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EPFO Vishwas 2026: PF कंट्रीब्यूशन में देरी पर डैमेज चार्ज होगा माफ, कर्मचारियों के खाते में आएगी रुकी हुई रकम!

Published: Mon, 07 Sep 2026 11:34 AM (IST)

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ योगदान में देरी पर लगने वाले जुर्माने में राहत देने के लिए 'विश्वास 2026' योजना शुरू की है।

पीएफ कंट्रीब्यूशन में देरी पर डैमेज चार्ज होगा माफ!

पीएफ कंट्रीब्यूशन में देरी पर डैमेज चार्ज होगा माफ!

HighLights

  1. EPFO ने 'विश्वास 2026' एमनेस्टी योजना शुरू की।

  2. पीएफ योगदान में देरी पर लगने वाले जुर्माने में कमी।

  3. योजना 28 दिसंबर 2026 तक, सीमित समय।

बिजनेस डेस्क,नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने उन कंपनियों और नियोक्ताओं (Employers) को एक बहुत बड़ी राहत दी है, जिनसे कर्मचारियों के पीएफ (PF) योगदान को समय पर जमा करने में चूक हो गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, EPFO ने विश्वास 2026 (Vishwas 2026 scheme) नाम से एक नई एमनेस्टी योजना पेश की है, जो पीएफ में देरी पर लगने वाले जुर्माने को लेकर है।

सबसे खास बात यह है कि यह योजना सीमित अवधि के लिए है। विश्वास 2026 योजना 28 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी और EPFO ने साफ किया है कि इसके बाद इसकी समयसीमा नहीं बढ़ाई जाएगी। ऐसे में पात्र संस्थानों के पास पुराने PF डैमेज मामलों को कम राशि में निपटाने का सीमित मौका है।

कितना कम हो सकता है PF डैमेज?

PF योगदान जमा करने में देरी होने पर मौजूद नियमों के तहत नियोक्ता पर डैमेज लगाया जाता है। लेकिन विश्वास 2026 के तहत देरी की अवधि के हिसाब से कम दर पर डैमेज की गणना की जाएगी।

* 2 महीने तक की देरी: 0.25% प्रति माह
* 2 महीने से ज्यादा और 4 महीने तक: 0.50% प्रति माह
* 4 महीने से ज्यादा की देरी: 1% प्रति माह

यानी देरी जितनी कम होगी, इस योजना के तहत लागू डैमेज दर भी उतनी कम रहेगी।

किन पुराने मामलों पर मिलेगा फायदा?

विश्वास 2026 के तहत ऐसे मामलों को शामिल किया जा सकता है, जिनमें 14 जून 2024 से पहले PF योगदान जमा करने में देरी हुई थी। हालांकि, केवल पुराना मामला होना पर्याप्त नहीं है। संबंधित संस्थान को योजना में तय पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा।

योजना के दायरे में मुख्य रूप से ये मामले आ सकते हैं:

1. कोर्ट या ट्रिब्यूनल में लंबित मामले

अगर PF योगदान में देरी से जुड़ी डैमेज की कार्यवाही किसी कोर्ट या ट्रिब्यूनल में चल रही है, तो पात्र होने पर उसे विश्वास 2026 के तहत सेटल किया जा सकता है।

2. डैमेज का आदेश जारी हो चुका है

अगर EPFO पहले ही डैमेज लगाने का आदेश दे चुका है, लेकिन उसकी पूरी वसूली नहीं हुई है या कुछ राशि अभी भी बकाया है, तो ऐसा मामला भी योजना के तहत आ सकता है।

3. नोटिस जारी, लेकिन अंतिम आदेश नहीं

अगर EPFO ने डैमेज लगाने का प्रस्ताव देते हुए नोटिस जारी किया है, लेकिन अभी तक इस पर अंतिम आदेश नहीं आया है, तो ऐसे मामले भी पात्र हो सकते हैं।

4. देरी दर्ज है, लेकिन डैमेज नोटिस नहीं आया

अगर EPFO के रिकॉर्ड में PF भुगतान में देरी दर्ज है, लेकिन अभी तक डैमेज का नोटिस जारी नहीं किया गया है, तो अन्य शर्तें पूरी होने पर ऐसा मामला भी योजना के दायरे में आ सकता है।

हाई कोर्ट से भी मिल रहा है रास्ता

रिपोर्ट्स की मानें तो विश्वास 2026 के तहत पुराने मामलों के निपटारे को लेकर हाई कोर्ट के सामने भी मामले पहुंचे हैं। कई अदालतों ने पात्र संस्थानों को इस योजना के तहत सेटलमेंट का रास्ता अपनाने की अनुमति दी है। बॉम्बे हाई कोर्ट की पुणे बेंच ने रिट याचिका संख्या 4246/2018 में एक नियोक्ता को विश्वास 2026 के तहत आवेदन करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने संस्थान को दो सप्ताह के भीतर आवेदन करने को कहा और पहले दिए गए ट्रिब्यूनल के आदेश में बदलाव करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

वहीं मद्रास हाई कोर्ट ने रिट याचिका संख्या 38008/2024 का निपटारा किया। सुनवाई के दौरान नियोक्ता ने विश्वास 2026 योजना का लाभ लेने की इच्छा जताई थी। इसके बाद हाई कोर्ट ने रिट याचिका के साथ संबंधित ट्रिब्यूनल की कार्यवाही को भी समाप्त कर दिया। इसके अलावा केरल हाई कोर्ट की एर्नाकुलम बेंच ने भी ऐसे 19 मामलों में निर्देश दिए। कोर्ट ने संबंधित संस्थानों से विश्वास 2026 के तहत सेटलमेंट के लिए EPFO से संपर्क करने को कहा।

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