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इस्तीफे के बाद छलका एन. चंद्रशेखरन का दर्द: जानिए 24 फरवरी की उस बैठक में ऐसा क्या हुआ कि टालना पड़ा फैसला

Published: Fri, 14 Aug 2026 07:00 AM (IST)

एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा ट्रस्ट्स ने उनके निर्णय का सम्मान किया। चंद्रशेखरन ने बताया कि 24 फरवरी ...और पढ़ें

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने बयान जारी कर चंद्रशेखरन के निर्णय का सम्मान किया।

सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने बयान जारी कर चंद्रशेखरन के निर्णय का सम्मान किया।

HighLights

  1. टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के इस्तीफे का सम्मान किया।

  2. एक सदस्य की असहमति से कार्यकाल विस्तार टला।

  3. नए उत्तराधिकारी के लिए चयन समिति बनेगी जल्द।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बाद टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। 
 
सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) ने बयान जारी कर चंद्रशेखरन के निर्णय का सम्मान किया और सुचारू नेतृत्व हस्तांतरण का पूर्ण आश्वासन दिया। 
 
दूसरी ओर, चंद्रशेखरन ने स्पष्ट किया है कि 24 फरवरी की बोर्ड बैठक में एक सदस्य की असहमति के कारण ही उन्होंने अपने कार्यकाल विस्तार का निर्णय टाल दिया था।
 

एसडीटीटी ने सराहा चंद्रशेखरन का नेतृत्व

एसडीटीटी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि टाटा समूह के बदलाव और अभूतपूर्व विकास के इस दौर में चंद्रशेखरन का योगदान अतुलनीय रहा है। 
 
ट्रस्ट ने नियमों का पालन करते हुए नए उत्तराधिकारी के चुनाव के लिए जल्द से जल्द चयन समिति बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है, जिससे समूह के नए बॉस की खोज प्रक्रिया शुरू हो गई है।
 

क्यों टला था कार्यकाल विस्तार?

चंद्रशेखरन ने नॉमिनी निदेशकों को भेजे ईमेल में बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) दोनों ने ही उनके 5 साल के कार्यकाल विस्तार का सर्वसम्मति से समर्थन किया था। बोर्ड की समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी।

हालांकि, 24 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक में एक सदस्य के विरोध के कारण सर्वसम्मति नहीं बन सकी। चंद्रशेखरन ने कहा क‍ि सर्वसम्मति न होने के कारण मैंने निर्णय को टालना ही उचित समझा। 
 
उन्‍होंने कहा क‍ि टाटा संस एक विशाल संस्थान है और वर्तमान में कई रणनीतिक प्रोजेक्ट्स बेहद अहम चरण में हैं। ऐसे में कर्मचारियों, निवेशकों और सहयोगियों के लिए नेतृत्व पर स्पष्टता बेहद ज़रूरीथी।   

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चंद्रशेखरन का बयान दर्शाता है कि उन्होंने व्यक्तिगत विवाद के बजाय संस्थान और समूह के व्यापक हित को प्राथमिकता दी है।

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प्रभात शर्मा, पूर्व अधिकारी, टाटा स्टील

13.3 लाख करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व वाले विशाल समूह के लिए अनिश्चितता ठीक नहीं थी। 18 अगस्त को होने वाली एजीएम (AGM) से पहले चयन समिति का गठन एक परिपक्व कदम है।

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विकास रंजन, कॉरपोरेट विशेषज्ञ