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इस भारतीय ने फुटबॉल टीम के लिए खर्च कर डाले ₹91702 करोड़, दूध बिजनेस हुआ फेल; फिर बना ₹1.26 लाख करोड़ का मालिक

Updated: Thu, 27 Aug 2026 10:26 AM (IST)

एनएफएल मालिकों ने भारतीय मूल के अरबपति विनोद खोसला और उनके परिवार को सिएटल सीहॉक्स को 9.612 अरब डॉलर में ...और पढ़ें

विनोद खोसला की कहानी (AI फोटो)

विनोद खोसला की कहानी (AI फोटो)

HighLights

  1. एनएफएल ने विनोद खोसला को सिएटल सीहॉक्स बेचने की मंजूरी दी

  2. भारतीय मूल के अरबपति ने 9.612 अरब डॉलर में खरीदी फ्रैंचाइजी

  3. खोसला वेंचर्स के संस्थापक हैं और OpenAI के शुरुआती निवेशक

नई दिल्ली। बुधवार को NFL मालिकों ने भारतीय मूल के अमेरिकी अरबपति निवेशक विनोद खोसला और उनके परिवार को सिएटल सीहॉक्स (Seattle Seahawks) को 9.612 अरब डॉलर (91702 करोड़ रुपये) में बेचने की मंजूरी दे दी, जिससे वे आधिकारिक तौर पर इस फ्रैंचाइजी के नए मालिक बन गए।
नेशनल फुटबॉल लीग (NFL) अमेरिका में एक प्रोफेशनल अमेरिकन फुटबॉल लीग है, जिसकी एक फ्रैंचाइजी सिएटल सीहॉक्स को खोसला ने खरीदा है।
सिलिकॉन वैली की वेंचर कैपिटल फर्म 'खोस्ला वेंचर्स' के फाउंडर खोस्ला के पास अभी सैन फ्रांसिस्को 49ers में माइनॉरिटी हिस्सेदारी है। सीहॉक्स डील के तहत, खोसला परिवार को वह हिस्सेदारी छोड़नी होगी। खोसला ने 2025 में 49ers में 3.1% हिस्सेदारी खरीदी थी।

कौन हैं विनोद खोसला?

विनोद खोसला, सिलिकॉन वैली की वेंचर कैपिटल फर्म 'खोसला वेंचर्स' के फाउंडर हैं। खोसला वेंचर्स बायोमेडिसिन और रोबोटिक्स जैसी एक्सपेरिमेंटल टेक्नोलॉजी में निवेश करती है। 71 वर्षीय खोसला भारतीय मूल के अमेरिकी अरबपति हैं, जिनकी नेटवर्थ इस समय 13.2 अरब डॉलर (1.26 लाख करोड़ रुपये) है। वे दुनिया के टॉप अमीरों में इस समय 237वें नंबर पर हैं।

1.26 लाख करोड़ रुपये की नेटवर्थ के हिसाब से देखें तो खोसला और उनके परिवार द्वारा सिएटल सीहॉक्स को खरीदने के लिए खर्च की गयी रकम (91702 करोड़ रुपये) विनोद की नेटवर्थ के करीब तीन-चौथाई के बराबर है।

आर्मी परिवार से संबंध

भारत में एक आर्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाले विनोद खोसला ने पहले 'सन माइक्रोसिस्टम्स' की सह-स्थापना की और फिर 'खोसला वेंचर्स' को खड़ा किया, जिससे वे दुनिया के सबसे प्रभावशाली टेक अरबपतियों और वेंचर कैपिटलिस्ट्स में से एक बन गए।

भारत के पुणे में जन्मे खोसला ने 16 साल की उम्र में इंटेल (Intel) की स्थापना के बारे में एक लेख पढ़ा और अपनी खुद की टेक्नोलॉजी कंपनी शुरू करने का सपना देखा।

क्या थीं शुरुआती मुश्किलें?

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद, खोसला ने भारत में उन लोगों की मदद के लिए सोया मिल्क कंपनी शुरू करने की कोशिश की जिनके पास रेफ्रिजरेटर नहीं थे। स्थानीय अफसरशाही और बाजार की सीमाओं के कारण यह कोशिश नाकाम रही।

इसके बाद वे अमेरिका चले गए और कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ़ बिज़नेस से MBA की डिग्री हासिल की।

ये थी पहली कंपनी

स्टैनफोर्ड से निकलने के तुरंत बाद, खोसला ने 'डेजी सिस्टम्स' (Daisy Systems) नाम की कंपनी शुरू की, जो शुरुआती कंप्यूटर-एडेड डिजाइन प्लेटफॉर्म में से एक थी। 1982 में, 27 साल की उम्र में, उन्होंने एंडी बेचटोल्शेइम, बिल जॉय और स्कॉट मैकनीली के साथ मिलकर 'सन माइक्रोसिस्टम्स' (Sun Microsystems) की शुरुआत की।
इस कंपनी ने शुरुआती एंटरप्राइज कंप्यूटिंग और इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर के अहम हिस्से बनाए और बाद में 2010 में ओरेकल (Oracle) ने इसे 7.4 अरब डॉलर में खरीद लिया।

OpenAI में निवेश करने वाली पहली वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर

खोसला ने 'क्लीनर पर्किन्स' (Kleiner Perkins) में 18 साल तक जनरल पार्टनर के तौर पर काम किया, जहाँ उन्होंने जुनिपर नेटवर्क्स (Juniper Networks) और गूगल (Google) में शुरुआती निवेश जैसे बड़े दांव लगाए। खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) को उन्होंने 2004 में शुरू किया ताकि नई सोच वाली, टेक्नोलॉजी पर आधारित कंपनियों को सपोर्ट किया जा सके।
उनकी फर्म OpenAI में निवेश करने वाली पहली वेंचर कैपिटल इन्वेस्टर थी और इसने DoorDash, Stripe, Block (Square) और Affirm जैसी बड़ी कंपनियों को सपोर्ट किया है। उन्हें फोर्ब्स की 'मिडास लिस्ट' (Midas List) में पहला स्थान मिला था।

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