छोटे व्यापारियों को भरना होगा सिर्फ 1% GST, Online भी बेच सकेंगे सामान; क्या है Composition Scheme, रेगुलर GST से कैसे अलग?
GST Syestem में छोटे व्यापारियों के लिए कंपोजिशन स्कीम एक सरल विकल्प है, और इससे राज्य के भीतर ऑनलाइन बिक्री भी कर सकते हैं। ...और पढ़ें

Composition Scheme से छोटे व्यापारियों को फायदा
HighLights
छोटे व्यापारियों के लिए कंपोजिशन स्कीम, 40 लाख तक टर्नओवर।
1% जीएसटी दर, राज्य के भीतर ऑनलाइन बिक्री संभव।
इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं, लेकिन रिटर्न फाइलिंग आसान।
नई दिल्ली| अगर आप व्यापारी हैं तो GST जरूर भरते होंगे। ये आपकी वित्तीय स्थिति में पारदर्शिता का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है। कई बार कुछ व्यापारी टैक्स भरने से बचने के लिए GST के तहत रजिस्टर्ड नहीं होते जो कि कहीं ना कहीं व्यापार में समस्या खड़ी कर सकता है। आज आपको Composition Scheme और Regular GST के बारे में बताने जा रहे हैं जो GST सिस्टम का हिस्सा हैं। इसके भीतर व्यापारियों को कई रियायतें देने की व्यवस्था है, आइए आसानी से समझते हैं।
क्या है Composition स्कीम?
कंपोज़िशन स्कीम मुख्य रूप से उन छोटे व्यवसायों के लिए है जिनका सालाना टर्नओवर निर्धारित सीमा (₹40 लाख) के भीतर है। इस योजना में ट्रेडर्स 1%, मैन्युफैक्चरर्स 2% और रेस्टोरेंट जैसे सर्विस सेक्टर 5% की दर से टैक्स चुकाते हैं। हालांकि वे ग्राहकों से अलग से GST नहीं वसूल सकते और उन्हें Input Tax Credit का लाभ भी नहीं मिलता।
रेगुलर GST क्या है?
रेगुलर जीएसटी आमतौर पर उन कारोबारियों के लिए है, जिनका सालाना टर्नओवर ₹40 से अधिक है। इसमें कारोबारियों को ट्रेडिंग या सर्विस के अनुसार 5%, 18% या 40% की दर से GST देना होता है। इसके बदले उन्हें Input Tax Credit मिलता है और वे ग्राहकों से GST भी वसूल सकते हैं।
कंपोजिशन स्कीम और रेगुलर GST में अंतर
रिटर्न फाइलिंग की बात करें तो Composition Scheme में करदाता को हर तिमाही CMP-08 और साल में एक बार GSTR-4 दाखिल करना होता है। दूसरी ओर Regular GST में सामान्यतः GSTR-1 और GSTR-3B जैसी रिटर्न नियमित रूप से दाखिल करनी पड़ती हैं। सबसे बड़ा अंतर कारोबार के दायरे में है।
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Composition Scheme अपनाने वाला कारोबारी दूसरे राज्यों में बिक्री नहीं कर सकता। इंटर-स्टेट सप्लाई करने पर उसकी इस योजना की पात्रता समाप्त हो जाती है।
E-कॉमर्स में हो सकते हैं रजिस्टर्ड?
ई-कॉमर्स को लेकर भी नियम अलग-अलग हैं। हालांकि कंपोजिशन स्कीम के तहत टैक्स भरने वाले अब कुछ शर्तों के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेच सकते हैं, लेकिन ऐसी बिक्री केवल राज्य के भीतर ही हो सकती है। इंटर-स्टेट ई-कॉमर्स बिक्री की अनुमति नहीं है।