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IAS बनने में रहे नाकाम, पहला बिजनेस भी डूबा; फिर इस शख्स ने अमेजन-फ्लिपकार्ट के छुड़ाए पसीने, बनाई ₹95000 करोड़ की कंपनी

Updated: Fri, 21 Aug 2026 08:12 AM (IST)

आईआईटी दिल्ली के छात्र विदित आत्रे ने यूपीएससी और पहले स्टार्टअप में असफलता के बाद मीशो की स्थापना की। आज ...और पढ़ें

कैसे शुरू हुआ meesho का सफर?

कैसे शुरू हुआ meesho का सफर?

HighLights

  1. विदित आत्रे ने यूपीएससी और पहले स्टार्टअप में असफलता देखी।

  2. मीशो ने छोटे शहरों और विक्रेताओं को लक्षित कर सफलता पाई।

  3. आज मीशो ₹95,000 करोड़ की कंपनी, आईपीओ की तैयारी में।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान 'आईआईटी दिल्ली' (IIT Delhi) से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब अधिकांश युवा विदेश जाने या बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारी-भरकम पैकेज का सपना देखते हैं, तब एक नौजवान ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS अफसर बनने की ठानी। महीनों तक किताबों में सिर खपाने और जी तोड़ मेहनत के बावजूद उसका यह सपना पूरा नहीं हो सका। निराशा के भंवर से निकलकर उसने कॉरपोरेट जॉब पकड़ी, लेकिन दिल में खुद की कंपनी खड़ी करने का जुनून बाकी था।

उसने नौकरी छोड़ी और नया स्टार्टअप शुरू किया। लेकिन बदनसीबी से वह पहला बिजनेस भी महज कुछ ही महीनों में बुरी तरह फ्लॉप हो गया। लगातार दो बड़े झटकों के बावजूद उसने हार नहीं मानी और अपनी गलतियों से सीखते हुए एक नया दांव खेला। आज उसी दांव की बदौलत उसने ₹95000 करोड़ की वैल्यूएशन ($11 Billion+) वाली एक ऐसी दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी खड़ी कर दी है, जिसने अमेजन (amazon)-फ्लिपकार्ट (flipkart) जैसे ग्लोबल दिग्गजों के पसीने छुड़ा दिए हैं।

IIT से Meesho तक का सफर

सपनों और असफलताओं के इस दौर से गुजरकर सफलता का इतिहास रचने वाले इस शख्स का नाम है विदित आत्रे (vidit aatrey) जो भारत के सबसे लोकप्रिय सोशल ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म मीशो (meesho) के को-फाउंडर और सीईओ (CEO) हैं।

विदित ने साल 2012 में आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन पूरा किया था। ग्रेजुएट होने के बाद उन्होंने एफएमसीजी दिग्गज आईटीसी (ITC) में काम किया और फिर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म लाइमरोड (LimeRoad) से जुड़े, जहां से उन्हें भारतीय ई-कॉमर्स इंडस्ट्री की अंदरूनी समझ मिली।

नाकामी से सीख

विदेशी कंपनियों की तर्ज पर काम करने के बजाय विदित यह समझना चाहते थे कि भारत के छोटे शहरों में व्यापार कैसे होता है। साल 2015 में उन्होंने अपने आईआईटी साथी संजीव बर्नवाल (Sanjeev baranwal) के साथ मिलकर fashnear नाम से एक हाइपरलोकल फैशन ऐप शुरू किया। इसका मकसद स्थानीय दुकानों के कपड़ों को ऑनलाइन बेचना था। हालांकि सही बिजनेस मॉडल ने होने और दुकानदारों की ओर से सुस्त प्रतिक्रिया के कारण यह वेंचर कुछ ही महीनों में बंद हो गया।

ऐसे हुआ meesho का जन्म

पहली नाकामी से हताश होने के बजाय विदित और संजीव ने जमीनी हकीकत को फिर से समझा। उन्होंने पाया कि भारत के छोटे शहरों में गृहिणी (homemaker) और छोटे दुकानदार वॉट्सऐप (WhatsApp) और फेसबुक (facebook) के जरिए कपड़े और सामान रीसेल कर रहे हैं।

इसी विचार को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए दिसंबर 2015 में Meesho (Meri Shop) की नींव पड़ी। उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जहां कोई भी व्यक्ति बिना किसी शुरुआती निवेश (Zero Investment) के अपना रीसेलिंग बिजनेस शुरू कर सकता था।

सिलिकॉन वैली से मिला ब्रेकथ्रू

मीशो (Meesho) की अनूठी सोच देखते हुए 2016 में मशहूर अमेरिकी सिलिकॉन वैली एक्सीलेटर Y Combinator ने इसे अपने मेंटरशिप प्रोग्राम के लिए चुना। मीशो उस समय भारत से चुने गए चुनिंदा बेहद शुरुआती स्टार्टअप्स में से एक था।

इसके बाद मीशो (MEESHO) ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कंपनी के बिजनेस मॉडल से प्रभावित होकर दुनिया भर के दिग्गज निवेशकों जैसे Softbank, meta, prosus, और sequoia ने करोड़ों डॉलर निवेश किए।

क्या रही मीशो के सफलता की मुख्य रणनीति?

1. जहां अमेजन और फ्लिपकार्ट बड़े मेट्रो शहरों के अमीर ग्राहकों को लक्षित कर रहे थे, वहीं मीशो ने छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण भारत के मध्यवर्ग को अपना ग्राहक बनाया।
2. मीशो ने छोटे विक्रेताओं (Sellers) से कोई कमीशन न लेने की क्रांतिकारी नीति अपनाई। इससे लाखों छोटे दुकानदार, जो भारी कमीशन के डर से ऑनलाइन नहीं आ रहे थे, मीशो से जुड़ गए।
3. मीशो ने देश की लाखों गृहिणियों को घर बैठे रीसेलिंग के जरिए पैसे कमाने का जरिया दिया, जिससे ब्रांड को जमीनी स्तर पर माउथ-पब्लिसिटी मिली।

₹95,000 करोड़ का साम्राज्य

आज मीशो सिर्फ एक रीसेलिंग ऐप नहीं, बल्कि एक विशाल डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस बन चुका है। मीशो पर सालाना 15 करोड़ से अधिक एक्टिव ट्रांसैक्टिंग यूजर्स हैं। देश के 80% से अधिक पिन कोड्स तक मीशो की डिलीवरी पहुंच चुकी है। यह कंपनी ₹95,000 करोड़ से अधिक की वैल्यूएशन हासिल कर चुकी है। 

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