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    West Asia War: भारत में तेजी से बढ़ने लगे ईरानी ड्राईफ्रूट्स के दाम, ₹5 हजार करोड़ के पिस्ता बाजार की टूटी सप्लाई चेन

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 04:37 PM (IST)

    पश्चिमी एशिया युद्ध के कारण ईरान से आने वाले पिस्ता और खजूर जैसे सूखे मेवों की कीमतों में 10-20% की वृद्धि हुई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और आ ...और पढ़ें

    ईरानी पिस्ता और खजूर की कीमत में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी (AI Image)

    ईरानी पिस्ता और खजूर की कीमत में 10-20 फीसदी की बढ़ोतरी (AI Image)

    HighLights

    1. ईरानी पिस्ता और खजूर के दाम 10-20% बढ़े।

    2. हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से आपूर्ति श्रृंखला बाधित।

    3. भारत में 5,000 करोड़ के पिस्ता बाजार पर असर।

    नई दिल्ली| पश्चिमी एशिया के युद्ध का असर अब केवल क्रूड ऑयल और गैस तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि खाने-पीने पर भी देखा जाने लगा है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के बंद होने से दुनिया के कई देशों में सप्लाई चेन पर गहरा असर देखा गया है। सप्लाई चेन प्रभावित होने से ईरानी पिस्ता और खजूर जैसे ड्राईफ्रूट्स की कीमतों में 10-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

    ईरान है ग्लोबल सप्लायर

    भारत के नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल के उपाध्यक्ष राहुल कामथ ने मिडिया से बात करते हुए बताया कि ईरान पिस्ता और खजूर जैसे सूखे मेवों का ग्लोबल सप्लायर है। अभी ईरान में जारी संघर्ष के कारण इनकी उपलब्धता में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आई है।

    उन्होंने कहा कि भारत में पिस्ता का बाजार लगभग 5,000 करोड़ रुपये का है, जबकि खजूर का बाजार लगभग 3,000 करोड़ रुपये का है। हमारे यहां ईरानी उत्पादों को खूब पसंद किया जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि अभी ड्राईफ्रट्स की बंपर डिमांड का सीजन नहीं है इसलिए मामला कुछ हद तक ठीक है।

    तस्करी की भी खबरें आई सामने

    मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण ईरानी ड्राईफ्रूट्स की सप्लाई में भी दिक्कतें आई हैं, ऐसे में कई कुछ जगहों पर छोटे स्तर पर ड्राई फ्रूट्स की तस्करी की खबरें भी सामने आई हैं, हालांकि ये रास्ता जोखिम भरा है, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे इलाकों में कड़ी निगरानी के कारण ऐसा करना आसान नहीं है। वहीं दूसरी ओर ईरान की तरफ से निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों ने भी भारत और यूरोपियन मार्केट में कमी को और बढ़ा दिया है।

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    तेजी से बढ़ रहा ड्राईफ्रूट्स मार्केट

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दुनियाभर में सूखे मेवों का बाजार लगातार बढ़ रहा है और 2026 तक इसके 11.06 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। प्रीमियम और हेल्थ बेनेफिट्स के चलते स्नैक्स की मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन जियो पॉलिटिक्स के कारण सप्लाई चेन वर्तमान में दबाव में हैं। वहीं दूसरी ओर भारत में काजू का थोक भाव लगभग ₹12,800 प्रति क्विंटल है। ट्रांस्पोर्टिंग चार्ज बढ़ने और मानसून के कमजोर रहने की आशंकाओं के चलते आने वाले महीनों में W240 और W320 जैसी लोकप्रिय किस्मों के दाम बढ़ सकते हैं।

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