चीनी की मिठास सिर्फ थोक बाजार तक सीमित! ₹5200 क्विटंल पर आ गई शुगर, लेकिन अब भी क्यों कट रही आपकी जेब?
Sugar Price: थोक बाजार में चीनी की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जो रिकॉर्ड ऊंचाई से 20% तक नीचे ...और पढ़ें

₹5200 क्विटंल पर आ गई शुगर!
HighLights
थोक बाजार में चीनी के दाम 20% गिरे।
मुंबई में चीनी ₹6750 से ₹5200 प्रति क्विंटल हुई।
खुदरा बाजार में चीनी अभी भी ₹64.24 प्रति किलो।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से ठीक पहले चीनी (Sugar) के बाजार से एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। थोक बाजार (Sugar Wholesale market) में चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है और यह रिकॉर्ड ऊंचाई से धड़ाम होकर नीचे आ गई है। लेकिन विडंबना यह है कि इस गिरावट का फायदा आम जनता (Retail consumer) को अभी तक नहीं मिल पा रहा है और रिटेल बाजार में भाव अब भी आसमान छू रहे हैं।
थोक बाजार में गिरे दाम
हाल ही में चीनी के एक्स-मिल दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गए थे, लेकिन सरकार की सख्ती और सप्लाई सुधरने के बाद कीमतों में लगभग 20% का बड़ा करेक्शन देखा गया है। आइए जानते है कि कितने दाम गिरे हैं।
बता दें कि मुंबई में 22 अगस्त को मुंबई में 1 क्विंटल (100 किलो) चीनी का भाव ₹6750 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। अब 2 सितंबर तक यह गिरकर सीधे ₹5200 प्रति क्विटंल पर आ गया है। वहीं दिल्ली के थोक बाजार में 22 अगस्त को चीनी आपने ऑल-टाइम हाई ₹6600 प्रति क्विंटल पर बिक रही थी, जो 2 सितंबर को गिरकर ₹5700 प्रति क्विंटल पर आ गई है।
देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों (UP, महाराष्ट्र और कर्नाटक) में भी फैक्ट्री की कीमतें गिरकर ₹5100 से ₹5300 प्रति क्विटंल के बीच आ गई है।
आम आदमी को क्यों राहत नहीं?
थोक बाजार में भले ही चीनी ₹51- ₹52 प्रति किलो के स्तर पर आ गई हो, लेकिन खुदरा बाजार में दुकानदार अभी भी पुरानी और ऊंची कीमतों पर ही चीनी बेच रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में चीनी की औसत रिटेल कीमत अभी भी ₹64.24 किलो पर बनी हुई है। महानगरों की बात करें तो खुदरा बाजार में चीनी मुंबई में ₹66, दिल्ली में ₹62 और रांची जैसे शहरों में ₹68 किलो तक बिक रही है।
थोक मार्केट में क्यों आई गिरावट?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक, थोक कीमतों में आई इस तेज गिरावट के पीछे सरकार द्वारा जमाखोरी (Hoarding) पर लगाई गई लगाम और बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाना मुख्य कारण है। इसके अलावा मिलों से नई खेप बाजार में पहुंचने लगी है, जिससे सप्लाई का दबाव कम हुआ है।
