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Tata नमक के जनक से केमिकल किंग तक, कौन थे दरबारी सेठ? टाटा समूह में जूनियर इंजीनियर से बने 14 कंपनी के चेयरमैन

Updated: Wed, 19 Aug 2026 05:13 PM (IST)

दरबारी सेठ, जिन्हें 'देश का नमक' के जन्मदाता के रूप में जाना जाता है, टाटा समूह के एक दूरदर्शी नेता थे। उन्होंने टाटा नमक और टाटा टी जैसे ब्रांडों की नींव रखी, साथ ही केमिकल बिजनेस में बड़ा मुकाम हासिल किया।

दरबारी सेठ ने 52 सालों तक टाटा समूह में काम किया था।

दरबारी सेठ ने 52 सालों तक टाटा समूह में काम किया था।

HighLights

  1. 'देश का नमक' टाटा नमक के जन्मदाता दरबारी सेठ थे।

  2. उन्होंने टाटा केमिकल्स और टाटा टी की नींव रखी।

  3. टाटा समूह के एफएमसीजी कारोबार को वैश्विक पहचान दिलाई।

नई दिल्ली। भारत में नेता, फिल्म स्टार और उद्योगपतियों से लेकर ऐसी कई मशहूर शख्सियत हुई हैं जिन्हें अपने नाम के अलावा उपाधियों व उपनामों से जाना जाता है। लौह पुरुष, शो-मैन से लेकर कॉरपोरेट समुराई जैसी कई नामों के बारे में आपने सुना होगा लेकिन क्या आप 'देश का नमक' के जन्मदाता के बारे में जानते हैं, जिन्हें केमिकल और चाय का किंग भी कहा जाता है।

देश के घर-घर में 'टाटा नमक' खाया जाता है, वह दरबारी सेठ (Darbari Seth) की देन है इसलिए उन्हें 'देश का नमक' के जन्मदाता के तौर पर जाना जाता है। 'देश का नमक', टाटा नमक के एड की एक पंचलाइन थी। दरबारी सेठ ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने भारत में पहली बार आयोडाइज्ड और वैक्यूम-इवेपोरेटेड नमक ब्रांड लॉन्च किया था। आइये आपको बताते हैं टाटा समूह से जुड़े इस मशहूर शख्सियत की कहानी

टाटा समूह के दरबारी सेठ

भारत के कॉरपोरेट वर्ल्ड में दरबारी सेठ, बेहद खास नाम है, जो टाटा समूह के विजनरी और पावरफुल लीडर थे। दरबारी सेठ की हैसियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जे.आर.डी. टाटा के दौर में वे टाटा केमिकल्स और टाटा टी कंपनी को एक स्वतंत्र साम्राज्य की तरह चलाते थे इसलिए उन्हें टाटा ग्रुप का 'सत्रप' यानी गवर्नर कहा जाता था।

जूनियर इंजीनियर से जनक तक

1943 में टाटा केमिकल्स में जूनियर इंजीनियर के तौर पर दरबारी सेठ ने अपने करियर की शुरुआत की। एक दशक बाद वे सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी से केमिकल इंजीनियरिंग में MS की डिग्री लेने के लिए अमेरिका गए। अमेरिका में डॉव केमिकल्स के लिए काम करने के बाद, वे टाटा केमिकल्स में अपना काम फिर से शुरू करने के लिए भारत लौट आए।

इसके बाद दरबारी सेठ ने केमिकल बिजनेस ने गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने बंजर जमीन पर टाटा केमिकल्स का विशाल प्लांट खड़ा किया। यह संयंत्र गुजरात के मीठापुर में बंजर जमीन पर तैयार किया गया। इसके निर्माण से लेकर कंपनी को मुनाफे में लाने का पूरा क्रेडिट दरबारी सेठ की जिद और इंजीनियरिंग विजन को जाता है।

टाटा नमक से Tata Tea तक

टाटा नमक के जनक के अलावा दरबारी सेठ को टाटा टी के लिए भी जाना जाता है। 80 के दशक में जब जेम्स फिनले कंपनी भारत से लौटने लगी तब दरबारी सेठ ने उनके चाय बागानों का अधिग्रहण किया और 'टाटा टी' की नींव रखी। एफएमसीजी और केमिकल्स बिजनेस में टाटा ग्रुप को ग्लोबल पावरहाउस बनाने का श्रेय दरबारी सेठ को ही दिया जाता है। क्योंकि, उन्होंने ही इन व्यवसायों की नींव रखी थी।

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टाटा केमिकल्स का नेतृत्व करने में मिली सफलता के कारण दरबारी सेठ को 14 से ज़्यादा टाटा कंपनियों का चेयरमैन और 20 कंपनियों का डायरेक्टर बनाया गया। जिन कंपनियों को उनकी सलाह से फ़ायदा हुआ, उन सभी में वे चेयरमैन एमेरिटस के तौर पर काम करते रहे। दरबारी सेठ ने 52 साल तक टाटा समूह को अपनी सेवाएं दीं। 8 दिसबंर 1999 में उनका निधन हो गया।