वी एशिया को अपनी चपेट में ले लिया था। भारत तब बच गया क्योंकि हमने अपनी अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नहीं खोला था।

    तत्कालीन गवर्नर बिमल जालान ने रुपये को एकदम गिरने देने के बजाय धीरे-धीरे 18% तक एडजस्ट होने दिया। साथ ही 'रेशर्जेंट इंडिया बॉन्ड्स' (RIB) के जरिए NRI से 4 अरब डॉलर जुटाए, जिससे हमारे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिली।

    यह भी पढ़ें- 12 साल बाद '₹' ने दोहराया इतिहास, एक दिन में इतनी बड़ी तेजी, रंग लाई RBI की कोशिश

    अब आगे क्या हो सकता है?

    मौजूदा संकट गहरा है, क्योंकि ईरान युद्ध के मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन के रुख को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। RBI फिलहाल अपनी पुरानी रणनीतियों मौद्रिक सख्ती, कैपिटल कंट्रोल और लिक्विडिटी मैनेजमेंट का इस्तेमाल कर रहा है।

    इतिहास गवाह है कि भारत ने हर संकट से लड़ने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार और सख्त नियमों का बखूबी इस्तेमाल किया है। अब देखना यह है कि RBI के ये ताजा पैंतरे रुपये को कितनी जल्दी और कितनी मजबूती से संभाल पाते हैं।