अंबानी-अदाणी की दौलत कुछ नहीं, 1947 में भारत के इस मुस्लिम अरबपति की बोलती थी तूती; पाकिस्तान में था इनका नाम
1947 में भारत की आजादी के समय हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान देश के सबसे अमीर व्यक्ति थे, जिनकी संपत्ति आज के अंबानी-अदाणी से भी अधिक थी।
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1947 में भारत के सबसे अमीर निजाम मीर उस्मान अली खान थे।
HighLights
1947 में भारत के सबसे अमीर निजाम मीर उस्मान अली खान थे।
उनकी संपत्ति आज के अंबानी-अदाणी की दौलत से कहीं अधिक थी।
पाकिस्तान के सबसे धनी नवाब सर सादिक मोहम्मद खान V और सर आदमजी थे।
नई दिल्ली। 1947 में भारत आजाद हुआ था। भारत के आजाद होने के साथ एक नया मुल्क भी बना था। नाम था पाकिस्तान। 1947 से अब तक दोनों देशों ने बहुत कुछ देखा और बहुत कुछ हासिल किया। 79 साल बाद आज दोनों देशों की तस्वीर बदल चुकी है। भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। वह पाकिस्तान से बहुत आगे है। लेकिन एक दौर था जब दोनों ने 1947 से नई शुरुआत की थी।
आजादी से पहले पाकिस्तान और भारत के अरबपति एक ही देश यानी भारत के नाम से जाने जाते थे। जब भी अरबपतियों की बात होती थी तो भारत के अरबपति कहा जाता था। लेकिन आजादी के बाद कहानी पूरी तरह बदल गई। बंटवारे में अरबपति भी बट गए। कोई हिंदुस्तान का हो गया तो कोई पाकिस्तान चला गया।
आजादी के बाद कुछ अरबपतियों की पहचान पाकिस्तान के नाम से होने लगी तो कुछ हिंदुस्तान के नाम से पहचानें जा रहे थे। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर 1947 में भारत का सबसे अमीर और पाकिस्तान का सबसे अमीर व्यक्ति कौन था? इनकी दौलत के आगे आज भारत के अरबपति मुकेश अंबानी औकर गौतम अदाणी की दौलत भी फीकी लगेगी।
1947 में कौन था भारत और पाकिस्तान का सबसे अमीर व्यक्ति?
1947 में जब भारत आजाद हुआ तो सभी रियासतें को यह आजादी दी गई कि या तो वह भारत में शामिल हो जाएं, या पाकिस्तान में या फिर या पूरी तरह स्वतंत्र (अलग) रहें। आजादी के बाद कई सारी देसी रियासतें भारत में शामिल हो गईं, लेकिन हैदराबाद ने इंकार कर दिया। इसके बाद 1948 में, भारतीय सेना ने हैदराबाद राज्य पर हमला करके उसे अपने अधिकार में ले लिया। हालांकि, जब भी उस समय के सबसे अमीर व्यक्ति की बात होती है तो हैदराबाद के आखिरी निजाम का नाम आता है। और वह थे मीर उस्मान अली। वह उस समय समय भारत का सबसे अमीर व्यक्ति थी। आजादी से पहले और आजादी के बाद भी।
वहीं, अगर पाकिस्तान की बात करें तो इसमें कई नाम आते हैं। 1947 में आजादी के बाद कई अरबपतियों ने पाकिस्तान का रुख किया। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग अरबपतियों को सबसे अमीर व्यक्ति बताया गया है। 1947 में फोर्ब्स लिस्ट जैसी कोई औपचारिक संपत्ति रैंकिंग नहीं थी, लेकिन उस समय के ऐतिहासिक रिकॉर्ड और जानकारी से पता चलता है कि बहावलपुर रियासत के शासक नवाब सर सादिक मोहम्मद खान V, पाकिस्तान की आजादी के समय वहां के सबसे अमीर व्यक्ति थे।
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शाही परिवारों के अलावा, सबसे अमीर निजी नागरिकों में कुछ प्रमुख मुस्लिम उद्योगपति और बैंकर शामिल थे, जो नए देश में आकर बस गए थे या पहले से ही वहां स्थापित थे। इनमें मशहूर उद्योगपति और समाजसेवी सर आदमजी हाजी दाऊद (आदमजी ग्रुप के संस्थापक) का भी नाम आता है। उन्हें 1947 के आजाद पाकिस्तान का सबसे अमीर और आर्थिक रूप से सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक माना जाता था।
मीर उस्मान के पास थी इतनी दौलत की आज खरीद लेते अंबानी-अदाणी की कंपनी
हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान (Mir Osman Ali Khan Net Worth) के पास इतनी दौलत थी कि वह आज के समय अंबानी अदाणी की कंपनियों को खरीद लेते। उनकी गिनती अब तक के दुनिया के अमीरों में से एक में होती है। एक अनुमान के अनुसार 1937 में जब टाइम मैगजीन (World Richest Person) ने उन्हें अपने कवर पेज पर जगह दी थी, तब उनकी नेट वर्थ अमेरिका के जीडीपी के 2 फीसदी के बराबर थी।
1947 में, मीर उस्मान अली खान की अनुमानित कुल संपत्ति लगभग 2 अरब डॉलर थी। आज के हिसाब से उनकी महंगाई-समायोजित संपत्ति 210 अरब डॉलर से 236 अरब डॉलर के बीच आंकी जाती है। यह मुकेश अंबानी की रिलायंस के मार्केट कैप 188.6 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा है। वहीं, अदाणी ग्रुप की पैरेंट कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज का मार्केट कैप लगभग 5.9 बिलियन डॉलर है।
वहीं, अगर मुकेश अंबानी की नेट वर्थ की बात करें तो उनकी नेटवर्थ 90.4 बिलियन डॉलर (Mukesh Ambani Net Worth) है। और गौतम अदाणी की नेट वर्थ 82.5 बिलियन डॉलर (Gautam Adani Net Worth) है।
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