पाकिस्तान के पास किसानों के लिए भुगतान तक के पैसे नहीं? 6 लाख टन चीनी एक्सपोर्ट करने की लगाई गुहार!
पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन ने 6 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति मांगी है, जबकि भारत ने घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए निर्यात पर रोक लगा दी है। ...और पढ़ें
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पाकिस्तान मांग रहा 6 लाख टन शक्कर के निर्यात की मंजूरी
HighLights
पाकिस्तान ने 6 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति मांगी।
भारत ने घरेलू आपूर्ति संतुलन हेतु चीनी निर्यात रोका।
पाकिस्तानी मिलें कर्ज में, किसानों को भुगतान में कठिनाई।
नई दिल्ली| भारत ब्राजील और थाईलैंड के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक देश है। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भारत की मजबूत पकड़ है। भारत के मुकाबले पाकिस्तान इस लिस्ट में कहीं नहीं टिकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहां भारत टॉप 3 देशों में शामिल है तो वहीं पाकिस्तान 10वें स्थान पर है। हालांकि भारत ने इस साल चीनी के निर्यात (sugar export) पर रोक लगा दी है वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन (PSMA) ने करीब 6 लाख चीनी के निर्यात की मंजूरी देने की मांग की है। इसके पीछे क्या तर्क दिया, आइए जानते हैं।
पाकिस्तान में है पर्याप्त शक्कर का स्टॉक?
पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार PSMA ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि 15 जुलाई, 2026 तक देश में 34 लाख मीट्रिक टन चीनी का भंडार रहा, जिसका मिलान और सहमति वित्त मंत्रालय और चीनी उद्योग द्वारा की गई है, जबकि औसत मासिक खपत 567,426 मीट्रिक टन है। उन्होंने आगे कहा कि 15 नवंबर को नए पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत तक, देश में 1158 करोड़ मीट्रिक टन चीनी का भारी अधिशेष भंडार होगा।
कर्जे में हैं पाकिस्तानी मिलें
चीनी मिलों का कहना है कि निर्यात की मंजूरी मिलने पर पाकिस्तान को करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सकती है। उद्योग का तर्क है कि बड़ी मात्रा में स्टॉक जमा होने से मिलों पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा है और उन्हें किसानों के भुगतान और बैंक लोन चुकाने में कठिनाई हो रही है। एसोसिएशन का यह भी दावा है कि बेहतर गन्ना भुगतान के कारण किसानों ने उन्नत किस्मों की खेती बढ़ाई है, जिससे आगामी सीजन में करीब 80 लाख टन चीनी उत्पादन होने की उम्मीद है। ऐसे में अधिशेष स्टॉक और बढ़ सकता है।
पिछली गलती से सबक ले रहा पाकिस्तान
पाकिस्तानी मीडिया की मानें तो पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर सतर्क रुख अपनाए हुए है। कैबिनेट समिति ने हाल ही में चीनी के निर्यात प्रस्ताव पर फैसला टाल दिया है। सरकार को आशंका है कि निर्यात की अनुमति मिलने पर घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं, जैसा कि पिछले वर्ष निर्यात मंजूरी के बाद देखने को मिला था।
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भारत ने लगाया निर्यात पर बैन
पाकिस्तान के मुकाबले भारत का चीनी उद्योग बहुत आगे है। हम दुनिया के बड़े निर्यातकों में शामिल हैं, जिसके चलते ग्लोबल मार्केट में भारत का दबदबा है। हालांकि भारत ने अलनीनो के प्रभाव के दौरान घरेलू आपूर्ति बनाए रखने और चीनी की कीमतों को संतुलित रखने के लिए निर्यात पर रोक लगा दी है। वहीं पाकिस्तान किसानों के भुगतान और लोन चुकाने के लिए अतिरिक्त निर्यात की मंजूरी मांग रहा है।