टाटा ग्रुप में अंदरूनी कलह की सरकार को थी खबर, हुई थीं अलग-अलग बैठकें; किसने अधिकारियों को बताई अंदर की बात?
एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे से पहले टाटा ग्रुप के आंतरिक विवाद की जानकारी भारत सरकार को दी गई थी। चंद्रशेखरन ...और पढ़ें

हाल ही में एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन पद से दिया था इस्तीफा
HighLights
टाटा ग्रुप विवाद की जानकारी सरकार को दी गई थी।
चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने सरकारी अधिकारियों से बात की।
नोएल टाटा ने आरबीआई से टाटा संस आईपीओ पर भी चर्चा की।
नई दिल्ली। एन चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) के इस्तीफे से पहले टाटा ग्रुप (Tata Group Rift) के अंदर क्या कुछ चल रहा था, इस पूरे आंतरिक विवाद की जानकारी भारत सरकार को दी गई थी। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन पद से एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा से पहले, टाटा ग्रुप में चल रहे आंतरिक विवादों की जानकारी भारत सरकार के शीर्ष अधिकारियों को दी गई थी।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा से पहले, चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata), दोनों ने अलग-अलग जाकर सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को ग्रुप के अंदर चल रही उथल-पुथल की जानकारी दी।
सरकार ने क्या कहा?
- इस रिपोर्ट में बताया गया कि सरकार ने दोनों पक्षों की बात सुनी, हालांकि सरकार ने किसी भी गुट का पक्ष नहीं लिया और खुद को तटस्थ (Neutral) रखा।
- दरअसल, एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा, दोनों के बीच समूह से जुड़ी रणनीति, गवर्नेंस और न्यू बिजनेस के लिए डायरेक्शन व विजन को लेकर मतभेद थे। एन चंद्रशेखरन और नोएल टाटा ने इन मुद्दों को लेकर समय-समय पर सरकार से बात की और मामले की जानकारी दी।
- रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग बैठकों में एयर इंडिया, टाटा के डिजिटल बिज़नेस और सेमीकंडक्टर वेंचर में कुछ नियुक्तियों और नुकसान को लेकर भी चिंताएं जताई गईं।
- इसके अलावा, एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर बनी हुई अनिश्चितता पर भी चर्चा हुई थी।
- पिछले वीकेंड पर नोएल टाटा दिल्ली में थे। हालांकि, सूत्रों ने इस बात से इनकार किया कि इस दौरान सरकारी अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई थी।
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RBI अफसरों से भी मिले नोएल टाटा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नोएल टाटा ने जून 2026 में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। यह मुलाकात टाटा संस के संभावित आईपीओ (IPO) को लेकर थी। नोएल टाटा को चिंता थी कि आईपीओ आने से कंपनी पर टाटा ट्रस्ट्स का नियंत्रण कम (Dilute) हो जाएगा।
