1 महीने में तेजी से बढ़ गए सब्जियों के भाव, 15 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ी कीमत
पश्चिमी एशिया में संघर्ष और अल नीनो के कारण सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आया है, मई में 8 प्रमुख सब्जियों के दाम तेजी से बढ़े हैं। दिल्ली में नींब ...और पढ़ें

सब्जियों की कीमत में तेज उछाल
HighLights
मई में 8 प्रमुख सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल।
दिल्ली में कई सब्जियों के दाम 15-60 रुपये/किलो बढ़े।
अल नीनो और कमजोर मानसून से महंगाई बढ़ने की आशंका।
नई दिल्ली| पश्चिमी एशिया में जारी संघर्ष के बीच फ्यूल और गैस की महंगाई का सामना आप सबने किया होगा। लेकिन हमारे और आपके घर में हर रोज की जरूरत सब्जियों की कीमत में भी काफी तेज उछाल आया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अलनीनो के चलते सामान्य से कम मानसून की संभावना से सब्जियों की कीमतें और भी बढ़ सकती हैं। आंकड़ों के अनुसार मई महीने में 17 प्रमुख सब्जियों में से 8 सब्जियों की कीमत काफी तेजी से बढ़ी है। सबसे अधिक महंगाई टमाटर में देखी गई है।
मई में कंद-मूल, केले और दालों सहित सब्जियों के समूह की महंगाई दर अप्रैल के 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गई। यह खाद्य मुद्रास्फीति (4.78 प्रतिशत) और खुदरा महंगाई दर (3.93 प्रतिशत) दोनों से अधिक है।
दिल्ली में सब्जियां कितनी महंगी?
दिल्ली के खुदरा बाजारों में मई से जून के बीच नींबू, हरी मटर, बैंगन, गाजर, पत्ता गोभी, हरी मिर्च और फ्रेंच बीन्स जैसी सब्जियों के दाम 15 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़े हैं।
आमतौर पर जून-सितंबर के मानसून से पहले सब्जियों की नर्सरी तैयार कर ली जाती है, लेकिन इस बार मानसून की धीमी प्रगति और अधिक तापमान के कारण पौधों की रोपाई प्रभावित हुई है। इससे आने वाले महीनों में सब्जियों की कीमत बढ़ने के साथ ही उपलब्धता में भी कमी हो सकती है।
सब्जियां और खाद्य तेल हो सकते हैं महंगे
HDFC Bank के एक नोट के अनुसार मई में खाद्य और पेय पदार्थों की महंगाई मासिक आधार पर 0.9 प्रतिशत बढ़ी, जबकि अप्रैल में यह बढ़ोतरी केवल 0.2 प्रतिशत थी। यदि सब्जियों की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो खाद्य महंगाई पर और दबाव पड़ सकता है। बिजनेसलाइन के मुताबिक केयरएज की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि पिछले अल नीनो वर्षों की तुलना में खाद्यान्न का बफर स्टॉक इस बार अधिक मजबूत है, लेकिन खाद्य पदार्थों, विशेष रूप से सब्जियों, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि का दबाव देखा जा सकता है।
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अलनीनो का क्या असर होगा?
अलनीनो के कारण इस बार मानसून की बारिश सामान्य से 43 फीसदी कम होने का अनुमान है। इससे खरीफ वाली फसलें प्रभावित होंगी। हालांकि हॉर्टिकल्चर साइंटिस्टों के मुताबिक मानसून में कमी के कारण फलों की खेती पर बुरा असर नहीं होगा। लेकिन सब्जी फसलें इससे प्रभावित होंगी।