भारत-बांग्लादेश व्यापार में फिर आई तकरार, पड़ोसी ने लौटाई चावल की खेप; व्यापारियों ने कहा- चुकानी होगी भारी कीमत!
भारत से भेजी गई 11,500 टन गैर-बासमती उबले चावल की खेप को बांग्लादेश ने गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिया है। इस घटना ने भारत ...और पढ़ें
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भारत-बांग्लादेश व्यापार में फिर बढ़ी मुश्किलें (AI Image)
HighLights
बांग्लादेश ने 11,500 टन भारतीय चावल की खेप लौटाई।
गुणवत्ता संबंधी मुद्दों पर विवाद, भारतीय व्यापारी चिंतित।
राजनीतिक चालबाजी और एकाधिकार का आरोप, व्यापार प्रभावित।
नई दिल्ली| भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक और निर्यातक देश है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारतीय चावल के चावल की बंपर डिमांड है। हालांकि पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भारतीय चावल (Indian Rice) की खेप को रिजेक्ट कर दिया है। भारत से आए 11,500 टन गैर-बासमती उबले चावल की खेप को बांग्लादेश द्वारा अस्वीकार किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है।
क्यों रिजेक्ट हुई भारतीय चावल की खेप?
21 जुलाई को बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह पर पहुंचे माल में गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए उबले चावल की खेपों को रिजेक्ट कर दिया गया। हालांकि, सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत भेजे गए इस माल से 22 जुलाई को लिए गए नमूनों को मानव उपभोग (Human Consumption) के लिए उपयुक्त पाया गया था।
ऑथेंटिफिकेशन के बाद, जहाज को माल उतारने की अनुमति दी गई। खेप का एक हिस्सा 23 और 24 जुलाई को उतारा गया। उतारे गए माल को तेजगांव, हलीशहर और दीवानहाट स्थित केंद्रीय भंडारण डिपो (CSD) में ले जाया गया। इसके अलावा, कुछ मात्रा जॉयदेबपुर के स्थानीय भंडारण डिपो में भी भेजी गई।
शिपिंग एजेंट ने क्वालिटी खराब होने से किया इंकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 जुलाई को तेजगांव और हलीशहर के अधिकारियों ने बताया कि चावल की गुणवत्ता घटिया है और वह मानव उपभोग के लिए उपयुक्त नहीं है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, खाद्य मंत्रालय के सचिव और खाद्य विभाग के महानिदेशक को गुणवत्ता संबंधी जानकारी दी गई थी। हालांकि, शिपिंग एजेंट ने चावल की गुणवत्ता खराब होने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि चावल का रंग "थोड़ा लाल" था।
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भारतीय एक्सपोर्टर्स ने जताई चिंता
यहां के व्यापारिक सूत्रों को आश्चर्य है कि बांग्लादेश को भारतीय चावल से अचानक समस्या क्यों हो रही है। एक व्यापारी ने कहा, “हम वर्षों से चावल की आपूर्ति कर रहे हैं। पिछले साल के अंत में, जब बांग्लादेश ने पाकिस्तान से चावल मंगवाया और उसे महंगा पाया, तो वह वापस हमारे पास आ गया। अब वे चालबाजी कर रहे हैं।”
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एक अन्य व्यापारी ने कहा कि इस तरह के “राजनीतिक” खेल कुछ समय तक चलते रहेंगे। “लेकिन अल नीनो वर्ष के दौरान, जिसके समस्या अब लंबे समय तक चलने का अनुमान है, बांग्लादेश को इस तरह की राजनीति की भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।”
रिपोर्ट्स के अनुसार, जहाज "एमवी एचटी पायनियर" से केवल 3,500 टन माल ही उतारा जा सका था और बाकी माल को उतारने की अनुमति नहीं दी गई थी।
कुछ एजेंसियों के कारण रिजेक्ट हुई खेपें
एक तीसरे व्यापारी ने मीडिया को बताया कि यह विवाद शेख हसीना सरकार के दौरान खाद्य विभाग में एकाधिकार रखने वाली कुछ एजेंसियों के कारण शुरू हुआ था। अब इस फर्म के विरोधियों ने एकाधिकार को समाप्त करने के लिए हाथ मिला लिया है, और भारतीय चावल अप्रत्यक्ष रूप से इसका शिकार हुआ है।