यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 01, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
RBI की नई मौद्रिक नीति में 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रह सकती है रेपो रेट: एक्सपर्ट्स
RBI MPC रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 4 अक्टूबर से लेकर 6 अक्टूबर तक होनी है। ...और पढ़ें

HighLights
- रेपो रेट यथावत रह सकता है।
- सितंबर और अक्टूबर में महंगाई दर में गिरावट आ सकती है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आरबीआई की अगले हफ्ते आने वाली नई मौद्रिक नीति में रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर यथावत बना रह सकता है। इसके पीछे की वजह महंगाई का ऊपरी स्तर और वैश्विक अस्थिरता का होना है। ऐसा जानकारों का कहना है।
4 अक्टूबर को शुरू होगी MPC की बैठक
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में छह सदस्यी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 4 अक्टूबर से लेकर 6 अक्टूबर तक होनी है। इसके फैसले का एलान आरबीआई गवर्नर की ओर से 6 अक्टूबर को किया जाएगा।
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ब्याज दरों में नहीं बदलाव
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि क्रेडिट पॉलिसी इस बार भी मौजूदा रेट स्ट्रक्चर पर रहेगी। इस कारण रेपो रेट भी 6.5 प्रतिशत पर बरकार रहेगा। आगे कहा कि खुदरा महंगाई दर 6.8 प्रतिशत के ऊपरी स्तर पर बनी हुई है। इसके सितंबर और अक्टूबर में नीचे आने की संभावना है।
आईसीआरए लिमिटेड के फाइनेंसियल सेक्टर रेटिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और ग्रुप हेड, कार्तिक श्रीनिवासन का कहना है कि एमपीसी बैठक में ब्याज दरें समान बनी रह सकती हैं। आगे उन्होंने कहा कि विकसित देशों में लगातार बढ़ रही ब्याज दरों के कारण आरबीआई सतर्क रह सकता है। इसका सीधा प्रभाव कैपिटल फ्लो, फॉरेक्स रिजर्व और एक्सचेंज रेट पर बढ़ सकता है।
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यूनियन एसेट मैनेजमेंट कंपनी के हेड-फिक्स्ड इनकम पारिजात अग्रवाल ने कहा कि महंगाई दर अगस्त की तुलना में सितंबर में कम होने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी आरबीआई के कम्फर्ट जोन से ऊपर बनी हुई है।
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2022 में बढ़ी ब्याज दर
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत बढ़ने और वैश्विक स्तर पर खाद्यान की कमी के कारण महंगाई उच्चस्तर पर पहुंच गई थी। इसको काबू में करने के लिए आरबीआई को ब्याज दरों में बढ़ाना पड़ा है। आरबीआई ने मई 2022 में 0.40 प्रतिशत, जून 2022 में 0.50 प्रतिशत, अगस्त 2022 में 0.50 प्रतिशत, सितंबर 2022 में 0.50 प्रतिशत, दिसंबर 2022 में 0.35 प्रतिशत और फरवरी 2023 में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह से रेपो रेट 4 प्रतिशत से बढ़कर 6.50 प्रतिशत पर पहुंच गया है।
