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नए सीजन में 2 महीने भी नहीं चलेगी चीनी? NFCSF के MD ने की स्टॉक का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग! सरकार के कड़े कदम

Updated: Fri, 14 Aug 2026 02:18 PM (IST)

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के एमडी प्रकाश नाइकनावारे ने सरकार से चीनी के मौजूदा स्टॉक का खुलासा करने की मांग की है, क्योंकि 30 सितंबर तक स्टॉक 35 लाख टन रहने की आशंका है जो नए सीजन के अगले दो महीने की मांग पूरी नहीं कर पाएगा।

NFCSF के MD ने की स्टॉक का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

 NFCSF के MD ने की स्टॉक का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

HighLights

  1. NFCSF एमडी ने चीनी स्टॉक सार्वजनिक करने की मांग की।

  2. 30 सितंबर तक 35 लाख टन चीनी स्टॉक रहने की आशंका।

  3. ओवरसेलिंग और कमी की आशंका से बढ़ी चीनी कीमतें।

नई दिल्ली | देश में चीनी का स्टॉक इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में चीनी की कीमतों में तेजी से उछाल भी देखने को मिला है। सरकार की ओर से घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। अब नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज के MD प्रकाश नाइकनावारे ने सरकार से चीनी के मौजूदा स्टॉक (Sugar stock) का खुलासा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सीजन के अंत में यानी 30 सितंबर तक चीनी का स्टॉक करीब 35 लाख टन रह जाने की आशंका है।

नए सीजन के 2 महीने तक नहीं चलेगी चीनी

NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रकाश नाइकनावरे ने कहा कि 15 दिन के फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद सरकार को चीनी के अनुमानित स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने ये मांग ऐसे समय में की है जब अटकलें लगाई जा रही हैं कि 30 सितंबर को मौजूदा सीजन के अंत तक चीनी का स्टॉक घटकर लगभग 35 लाख टन रह जाएगा, जो अगले सीजन के पहले दो महीनों (अक्टूबर-नवंबर) की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

स्टॉक सीमा लागू होने से घटे चीनी के दाम

नाइकनावारे ने मीडिया को बताया कि चीनी के स्टॉक की जानकारी सभी शेयरहोल्डर्स तक पहुंच चुकी है और आवंटित कोटे से अधिक चीनी बेची जा रही है। उन्होंने इन दोनों कारकों को चीनी की बढ़ती कीमतों का कारण माना है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि स्टॉक सीमा लागू होने के बाद थोक मूल्य लगभग ₹48 प्रति किलो से घटकर लगभग ₹46 प्रति किलो हो गया है।

ओवरसेलिंग से बढ़ी कीमतें

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चीनी की कीमतों में अचानक तेजी ने बाजार के साथ-साथ सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। NFCSF के मैनेजिंग डायरेक्टर के मुताबिक बाजार में चीनी की कमी की आशंका और सुपर अल नीनो के चलते गन्ने की पैदावार पर संभावित असर के साथ तय कोटे से ज्यादा बिक् होने के कारण तेजी से कीमतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि चीनी की कमी को लेकर उपभोक्ताओं, मिलों, किसानों, कारोबारियों और सरकार समेत सभी पक्षों में धारणा बन गई है। तय कोटे से ज्यादा चीनी बिकने से बाजार में असंतुलन पैदा हुआ है।

₹56 किलो तक पहुंची थी चीनी की कीमत

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के की मानें तो पिछले एक महीने में देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि थोक भाव भी 7 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इसके साथ ही दिल्ली-NCR और कुछ अन्य इलाकों में कीमतों में इससे कहीं ज्यादा तेजी आई है। यहां चीनी का भाव करीब ₹55-₹56 प्रति किलो तक पहुंच गया, जबकि एक महीने पहले यह ₹46-₹48 किलो थी। 12 अगस्त को दिल्ली में चीनी की औसत कीमत 49 रुपये किलो दर्ज की गई थी।

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नाइकनावरे ने इन बढ़ी कीमतों को सामान्य नहीं बताया है। हालांकि, आने वाले महीनों में कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन इतनी जल्दी तेजी आना बाजार के लिए सामान्य बात नहीं है।

सरकार ने कीमतें संतुलित रखने के लिए बनाया प्लान

घरेलू सप्लाई सामान्य रखने, कीमतों को कंट्रोल रखने, जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने कई ठोस कदम उठाए हैं। पहले ही निर्यात पर रोक लगा दी गई थी, जुलाई के आखिरी सप्लाह में सरकार ने चीनी के लिए स्टॉक लिमिट तय की जिसके बाद कोई व्यापारी या डीलर 4000 क्विंटल से अधिक का स्टॉक जमा नहीं कर सकता है।