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    TATA संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन ने क्यों दिया इस्तीफा? कर्मचारियों को दिया खास मैसेज

    Updated: Wed, 12 Aug 2026 09:33 PM (IST)

    टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने नोएल टाटा के साथ पुनर्नियुक्ति को लेकर जारी तनाव के चलते 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने पर पद छोड़ने की घोषण ...और पढ़ें

    TATA संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा।

    TATA संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन का इस्तीफा।

    HighLights

    1. चंद्रशेखरन ने नोएल टाटा से तनाव के कारण पद छोड़ा।

    2. पुनर्नियुक्ति विवाद और समूह में मतभेद प्रमुख कारण।

    3. इस्तीफे की खबर से टाटा समूह के शेयर गिरे।

    जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पहले से ही कई तरह के विवादों में फंसे टाटा संस के प्रवर्तकों को अब नए चेयरमैन की नियुक्ति का काम करना होगा। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ अपनी पुनर्नियुक्ति के लेकर जारी तनाव के चलते टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बुधवार को अपना पद छोड़ने की घोषणा कर दी।

    उन्होंने कहा कि वह 20 फरवरी, 2027 को अपना वर्तमान कार्यकाल खत्म होने के बाद पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव नहीं करेंगे। टाटा समूह में 40 वर्ष बिताने वाले चंद्रशेखरन ने बोर्ड को सूचित किया है कि वह पद से हट जाएंगे और जल्द ही उनका उत्तराधिकारी तय कर लिया जाए।

    अफवाहें और साजिशों पर ध्यान न दें- चंद्रशेखरन

    अपने पद से हटने के फैसले को लेकर हो रही चर्चा का जिक्र करते हुए चंद्रशेखरन ने कर्मचारियों से आग्रह किया कि आप जो भी बातें, अफवाहें और साजिशों के बारे में सुन रहे हैं, उन पर ज्यादा ध्यान न दें।

    वर्ष 2017 में चंद्रशेखर टाटा समूह के 149 वर्ष पुराने इतिहास में पहले गैर-पारसी और टाटा परिवार से बाहर के चेयरमैन बनाए गए थे और लगातार दो कार्यकाल तक चेयरमैन रहे। हालांकि, हाल के दो वर्षों में टाटा समूह के प्रमुख प्रवर्तकों के बीच चंद्रशेखरन को लेकर कई तरह के विवाद सामने आए हैं।

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    टाटा संस, टाटा समूह की मुख्य निवेशक होल्डिंग कंपनी और प्रमोटर है। यह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और एअर इंडिया समेत 30 से अधिक कंपनियों को नियंत्रित करती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिससे समूह के कामकाज पर इस संस्था का अहम असर रहता है।

    चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार को लेकर सितंबर, 2025 से समूह के भीतर विवाद चल रहा है। तब समूह के दो प्रमुख प्रवर्तक संगठनों सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की तरफ से चंद्रशेखरन के कार्यकाल को एकमुश्त पांच वर्ष के विस्तार की सर्वसम्मति से सिफारिश की गई थी। इन दोनों ट्रस्ट्स के पास मिलाकर टाटा संस की 51.54 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

    टाटा संस की नामिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी और बोर्ड ने भी इसे मंजूरी दी थी। लेकिन 24 फरवरी, 2026 की बोर्ड बैठक में एक सदस्य के विरोध के कारण प्रस्ताव पास नहीं हो सका। माना जाता है कि विरोध करने वाले सदस्य नोएल टाटा (टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन और टाटा संस के बोर्ड के सदस्य) थे।

    बोर्ड के अन्य सदस्यों ने चंद्रशेखरन का समर्थन किया था। लेकिन समूह की शर्तों के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति सर्वसम्मति से ही हो सकती है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच इन्हीं मतभेदों के कारण चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने की घोषणा की है। विवाद सुलझाने के लिए पिछले छह महीने में कई बार कोशिशें हुईं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

    नोएल टाटा (टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन) की तरफ से विमानन कंपनी एअर इंडिया के भारी-भरकम नुकसान, नए कारोबारों का अपेक्षाकृत प्रदर्शन नहीं होने, भविष्य की रणनीति और बोर्ड प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए गए थे। टाटा संस की लिस्टिंग के मुद्दे पर भी काफी गहरा विवाद है।

    कुछ ट्रस्टी लिस्टिंग के पक्ष में हैं, तो नोएल टाटा इसे प्राइवेट रखने के पक्षधर माने जाते हैं। आरबीआइ के नियमों के कारण भी यह मुद्दा गरमाया हुआ है। उल्लेखनीय है कि रतन टाटा के निधन के बाद 2024 में नोएल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने थे।

    विवाद की एक प्रमुख जड़ समूह में हिस्सेदारी रखने वाले प्रमुख पारसी परिवारों की नई पीढ़ी के बीच सामंजस्य की कमी भी साफ दिख रही है। टाटा परिवार और शपूरजी पल्लोनजी (मिस्त्री) परिवार, दोनों पारसी समुदाय से हैं और लंबे समय से उनके रिश्ते जुड़े हुए हैं।

    शपूरजी पल्लोनजी ग्रुप, टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है और लिस्टिंग से अपनी हिस्सेदारी बेचने की इच्छा रखता है। नोएल चाहते हैं कि टाटा संस की लिस्टिंग किए बिना शापूरजी पलोनजी ग्रुप को बाहर निकलने का रास्ता देने का तरीका निकाला जाए। ट्रस्ट्स के अंदर भी नोएल टाटा और अन्य ट्रस्टियों (जैसे विजय सिंह व वेणु श्रीनिवासन) के बीच नियुक्तियों और गवर्नेंस को लेकर मतभेद चले आ रहे हैं।

    रतन टाटा की वसीयत और पुराने शेयर ट्रांसफर को लेकर भी जांच चल रही है, जिससे विवाद और गहराया है। चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन हैं। इससे पहले वह टीसीएस के सीईओ रह चुके हैं। समूह अब नए नेतृत्व की तलाश में है, ताकि रणनीतिक परियोजनाएं प्रभावित न हों। लेकिन यह काम आसान नहीं रहने वाला।

    टाटा ग्रुप के शेयरों में गिरावट

    चंद्रशेखरन के इस्तीफे की घोषणा के बाद टाटा ग्रुप के शेयरों में बुधवार को गिरावट आई। बीएसई पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के शेयर 3.71 प्रतिशत, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 2.44 प्रतिशत, टाटा एलेक्सी 2.23 प्रतिशत, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 1.92 प्रतिशत और टाटा स्टील 1.57 प्रतिशत गिरे।

    रैलिस इंडिया का शेयर 0.95 प्रतिशत, ट्रेंट 0.86 प्रतिशत, टाटा पावर 0.53 प्रतिशत, इंडियन होटल्स कंपनी 0.52 प्रतिशत, टाटा कम्युनिकेशंस 0.37 प्रतिशत और टाइटन 0.18 प्रतिशत नीचे आया। इन कंपनियों के कुल बाजार मूल्यांकन में 45,615.67 करोड़ रुपये की कमी आई, जिसमें अकेले टीसीएस को 32,743.69 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।