अब झटपट करना होगा व्यापारियों का पेमेंट, मानसून सत्र में पेश हो सकता है MSME विकास बिल!
सरकार मानसून सत्र में MSME विकास (संशोधित) बिल 2026 पेश कर सकती है, जिसका उद्देश्य MSME की आधुनिक जरूरतों को पूरा करना है। इस बिल में MSME को 45 दिनों ...और पढ़ें

MSMEs के लिए पेश हो सकता है बिल
HighLights
मानसून सत्र में MSME विकास (संशोधित) बिल 2026 पेश होगा।
MSME को 45 दिन में भुगतान करना अनिवार्य होगा।
कारोबारी नियमों को सरल कर राज्यों को अधिकार मिलेंगे।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली| MSME की आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सरकार मानसून सत्र में MSME विकास (संशोधित) बिल 2026 पेश कर सकती है। साल 2006 में MSME विकास बिल को पारित कराया गया था। बीस सालों के दौरान MSME की जरूरतें बदल गई हैं, कारोबार करने का तरीका बदल गया है और उनके प्रतिस्पर्धा का दायरा भी बढ़ गया है। इसे ध्यान में रखते हुए यह संशोधित बिल लाया जा रहा है।
45 दिन में करना होगा भुगतान
सूत्रों के मुताबिक संशोधित बिल में MSME के भुगतान को लेकर नियम को और उनके पक्ष में बनाए जाने की बात है। अभी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों से खरीदारी करने वालों को उन्हें अधिकतम 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का प्रविधान है। इसके बावजूद लाखों की संख्या में ऐसे MSME है जिन्हें उनके खरीदारों की ओर से 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं मिलता है। इस प्रकार की शिकायत के लिए MSME मंत्रालय ने एक पोर्टल बनाया हुआ है जहां रोजाना सैकड़ों ऐसी शिकायतें दर्ज होती है।
कारोबारी नियमों भी हो सकता है बदलाव
आपसी बातचीत के जरिए रोजाना सैकड़ों शिकायतों का निपटान भी हो रहा है, लेकिन भुगतान संबंधित एक लाख से अधिक शिकायत लंबित है। भुगतान में देरी होने से एमएसएमई को कार्यशील पूंजी की कमी हो जाती है जिससे वे नए आर्डर नहीं ले पाते हैं।
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सूत्रों का कहना है कि MSME के लिए कारोबारी नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं। अब भी सैकड़ों ऐसे नियम है जिनके कारण उद्यमियों को कारोबार शुरू करने से पहले काफी दौड़ना पड़ता है। इस प्रकार के नियमों को भी संशोधित बिल के तहत समाप्त किया जा सकता है।
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राज्यों को दिया जा सकता है अधिकार
एसएसएमई के विकास को लेकर राज्यों को भी अलग से अधिकार देने का प्रस्ताव संशोधित बिल में लाया जा सकता है। देश के जीडीपी में 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी MSME की है और लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्यात में है। कारोबार को आसान बनाने से निर्यात लागत कम हो सकती है।