'पिंग शुन' जहाज पर सस्पेंस खत्म, अफवाह के बीच भारत सरकार ने बताई सच्चाई; ईरान से लेकर आ रहा है 6 लाख बैरल तेल
केंद्र सरकार ने ईरान से कच्चे तेल के आयात में भुगतान संबंधी समस्याओं की खबरों को खारिज किया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिफाइनरियां ईरान सहि ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां उस देश के साथ ही दुनिया भर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।
दावा तथ्यात्मक रूप से गलत
मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था।
मंत्रालय ने कहा, ''ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।''
मंत्रालय ने स्पष्ट किया, ''भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है।'' मंत्रालय के अनुसार, ''पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाओं के बीच, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है, और अफवाहों के विपरीत ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।''
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ईरानी एलपीजी लाने वाला एक जहाज भी पहुंचा
जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म 'केपलर' ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर 'पिंग शुन' अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि लगभग 44,000 टन ईरानी एलपीजी लाने वाला एक जहाज सी बर्ड दो अप्रैल को मंगलौर पहुंचा और इस समय माल उतार रहा है।