जाम्बिया में फिर से तांबा पिघलाएगी अनिल अग्रवाल की वेदांता, देश के सबसे बड़े स्मेल्टर प्लांट में से एक; खर्च हुए ₹3350 करोड़
वेदांता की अनुषंगी कोंकोला माइन्स ने जाम्बिया में अपने नचांगा स्मेल्टर को 106 दिन के मेंटेनेंस और $40 मिलियन के मरम्मत कार्य के बाद फिर से चालू कर दिया है।
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जाम्बिया में फिर से तांबा पिघलाएगी अनिल अग्रवाल की वेदांता
HighLights
कोंकोला माइन्स का नचांगा स्मेल्टर 106 दिन बाद फिर चालू
8 साल बाद $40 मिलियन का बड़ा नवीनीकरण निवेश
जाम्बिया के 3 मिलियन टन तांबा लक्ष्य में महत्वपूर्ण योगदान
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारतीय माइनिंग दिग्गज वेदांता (Vedanta) की अनुषंगी कंपनी 'कोंकोला माइन्स' (KCM) ने जाम्बिया स्थित अपने नचांगा स्मेल्टर (Nchanga Smelter) में कामकाज फिर से शुरू कर दिया है। सोमवार को कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, तीन महीने से अधिक समय तक चले मेंटनेंस और भारी-भरकम मरम्मत कार्य के बाद प्लांट को दोबारा चालू किया गया है। पिछले 8 सालों में पहली बार हुए इस बड़े नवीनकरण (Rehabilitation) प्रोजेक्ट पर कंपनी ने करीब 40 मिलियन डॉलर का बड़ा खर्च किया है।
मरम्मत में लगे 106 दिन
कोंकोला कॉपर माइन्स के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, शुरुआत में स्मेल्टर को केवल 60 दिनों के शटडाउन पर रखने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, जब प्लांट की विस्तृत जांच की गई तो कुछ और जरूरी तकनीकी काम सामने आ गए। इन जरूरी सुधारों को पूरा करने के चलते इस पूरी प्रक्रिया में 60 की जगह 106 दिन का समय लग गया।
नचांगा स्मेल्टर की खासियत और क्षमता
इस विशाल स्मेल्टर को साल 2010 में 350 मिलियन डॉलर की भारी-भरकम लागत से स्थापित किया गया था। यह जाम्बिया के सबसे बड़े स्मेल्टर्स में गिना जाता है, जिसकी कुल उत्पादन क्षमता सालाना 3,11,000 मीट्रिक टन कॉपर (तांबा) पैदा करने की है। माइंस मिनिस्ट्री के ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में कोंकोला कॉपर माइंस ने 80,215 टन कॉपर का उत्पादन किया था।
वेदांता और जाम्बिया के बड़े लक्ष्य
इस स्मेल्टर का आधुनिकीकरण और मरम्मत वेदांता की एक व्यापक दीर्घकालिक (Long-term) रणनीति का अहम हिस्सा है। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि 2030 तक इस प्लांट से सालाना 3,00,000 टन कॉपर का उत्पादन किया जाए।
वेदांता का यह कदम केवल कंपनी ही नहीं, बल्कि ज़ाम्बिया सरकार की अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। बता दें कि जाम्बिया वर्तमान में अफ्रीका का दूसरा सबसे बड़ा कॉपर उत्पादक देश है। देश ने कॉपर उत्पादन को लेकर काफी आक्रामक लक्ष्य तय किए हैं। जाम्बिया का लक्ष्य साल 2025 के 8,90,346 टन के कुल कॉपर उत्पादन को बढ़ाकर साल 2031 तक सीधे 3 मिलियन (30 लाख) टन तक पहुंचाने का है। नचांगा स्मेल्टर के पूरी क्षमता से शुरू होने पर जाम्बिया को अपने इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में काफी मदद मिलेगी।
