भारत में क्या होगा कमोडिटी मार्केट का भविष्य? निवेश, टेक्नोलॉजी से लेकर रिस्क मैनेजमेंट तक, क्या-क्या बदलने जा रहा
Global Commodity Conclave: मुंबई में 12-14 अगस्त को ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव होगा, जो भारत के कमोडिटी बाजार के भविष्य को आकार देगा। इसमें जोखिम प्रबंध ...और पढ़ें
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कमोडिटी मार्केट में बड़ा बदलाव! रिटेल निवेशकों से लेकर MCX तक क्यों बढ़ रहा भरोसा, कैसे खुल रहे कमाई के मौके?
HighLights
मुंबई में 12-14 अगस्त को ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव का आयोजन।
जोखिम प्रबंधन, निवेश, तकनीक और लॉजिस्टिक्स पर होगी चर्चा।
भारत के कमोडिटी बाजार को मजबूत, पारदर्शी बनाने का उद्देश्य।
नई दिल्ली| भारत का कमोडिटी मार्केट तेजी से बदल रहा है और इसी बदलाव की दिशा तय करने के लिए 12, 13 और 14 अगस्त को मुंबई में ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव का आयोजन होने जा रहा है। यह कॉन्क्लेव सिर्फ कमोडिटी की कीमतों या ट्रेडिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिस्क मैनेजमेंट, निवेश, फिजिकल मार्केट, टेक्नोलॉजी, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका जैसे अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा का मंच बनेगा।
कॉन्क्लेव में कौन-कौन होगा शामिल?
कॉन्क्लेव में रेगुलेटर्स, कमोडिटी एक्सचेंज, बुलियन एसोसिएशन, रिफाइनर्स, ज्वैलर्स, ट्रेडर्स, उद्योग संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मार्केट प्लेयर्स सहित कमोडिटी इकोसिस्टम से जुड़े प्रमुख हितधारक हिस्सा लेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य भारत के कमोडिटी बाजार को अधिक मजबूत, पारदर्शी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की रणनीति पर विचार करना है।
"वेल्थ क्रिएशन के नए मौके बन रहे"
कमोडिटी एंड कैपिटल मार्केट पार्टिसिपेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CPAI) के अल्टरनेट प्रेसिडेंट अजय गर्ग ने कहा, "भारत के कमोडिटी मार्केट में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और संस्थागत निवेशकों का मजबूत भरोसा एक साथ देखने को मिल रहा है। यह बदलाव बाजार को अधिक समावेशी बना रहा है और इसे वेल्थ क्रिएशन का मजबूत माध्यम बनाने की दिशा में ले जा रहा है।"
"प्राइस रिस्क हेजिंग और निवेश पर फोकस"
वहीं, एमसीएक्स (MCX) की एमडी एवं सीईओ प्रवीणा राय ने कहा,
हमारा फोकस कमोडिटी को प्राइस रिस्क हेजिंग के प्रभावी माध्यम और एक बेहतर निवेश विकल्प के रूप में बढ़ावा देना है। ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव पहली बार विभिन्न सेक्टरों के स्टेकहोल्डर्स को इतने बड़े स्तर पर एक मंच पर लाएगा, जहां कमोडिटी और फाइनेंशियल मार्केट के भविष्य पर चर्चा होगी। ऐसे सहयोगात्मक प्रयास भारत के कमोडिटी मार्केट इकोसिस्टम को मजबूत करेंगे और विकसित भारत के विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे।"
कॉन्क्लेव में फिजिकल मार्केट और एक्सचेंज के बेहतर एकीकरण, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स को मजबूत बनाने, डिजिटल ट्रेडिंग और रियल-टाइम डेटा के बढ़ते इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही भारत ऐसे भरोसेमंद कमोडिटी बेंचमार्क विकसित करने की दिशा में रोडमैप तैयार करने पर भी मंथन करेगा, जिन्हें वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता मिल सके।
कमोडिटी मार्केट के जरूरी क्यों है कॉन्क्लेव?
वैश्विक स्तर पर बदलती सप्लाई चेन, भू-राजनीतिक तनाव, करेंसी में उतार-चढ़ाव और कमोडिटी कीमतों की बढ़ती अस्थिरता के बीच यह कॉन्क्लेव भारतीय कमोडिटी बाजार के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। इसका उद्देश्य सिर्फ भारत को कमोडिटी का बड़ा उपभोक्ता बनाना नहीं, बल्कि वैश्विक प्राइस डिस्कवरी में उसकी मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करना और एक आधुनिक, पारदर्शी तथा मजबूत कमोडिटी मार्केट इकोसिस्टम की नींव रखना है।