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    चीनी की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार का नया प्लान, समय से पहले शुरू होंगी मिलें! बाजार में कैसी रहेगी सप्लाई?

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:55 PM (IST)

    चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए चीनी उद्योग ने गन्ना पेराई का सीजन 10-15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य त्योहारी ...और पढ़ें

    समय से पहले चीनी की क्रशिंग शुरू करने का प्रस्ताव

    समय से पहले चीनी की क्रशिंग शुरू करने का प्रस्ताव

    HighLights

    1. खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में 17% की वृद्धि।

    2. त्योहारी सीजन से पहले चीनी की आपूर्ति बढ़ाने का लक्ष्य।

    3. जल्दी पेराई से होने वाले नुकसान के लिए मिलों ने मांगा मुआवजा।

    नई दिल्ली| चीनी हर घर में हर रोज की जरूरत का अहम हिस्सा है। बीते कुछ महीने से चीनी की कीमत और आपूर्ति को लेकर चिंताएं देखी गई हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पिछले 1 महीने में खुदरा बाजारों में चीनी की कीमत में 17 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। अब चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए खास प्लान बनाया जा रहा है।

    कीमतों को कंट्रोल करने के लिए चीनी उद्योग ने बड़ा कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज (NFCSF) ने सरकार के साथ बातचीत के बाद गन्ना के क्रशिंग सीजन 2025-26 को सामान्य समय से 10 से 15 दिन पहले शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। बता दें कि आमतौर पर चीनी मिलों में गन्ना पेराई का समय 1 अक्तूबर से शुरू होता है।

    चीनी की जल्दी क्रेशिंग क्यों?

    सरकार और मिलों की ओर से लगातार दावा किया जा रहा है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई में किसी तरह की समस्या नहीं होगी। मौसम अनुकूल रहा तो पेराई सितंबर 15 सितंबर के बाद से शुरू हो सकती है। जल्दी क्रेशिंग का मकसद त्योहारी सीजन से पहले बाजार में नई चीनी को उतारना और मांग के अनुसार आपूर्ति बढ़ाना है। चीनी की पर्याप्त उपलब्धता से कीमतों को भी स्थिर रखना है।

    प्रोडक्शन कॉस्ट से भी कम रही चीनी की कीमत

    भारत सरकार ने चीनी की घरेलू मांग को पूरा करने और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए चीनी के एक्सपोर्ट को बैन कर दिया है, चीनी पर्याप्त उपलब्धता होने के बाद भी कीमतों में उछाल देखने को मिला है। ISMA और NFCSF ने मीडिया को जानकारी दी कि चालू चीनी सीजन में जून तक देशभर में एक्स-मिल चीनी का औसत भाव ₹39.5-40 प्रति किलोग्राम था जो प्रोडक्शन कॉस्ट से भी कम बताया गया। वहीं जुलाई के आखिरी तक औसत बिक्री भाव बढ़कर ₹40-₹40.5 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया, लेकिन यह भी करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम की उत्पादन लागत से नीचे है।

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    मिलों को भी मिले रियायत

    बीते दिनों केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा को लिखे गए एक संयुक्त पत्र में ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी और NFCSF के MD प्रकाश नाइकनवरे ने कहा कि समय से पहले क्रशिंग चालू करने का फैसला राष्ट्रीय हित में लिया गया है। इससे त्योहारों के दौरान कीमतें नियंत्रित रह सकती हैं। हालांकि संगठनों ने कुछ मोर्चों में सरकार से मदद की मांग की है।

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    उन्होंने कहा कि समय से पहले पेराई शुरू करने में गन्ने की उपज कम और चीनी की रिकवरी में भी गिरावट आएगी। उन्होंने लिखा कि ऐसा पर चीनी मिलों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, जिसकी भरपाई के लिए रिकवरी में होने वाले नुकसान के लिए उचित मुआवजा, अक्टूबर के चीनी उत्पादन के बराबर अतिरिक्त घरेलू चीनी बिक्री कोटा लागू किया जाए, इसके अलावा घरेलू चीनी बिक्री पर लगने वाले केंद्र को मिलने वाली CGST में छूट की भी मांग की है।