Gold Silver Price: 6 हफ्ते बाद अचानक भागे दाम, सोना 1.50 लाख के करीब पहुंचा; चांदी कहां तक जाएगी? एक्सपर्ट ने दिए टारगेट
Gold Silver Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में 6 हफ्तों बाद तेजी लौटी है, जिससे निवेशकों में सवाल उठ रहे हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन ने इस ...और पढ़ें
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सोना 1.50 लाख के करीब पहुंचा; चांदी कहां तक जाएगी? एक्सपर्ट ने दिए टारगेट

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| Gold Silver Price Today: करीब 6 हफ्तों की कमजोरी के बाद गोल्ड-सिल्वर में तेजी लौट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4300 डॉलर और चांदी 62 डॉलर प्रति औंस के पार (gold silver price hike) पहुंच गई है। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना 4500 रुपए प्रति 10 ग्राम महंगा (gold price hike) हो गया और चांदी भी 7200 रुपए प्रति किलोग्राम से ज्यादा महंगी (silver price hike) हो गई।
ऐसे में आम खरीदारों और निवेशकों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह नई बुल रन की शुरुआत है या सिर्फ कुछ दिनों की राहत? क्या अब सोना-चांदी खरीद लेना चाहिए या अभी और इंतजार करना चाहिए? सबसे अहम सवाल कि आने वाले दिनों में सोने-चांदी के टारगेट प्राइस क्या हो सकते हैं?
जागरण बिजनेस से खास बातचीत के दौरान ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब दिए सेबी रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट और इंटेलिसिस वेंचर्स के फाउंडर अमित सुरेश जैन ने। तो चलिए 6 सवालों में समझते हैं सबकुछ...
MCX पर क्या हैं सोने-चांदी के ताजा रेट?
पहले गोल्ड-सिल्वर के ताजा रेट समझते हैं। एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 4590 रुपए महंगा होकर 1,48,889 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम के दिन के हाई लेवल पर पहुंच गया। खबर लिखे जाने तक यह 1,48,260 रुपए (gold rate today) प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा। वहीं सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में 2.80 फीसदी की तेजी दर्ज हुई और कीमत 7285 उछलकर 2,28,900 रुपए प्रति किलोग्राम (silver price today) पर पहुंच गई। वहीं कोमेक्स पर सोना 4306 डॉलर और चांदी 62.43 डॉलर प्रति औंस (silver rate today) पर पहुंच गया।
अब एक्सपर्ट्स से समझते हैं आखिर तेजी क्यों आई और आने वाले दिनों का आउटलुक क्या रह सकता है?
सवाल- गोल्ड-सिल्वर में अचानक रैली क्यों देखने को मिली? क्या डॉलर इंडेक्स की कमजोरी से तेजी देखने को मिली?
अमित सुरेश जैन: इस रैली की वजह सिर्फ डॉलर इंडेक्स में कमजोरी नहीं है। डॉलर में नरमी, जियोपॉलिटिकल तनाव में कुछ कमी, शॉर्ट कवरिंग और अमेरिका में ब्याज दरों व बॉन्ड यील्ड को लेकर उम्मीदें, इन सभी ने मिलकर सोना-चांदी को सपोर्ट दिया है। हालांकि फिलहाल यह तेजी लंबे समय की नई बुलिश शुरुआत नहीं, बल्कि लंबे कंसोलिडेशन के बाद आई टेक्निकल रिकवरी ज्यादा नजर आती है।
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सवाल- सोने से ज्यादा क्यों चमक रही है चांदी?
अमित सुरेश जैन: हाल के दिनों में गोल्ड-सिल्वर रेशियो 70-73 तक पहुंच गया था, जो अब घटकर करीब 68.40 पर आ गया है। आमतौर पर जब यह रेशियो ज्यादा होता है, तब चांदी में तेजी की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि इस बार चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है। इंडस्ट्रियल डिमांड भी बनी हुई है, लेकिन मीडियम टर्म का रुख अभी भी पूरी तरह मजबूत नहीं माना जा रहा।
सवाल- क्या सोने-चांदी में यह तेजी टिकाऊ है या दाम फिर गिर सकते हैं?
अमित सुरेश जैन: अभी तक बाजार के फंडामेंटल में ऐसा कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, जिससे सोना या चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच जाएं। मौजूदा तेजी मुख्य रूप से शॉर्ट कवरिंग की वजह से आई है। इंडस्ट्रियल डिमांड में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखा है।
सवाल- चांदी अभी चढ़ेगी या फिर गिरावट आ सकती है, टारगेट प्राइस क्या हो सकते हैं?
अमित सुरेश जैन: एमसीएक्स पर चांदी अगर 2.29 लाख रुपए के ऊपर टिकती है, तो 2.34 लाख रुपए (silver price prediction) तक जा सकती है। वहीं 2.18 लाख रुपए के ऊपर रहने तक शॉर्ट टर्म ट्रेंड सकारात्मक रहेगा। ऐसे में गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है, लेकिन 2.18 लाख रुपए का स्टॉप लॉस जरूर रखना चाहिए।
सवाल- मिडिल ईस्ट, क्रूड और आगे का आउटलुक क्या हो सकता है? सोने के टारगेट प्राइस क्या हो सकते हैं?
अमित सुरेश जैन: सोने में 1.47 लाख से 1.49 लाख रुपए तक का लक्ष्य दिख सकता है, बशर्ते यह 1.42 लाख रुपए (silver price prediction) के ऊपर बना रहे। निवेशक स्टॉप लॉस का सख्ती से पालन करें और बाजार का ट्रेंड बदलने पर अपनी रणनीति भी बदलें। साथ ही क्रूड ऑयल पर भी नजर रखना जरूरी है। अगर क्रूड 80 डॉलर के ऊपर जाता है और जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ता है, तो सोना-चांदी की मौजूदा तेजी पर दबाव आ सकता है।
सवाल- क्या मिडिल ईस्ट का खतरा कम हुआ है और क्या सेंट्र्ल बैंक खरीदारी बढ़ा रहे हैं?
अमित सुरेश जैनः फिलहाल मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा पहले के मुकाबले कुछ कम हुआ है, लेकिन अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सुरक्षित निवेश (Safe Haven Buying) और दुनिया के कई सेंट्रल बैंकों की सोने में खरीदारी अब भी बाजार को सहारा दे रही है।