Budget 2026: बायोफार्मा सेक्टर में ₹10 हजार करोड़ के निवेश का एलान, इस मामले में भारत बनेगा ग्लोबल हब
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 (Budget 2026) में बायोफार्मा सेक्टर के लिए 'बायोफार्मा शक्ति' रणनीति के तहत ...और पढ़ें

बायोफार्मा सेक्टर के लिए 10000 करोड़ रुपये का एलान

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नई दिल्ली। आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट (Union Budget 2026) पेश किया। अपने बजट भाषण में उन्होंने अगले 5 साल में बायोफार्मा सेक्टर में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश करने का एलान किया। सीतारमण ने बजट पेश करते हुए कहा कि नॉलेज, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए हेल्थ एडवांसमेंट के लिए बायोफार्मा स्ट्रेटेजी हेल्थकेयर में भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करेगी।
क्या होता है बायोफार्मा?
बायोफार्मास्यूटिकल (बायोफार्मा) सेक्टर हेल्थकेयर इंडस्ट्री का एक स्पेशलाइज्ड, हाई-ग्रोथ वाला पार्ट है जो पारंपरिक केमिकल सिंथेसिस के बजाय जीवित जीवों (कोशिकाओं, प्रोटीन, जीन, या माइक्रोऑर्गेनिज्म) से बनी दवाओं पर रिसर्च, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग करता है।
इन जटिल प्रोडक्ट्स, जैसे कि वैक्सीन, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी और जीन थेरेपी का इस्तेमाल कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों जैसी बीमारियों के टारगेटेड इलाज के लिए किया जाता है।
ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनेगा भारत
एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (AiMeD) के फोरम कोऑर्डिनेटर राजीव नाथ ने बायोफार्मा पर बजट में किए गए प्रस्ताव पर कहा कि, "केंद्रीय बजट 2026 भारत की वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जीवन-विज्ञान इकोसिस्टम बनाने की प्रतिबद्धता का एक मजबूत और विश्वसनीय संकेत देता है। पांच साल में ₹10,000 करोड़ के खर्च के साथ बायोफार्मा शक्ति की घोषणा भारत को एक वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, खासकर बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के क्षेत्र में, जो किफायती लागत पर क्वालिटी ऑफ लाइफ और लंबी उम्र को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।"
राजीव नाथ के अनुसार, "बायोफार्मा-केंद्रित नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव, तीन नए NIPERs की स्थापना, सात मौजूदा संस्थानों का अपग्रेडेशन, और 1,000 मान्यता प्राप्त क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का राष्ट्रव्यापी नेटवर्क भारत की रिसर्च, प्रतिभा और क्लिनिकल वैलिडेशन क्षमताओं को काफी मजबूत करेगा। ये उपाय इनोवेशन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक की प्रक्रिया में लंबे समय से चली आ रही संरचनात्मक कमियों को दूर करते हैं। भारत के $50-अरब के फार्मास्युटिकल उद्योग के लिए, जो GDP में लगभग 2.5% का योगदान देता है, यह बजट वॉल्यूम के नेतृत्व वाली ग्रोथ से वैल्यू और इनोवेशन-संचालित नेतृत्व की ओर बदलाव को मजबूत करता है।"
"बायोलॉजिक दवाएं हैं जरूरी"
सीतारमण ने घोषणा की, "बायोफार्मा शक्ति, जिसका मतलब है ज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के जरिए हेल्थ एडवांसमेंट के लिए बायोफार्मा रणनीति। भारत में डिजिटल बीमारियों का बोझ अब डायबिटीज, कैंसर और ऑटोइम्यून डिसऑर्डर जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की ओर बढ़ रहा है।"
उन्होंने कहा, "बायोलॉजिक दवाएं किफायती कीमतों पर लंबी उम्र और बेहतर जीवन के लिए जरूरी हैं। भारत को ग्लोबल बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने के लिए, मैंने अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपये के खर्च के साथ बायोफार्मा शक्ति का प्रस्ताव दिया है। इससे इकोसिस्टम बनेगा। बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन के लिए, इस रणनीति में तीन नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, जिन्हें NIPERs के नाम से जाना जाता है, और सात मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड करके एक बायोफार्मा-केंद्रित नेटवर्क शामिल होगा।"
ये है बाकी डिटेल
सीतारमण ने आगे कहा, "यह 1,000 मान्यता प्राप्त भारतीय क्लिनिकल ट्रायल साइट्स का एक नेटवर्क भी बनाएगा। हम सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन को मज़बूत करने का प्रस्ताव रखते हैं ताकि यह ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को पूरा कर सके और एक समर्पित वैज्ञानिक समीक्षा और विशेषज्ञों के जरिए समय-सीमा को मंजूरी दे सके।"
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