केन्या में क्या करती है टाटा केमिकल्स और कितना कमाती है, जिसका कारोबार हुआ ठप; राष्ट्रपति ने दिया 'देश निकाला'
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने टाटा केमिकल्स को देश में अपना कारोबार बंद करने का आदेश दिया है, आरोप ...और पढ़ें

केन्याई राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कारोबार बंद करने का आदेश दिया।
HighLights
केन्याई राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कारोबार बंद करने का आदेश दिया।
कंपनी पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को पर्याप्त लाभ न देने का आरोप।
टाटा केमिकल्स समाधान के लिए केन्या सरकार से बातचीत कर रही है।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 158 साल पुराने भारतीय कारोबार समूह टाटा ग्रुप की एक कंपनी को लेकर अफ्रीकी देश केन्या में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने टाटा केमिकल्स को देश में अपना ऑपरेशन बंद करने आदेश दिया है। यानी कारोबार समेटने का आदेश दिया गया है। केन्या सरकार का कहना है कि सरकार का कहना है कि कंपनी देश के लिए पर्याप्त फायदा पहुंचाने में नाकाम रही है।
हालांकि, कंपनी का कहना है कि उसने सरकार की ओर से मांगी गई जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं और वह संबंधित अधिकारियों के साथ समाधान के लिए बातचीत कर रही है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर टाटा ग्रुप की यह कंपनी केन्या में करती क्या है और उसकी कितनी कमाई होती है? आइए इन सवालों के जवाब जानते हैं।
केन्या में कितना पुराना है टाटा केमिकल्स का इतिहास और काम क्या है?
टाटा केमिकल्स ने 2005 में UK की कंपनी ब्रूनर मोंड ग्रुप को खरीदकर इसके कामकाज को अपने हाथ में लिया। लेक मागाडी से प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला खनिज ट्रोना (Trona) निकाला जाता है। इसे प्रोसेस करके सोडा ऐश तैयार किया जाता है। कंपनी के मुताबिक मागाडी में सोडा ऐश का उत्पादन 1911 से हो रहा है। यह जगह केन्या की राजधानी नैरोबी से करीब 120 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
यानी केन्या में टाटा केमिकल्स अपनी सहायक कंपनी टाटा केमिकल्स मगाडी लिमिटेड (Tata Chemicals Magadi Limited) के जरिए कारोबार करती है। कंपनी का मुख्य काम सोडा ऐश (Sodium Carbonate) और नमक का उत्पादन एवं बिक्री करना है।
सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच बनाने, सिलिकेट और दूसरे औद्योगिक कामों में होता है। टाटा केमिकल्स की केन्या यूनिट अपने उत्पादों की बिक्री पूर्वी अफ्रीका के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के बाजारों में भी करती है।
टाटा केमिकल्स की FY2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, TCML ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 2.9 लाख टन सोडा ऐश की बिक्री की। एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 2.8 लाख टन था। हालांकि बिक्री की मात्रा बढ़ी, लेकिन सोडा ऐश की कीमतों में गिरावट के कारण कंपनी की कमाई पर असर पड़ा।
केन्या में टाटा केमिकल्स की कितनी कमाई होती है?
केन्या में टाटा केमिकल्स की सहायक कंपनी Tata Chemicals Magadi Limited का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 586 करोड़ रुपये रहा। इसका EBITDA 101 करोड़ रुपये रहा। वहीं वहीं, टैक्स के पहले मुनाफा 92 करोड़ और टैक्स के बाद मुनाफा 48 करोड़ रहा।
एक साल पहले यानी FY2024-25 में TCML का रेवेन्यू ₹612 करोड़ और PAT ₹118 करोड़ था। यानी एक साल में केन्या यूनिट का शुद्ध मुनाफा ₹118 करोड़ से घटकर ₹48 करोड़ रह गया।
केन्या का कारोबार टाटा केमिकल्स के कुल कारोबार की तुलना में छोटा है। FY2025-26 में पूरी Tata Chemicals का कंसोलिडेटेड ₹14,584 करोड़ था, जबकि केन्या की TCML यूनिट का रेवेन्यू ₹586 करोड़ रहा।
इस हिसाब से केन्या यूनिट का रेवेन्यू कंपनी के कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का करीब 4 फीसदी था। इसलिए अकेले इस कारोबार के रुकने से टाटा केमिकल्स के पूरे वित्तीय प्रदर्शन पर बहुत बड़ा असर पड़ना जरूरी नहीं है। लेकिन मागाडी यूनिट प्राकृतिक सोडा ऐश के कारोबार और अफ्रीकी बाजार में कंपनी की मौजूदगी के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि टाटा केमिकल्स और केन्या सरकार के बीच विवाद का अंतिम समाधान क्या निकलता है। कंपनी ने अपना पक्ष सरकार के सामने रख दिया है और आगे की कार्रवाई के लिए मंत्रालय के निर्देश का इंतजार कर रही है।
टाटा केमिकल्स का कारोबार क्यों हुआ ठप?
केन्या सरकार ने जुलाई 2026 में टाटा केमिकल्स की मागाडी यूनिट के ऑपरेशन और सोडा ऐश के निर्यात को निलंबित कर दिया था। इसके बाद कंपनी से नियामकीय मामलों को लेकर जानकारी मांगी गई।
सितंबर में राष्ट्रपति विलियम रुटो ने कंपनी को केन्या में अपना कारोबार बंद करने का निर्देश दिया। रुटो का आरोप है कि कंपनी के लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल के बावजूद स्थानीय क्षेत्र को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिला। उन्होंने खास तौर पर काजियाडो में स्थानीय स्तर पर फैक्ट्री और औद्योगिक निवेश नहीं होने का मुद्दा उठाया।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सरकार नए निवेशकों को लाने की योजना बना रही है, जिनसे क्षेत्र में ग्लास और केमिकल मैन्युफैक्चरिंग जैसी गतिविधियां विकसित करने की उम्मीद है।
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