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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 07, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रेपो रेट कट का धड़ल्ले से जनता को मिलेगा फायदा, खास इंतजाम करने में जुटा RBI

Published: Fri, 07 Mar 2025 01:48 PM (IST)

आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में 1.90 लाख करोड़ रुपये डालकर लिक्विडिटी सुधारने में जुटा है। विदेशी निवेशकों की निकासी रुपये की ...और पढ़ें

बैंकिंग सिस्टम में कितनी फंड की कमी है इस बारे में कोई साफ-साफ डेटा नहीं होता।
बैंकिंग सिस्टम में कितनी फंड की कमी है इस बारे में कोई साफ-साफ डेटा नहीं होता।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। देश के शेयर बाजार से निवेश समेटते विदेशी संस्थागत निवेशक, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर होती स्थिति और वित्त वर्ष के अंतिम महीने में सरकारी खर्चे में वृद्धि, इन तीन आर्थिक हालातों ने देश में लिक्विडिटी (तरलता) की स्थिति को लेकर कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त फंड डाल कर लिक्विडिटी की स्थिति को बेहतर करने को लेकर आरबीआई की सक्रियता और बढ़ गई है। आरबीआई के आगे भी सक्रिय रहने की संभावना है।

आरबीआई ने बुधवार को अगले दो हफ्तों के भीतर बैंकिंग सिस्टम में 1.90 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त फंड देने की व्यवस्था की है। वैसे आरबीआइ के अधिकारी लिक्विडिटी की मौजूदा स्थिति को बहुत चिंताजनक नहीं मान रहे, लेकिन इस बारे में सतर्क निगरानी भी की जा रही है। अर्थविदों का मानना है कि आरबीआई ने हाल के हफ्तों में तरलता बढ़ाने की जो कोशिश की है उसका असर बैंकों की कर्ज वितरण की गति पर भी पड़ेगा और पिछले महीने में हुई रेपो रेट कटौती का फायदा आम ग्राहकों को मिलने का रास्ता भी साफ होगा।

वैसे बैंकिंग सिस्टम में कितनी फंड की कमी है इस बारे में कोई साफ-साफ डेटा नहीं होता लेकिन आरबीआई ने बुधवार को 24 मार्च, 2025 तक तीन चरणों में कुल 1.90 लाख करोड़ रुपये की राशि सिस्टम में डालने के लिए कदम उठाए हैं। इस आधार पर जानकार मान रहे हैं कि केंद्रीय बैंक के स्तर पर इतनी ही राशि की कमी का अनुमान लगाया गया है। बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रमुख अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का कहना है कि, “आरबीआई का यह कदम मार्च, 2025 के अंत तक की फंड की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त हो सकती है। वैसे कुछ कमी होती है तो केंद्रीय बैंक दूसरे अल्पकालिक विकल्पों को आजमा सकता है।''

बैंकों के पास बढ़ जाएगा फंड

कुछ अर्थविदों का कहना है कि अगले महीने से बहुत संभव है कि बैंकों के पास आवश्यकता से ज्यादा फंड की उपलब्धता हो। ज्यादा फंड होने से बैंकों के लिए फरवरी, 2025 में आरबीआई की तरफ से रेपो रेट में 25 आधार अंकों की कटौती का फायदा आम ग्राहकों को देना आसान होगा। मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए आरबीआई ने रेपो रेट को घटा कर 6.25 फीसद किया है। हाल ही में क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में उम्मीद जताई है कि अप्रैल, 2025 में होने वाली समीक्षा में भी आरबीआई 25 आधार अंकों की कटौती कर सकता है। लेकिन इसका फायदा आम जनता को तभी होगा जब बैंकों के पास पर्याप्त फंड हो।

सनद रहे कि भारतीय बैंकों के पास फंड की कमी का मुद्दा पिछले महीने केंद्रीय बैंक की निदेशक बोर्ड की बैठक के दौराान उठा था। तब आरबीआइ गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि केंद्रीय बैंक सुनिश्चित करेगा कि सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी रहे। असलियत में जब बैंकों के पास फंड की कमी होती है तो वह कर्ज देने से हाथ खींचने लगते हैं। खास तौर पर उद्योग जगत को बड़े कर्ज मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

इससे उद्योगों या कल-करखानों के विस्तार पर असर पड़ता है। साथ ही मांग और आपूर्ति में संतुलन नहीं होने से कर्ज भी महंगा होने का खतरा रहता है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय बैंकिंग सिस्टम में तरलता की कमी पिछले दो-तीन महीनों से है। जनवरी, 2025 के शुरुआती दिनों में रोजाना के आधार पर एक लाख करोड़ रुपये की कमी थी जो बाद में बढ़ कर तीन लाख करोड़ रुपये तक हो गई थी।

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