RBI का 'ब्रह्मास्त्र' फेल! डॉलर बेचने की जगह विदेश से भारत लाए $40 बिलियन, फिर भी क्यों नहीं चढ़ा रुपया?
RBI Rupee Strategy: भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये को मजबूत करने के लिए अपनी रणनीति बदली है, अब वह विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचने के बजाय विदेश से नए ...और पढ़ें
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RBI का 'ब्रह्मास्त्र' फेल! डॉलर बेचने की जगह विदेश से भारत लाए $40 बिलियन, फिर भी क्यों नहीं चढ़ रहा रुपया?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| भारतीय रुपये (Rupee) में आ रही लगातार गिरावट के बीच उसे मजबूत बनाए रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI Rupee Strategy) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां केंद्रीय बैंक रुपये पर दबाव बढ़ने पर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से डॉलर बेचकर बाजार को संभालता था, वहीं अब वह विदेश से नए डॉलर भारत लाने पर ज्यादा जोर दे रहा है। इसके लिए एनआरआई जमा, विदेशी कर्ज और सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़ाने जैसे कई कदम उठाए गए हैं। हालांकि, इन प्रयासों से देश में अरबों डॉलर आए हैं, लेकिन रुपये की कीमत में अब तक कोई बड़ी मजबूती देखने को नहीं मिली है।
पहले RBI कैसे बचाता था रुपया?
जब भी रुपये पर दबाव बढ़ता था और डॉलर महंगा होने लगता था, तब RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर बेचता था। इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ती थी और रुपये की गिरावट पर कुछ हद तक रोक लग जाती थी। लेकिन इस रणनीति की सबसे बड़ी कमजोरी यह थी कि हर बार डॉलर बेचने से देश का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जाता था। ऐसे में भविष्य में संकट आने पर RBI के पास हस्तक्षेप करने की क्षमता भी घट सकती थी।
लेकिन अब क्या बदला?
- जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद RBI ने नई रणनीति अपनाई। इसका मकसद सिर्फ रिजर्व से डॉलर बेचने के बजाय विदेश से नए डॉलर भारत लाना है। RBI ने इसके लिए कई अहम कदम उठाए हैं।
- FCNR (B) जमा योजना के तहत बैंकों को विदेशी मुद्रा में 3 से 5 साल की एनआरआई जमा (NRI Deposits) जुटाने के लिए हेजिंग लागत में राहत दी गई। इससे बैंक बेहतर ब्याज दरें दे पा रहे हैं और एनआरआई निवेश बढ़ा है।
- External Commercial Borrowings (ECB) के लिए रियायती विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा दी गई, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और बैंकों के लिए विदेशी कर्ज लेना सस्ता हुआ।
- सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेश को आसान बनाया गया। Fully Accessible Route (FAR) का दायरा बढ़ाया गया और कई निवेश संबंधी पाबंदियां भी हटाई गईं। सरकार ने टैक्स में भी राहत दी।
अब तक क्या नतीजे मिले?
RBI की नई रणनीति से विदेशी मुद्रा का अच्छा फ्लो देखने को मिला है। 31 जुलाई 2026 तक विशेष योजनाओं के जरिए करीब 40.81 अरब डॉलर भारत आए। इसमें शामिल हैं-
| स्रोत | राशि |
| FCNR(B) जमा | 36.72 अरब डॉलर |
| ECB स्वैप सुविधा | 1.50 अरब डॉलर |
| विदेशी मुद्रा उधारी | 2.57 अरब डॉलर |
| कुल | 40.81 अरब डॉलर |
इसके अलावा जून के बाद सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों ने 7 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही तो सितंबर तक कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह 80 से 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
फिर भी रुपया क्यों नहीं मजबूत हुआ?
इतने बड़े डॉलर प्रवाह (Dollar inflow) के बावजूद रुपया अब भी करीब 95.25 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अभी भी दबाव बना रही हैं। वैश्विक स्तर पर डॉलर मजबूत बना हुआ है।
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भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता जारी है। FCNR और स्वैप जैसी कई रकम सीधे स्पॉट मार्केट में नहीं आती, इसलिए उनका असर रुपये पर तुरंत नहीं दिखता। RBI का भी कहना है कि उसका उद्देश्य किसी तय स्तर पर रुपया रखना नहीं, बल्कि मुद्रा में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकना है।
क्या RBI की नई रणनीति सफल रही?
अब तक के आंकड़े बताते हैं कि विदेशी मुद्रा जुटाने के मामले में RBI की रणनीति सफल रही है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर तत्काल दबाव कम हुआ है और भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। हालांकि, रुपये की कीमत में अभी तक बड़ी तेजी नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि रुपये की दिशा केवल RBI की नीति से तय नहीं होती, बल्कि तेल की कीमत, वैश्विक डॉलर की मजबूती, चालू खाते का घाटा और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक माहौल जैसे कई बड़े कारक भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।