17 की उम्र में छोड़ी पढ़ाई, 25 में बन गया अरबपति! AI चिप स्टार्टअप ने बदल दी इस शख्स की किस्मत
इस शख्स ने 17 साल की उम्र में स्कूल छोड़कर टेक्नोलॉजी की दुनिया में कदम रखा और 25 साल की उम्र में यूरोप के सबसे कम उम्र के self-made अरबपतियों में शामिल हो गए।
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कौन है 25 साल का अरबपति
HighLights
17 की उम्र में स्कूल छोड़ बने अरबपति।
उनकी AI चिप कंपनी Olix की वैल्यूएशन $3.3 बिलियन।
Olix में 38.6% हिस्सेदारी, $1.27 अरब मूल्य।
नई दिल्ली: आमतौर पर 17 साल की उम्र में बच्चे अपने स्कूल और करियर को लेकर सोच रहे होते हैं। लेकिन ब्रिटने के इस शख्स ने इसी उम्र में एक ऐसा फैसला लिया जिसने कुछ ही सालों में उन्हें यूरोप के सबसे कम उम्र के self-made billionaires में शामिल कर दिया।
हम बात कर रहे हैं ब्रिटेन के जेम्स डैकोम्बे (james Dacombe) की। उन्होंने हाईस्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़कर टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखा। आज 25 साल की उम्र में उनकी निजी संपत्ति 1 अरब डॉलर यानी करीब ₹8,000 करोड़ से ज्यादा आंकी जा रही है। जेम्स डैकोम्बे का सफर सिर्फ स्कूल छोड़ने और अरबपति बनने का नहीं है। इसके पीछे AI, सेमीकंडक्टर, लगातार प्रयोग करने और सही समय पर सही टेक्नोलॉजी पर दांव लगाने की कहानी है।
17 की उम्र में लिया बड़ा फैसला
जेम्स डैकोम्बे का जन्म और पालन-पोषण ब्रिटेन के Harrogate में हुआ। उन्हें कम उम्र से ही कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग में दिलचस्पी थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने करीब 13 साल की उम्र में ही कोडिंग शुरू कर दी थी और उस समय तक ऐप्स और वेबसाइट्स बनाने लगे थे। इसके बाद उन्होंने पारंपरिक पढ़ाई जारी रखने के बजाय टेक्नोलॉजी को अपना करियर बनाने का फैसला किया। वह 17 साल की उम्र में स्कूल से बाहर हो गए और स्टार्टअप की दुनिया में उतर गए। यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन डैकोम्बे का फोकस साफ था ऐसी टेक्नोलॉजी बनाना जिससे वास्तविक दुनिया की बड़ी समस्याओं को हल किया जा सके।
पहली कंपनी बनाई, दिमाग की तकनीक पर किया काम
स्कूल छोड़ने के बाद जेम्स ने CoMind नाम की कंपनी शुरू की। यह कंपनी दिमाग की गतिविधियों को मॉनिटर करने वाली तकनीक पर काम करती है। CoMind का उद्देश्य ऐसी non-invasive brain-monitoring technology (बिना चीर-फाड़ वाली मस्तिष्क-निगरानी तकनीक) विकसित करना है, जिससे न्यूरोलॉजिकल स्थितियां (neurological conditions) को समझने और उनके निदान (diagnosis) तथा उपाय (treatment) में मदद मिल सके। कंपनी ने कई फंडिंग राउंड के जरिए करोड़ों पाउंड जुटाए।
डैकोम्बे की इस कंपनी का आइडिया भी उनके लिए व्यक्तिगत रूप से महत्वपूर्ण था। रिपोर्ट्स के अनुसार, परिवार के सदस्यों को दिमाग और भूलने की बीमारी जैसी समस्याओं से जूझते देखने के बाद उनकी दिलचस्पी brain-monitoring technology में और बढ़ी।
फिर उतरे AI की दुनिया में
उन्होंने Olix नाम की AI chip startup शुरू की। कंपनी का फोकस खास तरह के AI inference chips विकसित करने पर है। सरल भाषा में समझें तो AI मॉडल को सिर्फ ट्रेन करना ही जरूरी नहीं है। जब कोई AI मॉडल वास्तविक दुनिया में काम करता है और यूजर के सवालों का जवाब देता है, तस्वीर बनाता है या कोई दूसरा टास्क करता है, तो उसे लगातार कैलकुलेशन्स करनी पड़ती हैं। इसे inference कहा जाता है। यहीं Olix का बिजनेस मॉडल आता है। कंपनी ऐसी chips विकसित कर रही है जो AI inference को ज्यादा कुशल और कम लागत वाला बनाने में मदद कर सकें।
Olix की वैल्युएशन पहुंची $3.3 अरब
जेम्स की सबसे बड़ी कामयाबी उनकी AI chip कंपनी Olix से जुड़ी है। रिपोर्ट कहते हैं कि हाल ही में कंपनी ने करीब $312 million की फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग राउंड में Arm Holdings, Netflix के co-founder Reed Hastings और दूसरे बड़े निवेशकों के साथ UK Government के Sovereign AI Fund का भी समर्थन शामिल रहा। इसके बाद Olix की valuation बढ़कर करीब $3.3 billion यानी लगभग ₹28,000 करोड़ के आसपास पहुंच गई।
यानी जिस कंपनी को डेकौम्बे ने कुछ साल पहले शुरू किया था, उसकी वैल्यू अब हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
38.6% हिस्सेदारी ने बनाया अरबपति
रिपोर्ट के मुताबिक James Dacombe की holding company Bletchley Industries के जरिए Olix में करीब 38.6% हिस्सेदारी है। अगर कंपनी की वैल्युएशन करीब $3.3 बिलियन मानी जाए, तो सिर्फ कंपनी में उनकी हिस्सेदारी की अनुमानित वैल्यू ही करीब $1.27 अरब बैठती है।
Olix अब सिर्फ एक छोटी startup नहीं रह गई है। कंपनी का ऑपरेशन ब्रिटेन और North America तक फैला हुआ है और इसमें 140 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं।
