तेल-गैस संकट से जूझ रहे भारत को अनिल अग्रवाल का फॉर्मूला, सरकार से कहा- बस इन 24 PSUs को संवार दो, नहीं होगी किल्लत!
Anil Agarwal Statement PSU: वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि भारत के प्राकृतिक संसाधन क्षेत्र की सरकारी कंपनियों में उद्यमियों की भागीदारी ...और पढ़ें

'दो कंपनियों से ही 15 गुना बढ़ा प्रोडक्शन', तेल-गैस संकट से जूझ रहे भारत को अनिल अग्रवाल ने दिया ये फॉर्मूला, होगा चमत्कार!

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal Vedanta) ने सरकारी कंपनियों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर भारत के नैचुरल रिसोर्स सेक्टर की पीएसयू कंपनियों (Natural Resources PSU India) में उद्यमियों को ज्यादा भागीदारी दी जाए, तो देश तेजी से आत्मनिर्भर बन सकता है और उत्पादन में जबरदस्त उछाल आ सकता है।
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि,
जब-जब सरकार ने भारतीय उद्यमियों (Indian entrepreneurs) पर भरोसा किया है, उन्होंने चमत्कार किया है और टेलीकॉम, एविएशन, पोर्ट्स, स्टील, सीमेंट और पावर जैसे सेक्टर को विश्वस्तरीय बनाया है।"
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब यही मॉडल नैचुरल रिसोर्स सेक्टर जैसे हाइड्रोकार्बन, मिनरल्स, मेटल्स और फर्टिलाइजर में लागू करने का समय आ गया है।
मैंने 24 पीएसयू का अध्ययन किया- अनिल अग्रवाल
वेदांता चेयरमैन ने कहा कि, उन्होंने 24 पीएसयू कंपनियों का अध्ययन किया है, जो इस सेक्टर में काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, इन कंपनियों के पास मजबूत मानव संसाधन है, लेकिन अगर इसमें उद्यमियों की सोच और कार्यान्वयन (execution) जुड़ जाए, तो भारत की बढ़ती जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
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अग्रवाल बोले- अब समय आ गया है कि...
अनिल अग्रवाल (Vedanta Chairman Anil Agarwal Statement PSU) ने कहा कि भारत ने जमीन के ऊपर यानी एग्रीकल्चर में शानदार काम किया है। उत्पादन बढ़ाया, आत्मनिर्भरता हासिल की और सरप्लस भी बनाया। अब समय आ गया है कि जमीन के नीचे के संसाधनों पर फोकस किया जाए, जहां भारत के पास बेहतरीन जियोलॉजी है।"
हिंदुस्तान जिंक और बाल्को का दिया उदाहरण
उन्होंने अपनी कंपनी के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदुस्तान जिंक और बाल्को में बड़े निवेश, नई टेक्नोलॉजी और उद्यमी नेतृत्व के दम पर रोजगार 5 गुना और उत्पादन 10 से 15 गुना तक बढ़ाया गया। साथ ही, हजार से ज्यादा डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्री भी खड़ी हुईं।
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उन्होंने यह भी साफ किया कि इस मॉडल में किसी की नौकरी नहीं जाएगी। कोई रिट्रेंचमेंट नहीं होगा। फंडिंग जुटाना चुनौती है, लेकिन हमारे उद्यमी बड़े रिसोर्स बेस के दम पर इसे कर सकते हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि इसका मकसद साफ है कि इंपोर्ट घटाना और प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन को तेजी से आगे बढ़ाना।