अलनीनो ने दिया एक और बड़ा झटका! चीनी एक्सपोर्ट पर लगी रोक, घरेलू खपत से भी कम उत्पादन का अनुमान
भारत ने अल नीनो के कारण गन्ने के उत्पादन में कमी और घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अगले ...और पढ़ें

चीनी निर्यात पर लगी रोक (AI Image)
HighLights
भारत ने अगले तीन सीज़न के लिए चीनी निर्यात पर रोक लगाई।
अल नीनो के कारण गन्ने के उत्पादन में भारी कमी का अनुमान।
घरेलू चीनी स्टॉक तीन दशकों में सबसे निचले स्तर पर।
नई दिल्ली| दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातक देशों में गिने जाने वाले भारत ने चीनी एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी है। ये रोक कम से कम अगले तीन सीजन के लिए है। भारत के इस फैसले के बाद से अंतर्राष्ट्री बाजारों से लाखों टन चीनी बाहर हो जाने की आशंका है, जिससे एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के आयातकों के लिए आपूर्ति कम हो जाएगी, और लंदन और न्यूयॉर्क में बेंचमार्क कीमतों को समर्थन मिलेगा।
केंद्र सरकार ने क्यों लगाई रोक?
IMD के पूर्वानुमान के मुताबित इस साल अल नीनो की स्थिति के कारण भारत में मानसून के कमजोर होने और पिछले 11 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने सामान्य से भी कम बारिश की आशंका जताई है, जिससे गन्ने की खेती प्रभावित हो सकती है, इससे गन्ने के उत्पादन में भी प्रभाव पड़ेगा।
गन्ना उत्पादन में कमी के पूर्वानुमान, इथेनॉल की बढ़ती मांग के कारण आपूर्ति में कमी और चीनी की घरेलू कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए चीनी के एक्सपोर्ट में रोक लगाई गई है। बता दें कि इससे पहले केंद्र सरकार ने 30 सितंबर तक के चीनी चीनी के निर्यात पर रोक लगाई थी।
ग्लोबल मार्केट में क्या असर होगा?
रिपोर्ट्स की मानें तो भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने साल 2022-23 तक पांच सीजनों में औसतन 6.8 मिलियन मीट्रिक टन चीनी का निर्यात किया, जो वैश्विक निर्यात का लगभग 10% था। इस वर्ष, लगभग 800,000 टन निर्यात करने के बाद, सरकार ने रोक लगा दी। इंडोनेशिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), इराक, सऊदी अरब, और सोमालिया जैसे देशों में भारत चीनी का एक्सपोर्ट बड़े पैमाने पर किया जाता है। भारत के इस फैसले से इंटरनेशनल मार्केट पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
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30 दशकों में सबसे कम स्टॉक
उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, भारत में इस सीजन में 30.95 मिलियन टन चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद थी, लेकिन अब उत्पादन 27.9 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो लगभग 28.5 मिलियन टन की वार्षिक खपत से कम है। MEIR Commodities के मुताबित 1 अक्टूबर को सीजन की शुरुआत में मिलों के पास मौजूद स्टॉक घटकर लगभग 35 लाख टन होने की संभावना है, जो तीन दशकों से अधिक समय में सबसे कम है।
सालों बाद चीनी का आयात
बता दें कि साल 2015 में अल नीनो के कारण पड़े सूखे से गन्ने की खेती कम हुई थी। इसके बाद, देश ने आखिरी बार 2016-17 और 2017-18 में चीनी का आयात किया था। इससे पहले, 2009 और 2010 में, भारत के बड़े पैमाने पर चीनी आयात ने वैश्विक कीमतों को पिछले स्तर से लगभग तीन गुना तक बढ़ाने में मदद की थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अब भारत में इथेनॉल की आपूर्ति के चलते आयान करना पड़ रहा है।
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