सर्च करे
Home
फोकस

Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    कभी सोचा है...साल में 12 महीने, लेकिन 11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट? 7 सवालों में समझें फायदे वाली बात

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 07:15 PM (IST)

    यह लेख बताता है कि भारत में रेंट एग्रीमेंट आमतौर पर 12 महीने के बजाय 11 महीने के क्यों बनाए जाते हैं, जिसमें कानूनी प्रावधानों और मकान मालिक-किरायेदार ...और पढ़ें

    कभी सोचा है...साल में 12 महीने, लेकिन 11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट? 7 सवालों में समझें फायदे वाली बात (AI Generated Image)

    कभी सोचा है...साल में 12 महीने, लेकिन 11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट? 7 सवालों में समझें फायदे वाली बात (AI Generated Image)

    HighLights

    1. 11 महीने का एग्रीमेंट रजिस्ट्रेशन एक्ट से बचाता है।

    2. नोटरी एग्रीमेंट कानूनी रूप से पूरी तरह वैध होता है।

    3. यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों के पैसे बचाता है।

    नई दिल्ली। क्या आप भी किराए के घर में रहते हैं, और पूरे 12 महीने का रेंट देते हैं? क्या आपने कभी सोचा है कि जिस घर में रहते हैं वहां का एग्रीमेंट आपने 11 महीनों का क्यों बनवा रखा है? क्या 11 महीने का एग्रीमेंट देख कर आपको भी डर लगता है कि कहीं एग्रीमेंट खत्म होने के बाद घर न खाली करना पड़ जाए? अगर ये सारे सवाल भी आपके मन में आते हैं, तो ये खबर आपके लिए है।

    जब भी अपने लिए किराए का घर फाइनल करते हैं, तो बात पक्की होते ही मकान मालिक आपसे रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए कहता है। और अगर इस बात पर गौर करें तो रेंट एग्रीमेंट भी 11 महीने का बनता है, जबकि शायद आपका प्लान उससे ज्यादा का रहने का हो। तो आइए जानते हैं कि जब साल में 12 महीने होते हैं तो फिर देशभर में रेंट एग्रीमेंट 11 महीने के क्यों बनाए जाते हैं।

    1. घर किराए पर लेने के लिए क्यों जरूरी है एग्रीमेंट?

    रेंट एग्रीमेंट एक लीगल डॉक्यूमेंट है, जो मकान मालिक और किराएदार के बीच किया जाता है। इस एग्रीमेंट में हर महीने का किराया, मकान में रहने की जरूरी शर्तें और उस मकान में मिलने वाली सुविधाएं लिखी हुई होती है। रेंट एग्रीमेंट इसलिए भी जरूरी होता है ताकि मकाल मालिक को पता है कि जिसे वो अपना मकान दे रहा है वो इसका इस्तेमाल किसी गलत तरीके से तो नहीं करेगा, साथ ही अगर आगे चलकर कोई लड़ाई-झगड़ा होता है तो वो इस एग्रीमेंट के जरिए मामला सुलझा सकें।


    2.11 महीने का ही क्यों होता है रेंट एग्रीमेंट?

    भारतीय कानून के मुताबिक (रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908), अगर कोई रेंट एग्रीमेंट 12 महीने या उससे ज़्यादा समय के लिए बनाया जाता है, तो उसे सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर रजिस्टर्ड कराना कानूनी रूप से ज़रूरी हो जाता है। और जब भी सब-रजिस्ट्रार ऑफिस कोई भी एग्रीमेंट बनवाया जाता है, तो उसके लिए मोटी स्टाम ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस भी देनी पड़ती है। ऐसे में 11 महीने का एग्रीमेंट बनाकर मकान मालिक और किरायेदार दोनों इस बड़े और फालतू के खर्च से आसानी से बच जाते हैं।

    खबरें और भी


    3. कितने रुपए में बन जाता है 11 महीनें का एग्रीमेंट?

    11 महीने का एग्रीमेंट नोटरी (Notary) के ज़रिए या सिर्फ ₹100-₹500 के स्टांप पेपर पर आसानी से बन जाता है। इसके लिए किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही लंबी लाइनों में लगना पड़ता है। ये तरीका मकान मालिक और किरायेदार, दोनों के लिए बेहद आसान और पैसा बचाने वाला होता है।

    4. 11 महीने वाला रेंट एग्रीमेंट कितना वैध है?

    कई लोगों को लगता है कि 11 महीने का एग्रीमेंट सरकारी दफ्तर में रजिस्टर्ड नहीं है, तो इसकी कोई वैल्यू नहीं होगी। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है! कानून की नज़र में 11 महीने का नोटरी एग्रीमेंट भी पूरी तरह से वैलिड होता है। अगर कल को किरायेदार और मकान मालिक के बीच कोई विवाद या लड़ाई-झगड़ा होता है, तो इसे कोर्ट में सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है।

    5. क्या सिर्फ 11 महीने का बनता है रेंट एग्रीमेंट?

    ऐसा कहना गलत है कि रेंट एग्रीमेंट सिर्फ 11 महीने का होता है। आप चाहें तो 12 महीने, 24 महीने या उससे ज्यादा का भी रेंट एग्रीमेंट बढ़वा सकते हैं, बस आपको इसके लिए अलग से मेहनत करनी होगी और जितनी स्टाम ड्यूटी और फीस लगेगी, वो देनी पड़ेगी।

    6. रेंट एग्रीमेंट खत्म होने के बाद छोड़ना पड़ता है घर?

    ऐसा नहीं है कि 11 महीने पूरे होने के बाद आपको घर छोड़ना पड़ता है। मकान मालिक या आप रेंट एग्रीमेंट फिर से रिन्यू करवा सकत हैं और अगर आपका उस घर में रहने का मन नहीं है तो आप उस घर को छोड़ सकते हैं।

    7. 11 महीने बाद किराया कितना बढ़ सकता है?

    ऐसा जरूरी नहीं है कि हर 11 महीने में किराया बढ़ाना पड़ता है। राज्य के रेंट कंट्रोल और एग्रीमेंट में दी गई शर्तों पर ये निर्भर करता है कि आपका किराया 11 महीने में बढ़ेगा या फिर नहीं। आमतौर पर 8-10% की बढ़ोतरी का नियम होता है, ताकि किराएदार पर बोझ न पड़े। कुछ एग्रीमेंट में फिक्स बढ़ोतरी लिखी होती है, तो कुछ में कानूनी सीमा का पालन होता है। कोई न्यूनतम बढ़ोतरी का नियम नहीं है, लेकिन मकान मालिक आमतौर पर महंगाई और बाजार के हिसाब से किराया बढ़ाते हैं।

    ये भी पढ़ें: PPF Calculator: हर साल इतने का निवेश और आपके पास तैयार हो जाएगा ₹1.5 करोड़ का फंड, यहां समझें पूरा कैलकुलेशन