स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बना 'जी का जंजाल', तेजी से गिरी बासमती चावल की कीमत
पश्चिमी एशिया में तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा से भारत के बासमती चावल के निर्यात ...और पढ़ें
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बासमती चावल की कीमतें घटने की आशंका
HighLights
होर्मुज जलडमरूमध्य बंद, भारतीय बासमती चावल निर्यात पर सीधा असर।
पश्चिमी एशिया तनाव से बासमती चावल की कीमतों में 5-10% गिरावट।
ईरान के फैसले से भारतीय निर्यातकों को भारी नुकसान की आशंका।
नई दिल्ली| पश्चिमी एशिया में चल रहे तनाव का सीधा असर भारत के व्यापार में देखने को मिला है। अब एक बार फिर भारत के बासमती चावल की कीमत में गिरावट देखी जा रही है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए बंद करने की घोषणा से भारत से बासमती चावल और चाय के निर्यात (Export) पर असर पड़ने की आशंका है। चावल एक्सपोर्टर्स ने शिपमेंट बाधित होने से ऑर्डर और कीमत में कमी की बात कही है।
15-20 फीसदी बढ़ी थीं कीमतें
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा ने मीडिया को बताया कि, अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम शांति समझौते की घोषणा के बाद भारत के बासमती चावल की कीमतें में तगड़ा उछाल आया था। इसके साथ ही निर्यातकों ने मिडिल-ईस्ट को शिपमेंट भेजने के लिए अच्छी मात्रा में बासमती चावल खरीदना भी शुरू कर दिया था। देव गर्ग के अनुसार तब कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी हुई थी।
होर्मुज प्रायद्वीप है बासमती का सबसे बड़ा बाजार
पश्चिमी एशिया भारत से कई चीजें खरीदता है, जिसमें मसाले, मीट और चावल खास हैं। आंकड़े बताते हैं कि भारत में बासमती चावल का कुल उत्पादन 72 लाख टन है जिसमें से 60 लाख टन निर्यात कर दिया जाता है। इसमें से लगभग 50 फीसदी चावल सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन जैसे वेस्ट एशिया के देशों में भेजा जाता है। भारत को इन देशों तक पहुंचने के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरना होता है।
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कितनी कम हो सकती है कीमत?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम एशियाई बाजारों के लिए निर्धारित लगभग 60,000 टन बासमती चावल वर्तमान में रास्ते में है। बताते हैं कि अंतरिम समझौते से पहले भारी मात्रा में बासमती चावल की खरीद की गई। लेकिन अचानक से रास्ता बंद करने के फैसले से कीमतें गिर सकती हैं। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के उपाध्यक्ष के अनुसार कीमत में करीब 5-10 फीसदी की गिरावट आ सकती है। इस फैसले के बाद भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की बंदी का असर ना सिर्फ निर्यात बल्कि आयात पर भी खासा देखने को मिला है। जिस तरह से डीजल-पेट्रोल, गैस और खाद की शिपमेंट में समस्या आई है, उसी तरह भारत की ओर से भेजे जाने वाले माल की शिपमेंट भी बाधित हुई है।
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