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    MSMEs को विदेशी बाजारों तक पहुंचाने के लिए DGFT का बड़ा कदम, ई-कामर्स बिक्री को लेकर गाइडलाइंस में हुआ बड़ा बदलाव!

    By Rajeev KumarEdited By: Nayan Tiwari
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:38 PM (IST)

    विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने विदेशी निवेश वाली इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों से MSMEs को वैश ...और पढ़ें

    DGFT मे ई-कॉमर्स को लेकर नई गाइडलाइन जारी की

    DGFT मे ई-कॉमर्स को लेकर नई गाइडलाइन जारी की

    HighLights

    1. डीजीएफटी ने इन्वेंट्री आधारित ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए गाइडलाइंस जारी कीं।

    2. कंपनियों को एक्सपोर्टर ऑन रिकॉर्ड के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।

    3. एमएसएमई को इन नियमों से विदेशी बाजार तक पहुंच मिलेगी।

    नई दिल्ली। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने बुधवार को विदेशी निवेश वाली इंवेंटरी आधारित ई-कामर्स एक्सपोर्टर्स कंपनियों के लिए अधिसूचना जारी कर दिया है। पिछले महीने उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियम से संबंधित प्रेस नोट-3 में बदलाव करते हुए इंवेंटरी रखने वाली ई-कामर्स कंपनी को सिर्फ निर्यात करने पर 100 प्रतिशत FDI की इजाजत दे दी थी। अब डीजीएफटी ने इंवेंटरी रखने वाली ई-कामर्स निर्यातक कंपनी की विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दिया गया है।

    नई गाइडलाइन में बदल जाएंगी ये चीजें

    नई गाइडलाइंस के तहत इन ई-कामर्स कंपनियों को एक्सपोर्टर आन रिकार्ड (EOR) के रूप में पंजीकृत होना होगा। फिर वे पुष्ट निर्यात आर्डर के आधार पर भारतीय उत्पादक से वस्तुओं की खरीदारी कर पाएंगे और उसका निर्यात कर सकेंगे। निर्यात मिलने के अनुमान के आधार पर कोई खरीदारी नहीं कर सकेंगे। उनके पास वैध आर्डर होने चाहिए। घरेलू स्तर पर बिक्री करने के लिए भी इस प्रकार की ई-कामर्स कंपनियां खरीदारी नहीं कर सकेंगी। निर्यात संबंधी सभी शर्तों को पूरा करना EOR की जिम्मेदारी होगी।

    MSME को मिलेगा विदेशी बाजार

    ई-कामर्स के माध्यम से निर्यात किए जाने वाले माल अगर लौटा दिए जाते हैं तो उस माल को घरेलू बाजार में नहीं बेचा जा सकेगा। उसे फिर से निर्यात ही करना होगा। सरकार का मानना है कि इंवेंटरी आधारित निर्यात करने वाली ई-कामर्स कंपनी में एफडीआई की इजाजत देने से देश के MSMEs को बड़ा लाभ मिलेगा। इन कंपनियों के माध्यम से MSME के माल को विदेश का बाजार मिलेगा।

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    ई-कामर्स एक्सपोर्ट में भारत काफी पीछे

    वर्तमान में ई-कामर्स के माध्यम से भारत का निर्यात मात्र दो अरब डालर का है जबकि वैश्विक स्तर पर ई-कामर्स के माध्यम से 800 अरब डालर का निर्यात किया जाता है। चीन ई-कामर्स के जरिए सालाना 350 अरब डालर का निर्यात करता है। वर्ष 2030 तक ई-कामर्स के माध्यम से निर्यात का वैश्विक बाजार दो लाख करोड़ डालर तक होने का अनुमान है।

     

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