होर्मुज नाकेबंदी के बीच UAE ने OPEC और OPEC+ से अलग होने का बड़ा एलान, कच्चे तेल की आपूर्ति पर पड़ेगा सीधा असर
UAE Withdrawal from OPEC: संयुक्त अरब अमीरात ने 5 दशकों से अधिक समय बाद 1 मई से OPEC और OPEC+ से अलग होने की घोषणा की है। यह निर्णय मध्य पूर्व में तना ...और पढ़ें
नई दिल्ली। UAE ने घोषणा की है कि वह 5 दशकों से भी ज्यादा समय के बाद OPEC और OPEC+ से अलग (UAE's Withdrawal from OPEC and OPEC+) हो जाएगा। यह फैसला 1 मई से लागू होगा। मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच यह बड़ी घोषणा है। खासकर ऐसे समय में जब होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान की नाकेबंदी चल रही है। समूह के भीतर उत्पादन में सऊदी अरब सबसे बड़ा हिस्सा है, और यह अक्सर एक केंद्रीय स्थिरीकारक के रूप में कार्य करता है।
यह तेल निर्यात करने वाले इन समूहों और उनके प्रमुख सऊदी अरब के लिए एक बड़ा झटका है। खासकर ऐसे समय में, जब ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक संकट पैदा हो गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो गई है। इस खबर के आने के बाद कच्चे तेल की कीमतें में भारी उछाल देखने को मिला।
खबर आते ही कच्चे तेल की कीमतों में दिखा उछाल
इस खबर के बाद क्रूड ऑयल1 फीसदी उछलकर 97 डॉलर प्रति बैरल (Crude Oil Price Hike) पर ट्रेड कर रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 1 फीसदी उछलकर 109 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी दिख सकता है। Petrol और Diesel महंगा हो सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें और भागती हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।
यह बयान तब आया जब OPEC बुधवार को वियना में बैठक की तैयारी कर रहा था। UAE बड़े समूह OPEC+ से भी अलग हो जाएगा।
UAE का यह कदम मध्य पूर्व में चल रहे उस संघर्ष की पृष्ठभूमि में आया है, जिसने तेल की आपूर्ति को बाधित किया है और निवेशकों के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। सबसे बड़ी चिंताओं में से एक होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा रही है। यह एक संकरा लेकिन बेहद अहम रास्ता है, जिससे आमतौर पर दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) गुजरता है।
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UAE की सरकारी समाचार एजेंसी Wam ने कहा, "यह फैसला UAE की उत्पादन नीति और उसकी मौजूदा और भविष्य की क्षमता की पूरी समीक्षा के बाद लिया गया है। यह हमारे राष्ट्रीय हित और बाजार की जरूरी जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता पर आधारित है।"
क्या है OPEC?
OPEC (पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन) एक स्थायी अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1960 में पेट्रोलियम नीतियों में समन्वय स्थापित करने और तेल बाजारों को स्थिर रखने के उद्देश्य से की गई थी। यह संगठन अपने सदस्य देशों के उत्पादन स्तरों को नियंत्रित करके जिनके पास दुनिया के लगभग 80% प्रमाणित तेल भंडार मौजूद हैं। OPEC उत्पादकों के लिए स्थिर आय सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के लिए तेल की कुशल आपूर्ति बनाए रखने का लक्ष्य रखता है।
ऐसे में UAE के इस संगठन से बाहर निकलने से इसका असर तेल की आपूर्ति पर दिख सकता है। तेल बाजार में खलबली मच सकती है।
OPEC में कितने देश?
2026 की शुरुआत तक, पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में 12 सदस्य देश शामिल हैं, जो मुख्य रूप से मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में स्थित हैं। पेट्रोलियम नीतियों में समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से 1960 में स्थापित ये राष्ट्र, वैश्विक कच्चे तेल के उत्पादन और भंडार के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रबंधन करते हैं।
वर्तमान में OPEC के 12 सदस्य देश ये हैं:
- एलजीरिया
- भूमध्यरेखीय गिनी
- गैबॉन
- ईरान
- इराक
- कुवैट
- लीबिया
- नाइजीरिया
- कांगो गणराज्य
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- वेनेज़ुएला
नोट- 1 मई 2026 से संयुक्त अरब अमीरात इसका हिस्सा नहीं रहेगा।
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