Gold Silver Outlook: टूटने वाला है चांदी का गुब्बारा? सोने-चांदी पर वर्ल्ड बैंक की भविष्यवाणी; 2026-27, 2028 के दिए टारगेट
Gold Silver Price Outlook 2027: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के बाद सोने-चांदी में विस्फोटक तेजी नहीं दिखेगी, ...और पढ़ें

Gold Silver Outlook: टूटने वाला है चांदी का गुब्बारा? सोने-चांदी पर वर्ल्ड बैंक की भविष्यवाणी; 2026-27, 2028 के दिए टारगेट

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अगर आप गोल्ड-सिल्वर में पैसा लगाने की सोच रहे हैं या पैसा लगा रखा है, तो वर्ल्ड बैंक की यह ताजा रिपोर्ट आपके लिए है। वर्ल्ड बैंक के 'कमोडिटी मार्केट्स आउटलुक' के मुताबिक, साल 2026 की तरह अब गोल्ड-सिल्वर में वैसी ताबड़तोड़ और विस्फोटक तेजी देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन इसके बावजूद इनकी कीमतें ऐतिहासिक रूप से काफी ऊंचे स्तर पर बनी रहेंगी।
कॉमेक्स और MCX पर क्या हैं ताजा रेट?
ग्लोबल मार्केट में आज सोने और चांदी, दोनों ही धातुओं के दाम गिर (gold silver price crash) गए। कॉमेक्स पर सोना 1.44% गिरकर 4054 डॉलर प्रति औंस (gold rate today) पर कारोबार करता दिखा। गोल्ड 59 डॉलर से ज्यादा टूट गया। चांदीी में 1.74% की गिरावट दर्ज हुई और कीमत 52 डॉलर से नीचे करती दिखी।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 2356 रुपए सस्ता हो गया। कीमत 1.65% गिरकर 1,41,739 रुपए (gold price today) प्रति 10 ग्राम हो गई। चांदी में 1.83% गिरावट दर्ज हुई और कीमत 3424 रुपए गिरकर 1,83,716 रुपए (silver rate today) प्रति किलोग्राम हो गई।
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2028 तक कहां रहेगा सोने का भाव?
वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि इस साल सोना औसतन 4,600 डॉलर प्रति औंस (भारतीय करेंसी में करीब 1.40 लाख रुपए) रहेगा, जो साल 2025 के मुकाबले 33.6% ज्यादा है। हालांकि, बैंक ने यह भी अनुमान जताया है कि 2027 में सोने की कीमतों में हल्की नरमी आएगी और यह 7.6% घटकर औसतन 4,250 डॉलर प्रति औंस (gold price outlook 2027) पर आ जाएगा।
इसके बाद 2028 में इसमें 5.9% की और गिरावट आ सकती है और कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस (silver price outlook 2028) तक रह सकती है। यानी राहत की बात यह है कि तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद 2028 तक सोना 4,000 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के ऊपर ही मजबूत बना रहेगा।
चांदी को लग सकता है तगड़ा झटका
इसके मुकाबले चांदी के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग और ज्यादा चुनौतीपूर्ण है। इस साल चांदी ने सोने से बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन आने वाले समय में इसे एक तीखे और बड़े करेक्शन का सामना करना पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में चांदी औसतन 70 डॉलर प्रति औंस (करीब 76% की सालाना बढ़त) पर रहने के बाद, 2027 में 11% से ज्यादा लुढ़ककर 62 डॉलर और 2028 में गिरकर 58 डॉलर प्रति औंस पर आ जाएगी।
बाजार पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?
कीमती धातुओं में हाल ही में आई सुस्ती के पीछे कई बड़े मैक्रो-इकोनॉमिक कारण हैं। हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते बॉन्ड यील्ड्स के कारण निवेशकों का सेंटिमेंट प्रभावित हुआ है, जिसके चलते तीसरी तिमाही में सोना 5% और चांदी 14% तक टूट गई थी। इसके अलावा, ऊंचे दामों के कारण पिछले कुछ सालों से ज्वैलरी की मांग में भारी कमी आई है और आगे भी इसके कमजोर बने रहने की आशंका है।
किन बातों से मिलेगा सपोर्ट?
इन तमाम दबावों के बावजूद, दोनों धातुओं के बुनियादी फंडामेंटल्स अभी भी काफी मजबूत हैं। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितताएं निवेशकों को सेफ हेवन की ओर खींच रही हैं।
इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों की ताबड़तोड़ खरीदारी और निवेश की मांग, जो 2026 की पहली छमाही में वैश्विक सोने की कुल मांग का लगभग आधा हिस्सा थी, कीमतों को नीचे गिरने से बड़ा सहारा दे रही है। सेंट्रल बैंकों ने एक बार फिर सोने की खरीदारी बढ़ानी शुरू कर दी है।
चांदी के मोर्चे पर औद्योगिक मांग एक अहम फैक्टर है। हालांकि सोलर एनर्जी सेक्टर में मैन्युफैक्चरर्स अब चांदी की जगह कॉपर के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर्स और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री से मिलने वाली लगातार मांग चांदी के बाजार को संभाले रखेगी।
वर्ल्ड बैंक का मानना है कि भले ही आने वाले दो सालों में कीमतों में कुछ करेक्शन देखने को मिले, लेकिन कीमतें 2015-2019 के औसत स्तर से अभी भी तीन गुना से ज्यादा ऊपर ही रहेंगी।
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